इंदौर, 29 अगस्त 2025 — लव जिहाद फंडिंग और दुष्कर्म के संगीन आरोपों में लंबे समय से फरार चल रहे कांग्रेस पार्षद अनवर क़ादरी का आज (शुक्रवार) इंदौर जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण हुआ। यह घटनाक्रम उस समय अचानक सामने आया, जब पुलिस ने उनके खिलाफ जारी ₹40,000 का इनाम और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई तेज कर दी थी।
क्या है मामला?
अनवर कादरी पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू युवतियों को फंसाने और धर्मांतरण में संलिप्त दो आरोपियों—साहिल और अल्ताफ—को आर्थिक सहायता दी। आरोप है कि कादरी ने दो आरोपियों को तीन लाख रुपये तक देकर हिन्दू युवतियों से संबंध जोड़ने और धर्म परिवर्तन कराने की योजना रची।
स्थानीय पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने पूछताछ में यह खुलासा किया था। इस मामले के गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कादरी को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत नामजद किया था।
आत्मसमर्पण का नाटकीय दृश्य
आज सुबह कोर्ट में पेश होने से पहले अनवर कादरी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए दाढ़ी और मूंछें कटवाई थीं, और वकील की वेशभूषा में कोर्ट में आए—जिससे पहचाना जाना मुश्किल हो गया। जैसे ही वे कोर्ट परिसर में पहुँचे, वहां मौजूद लोगों ने उन पर हमला करने तक की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित रूप से कस्टडी में लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
पुलिस ने उन्हें 8 दिन के रिमांड पर लिया है, जिसमें उन्हें लव जिहाद फंडिंग के दायरे, आरोपियों से संबंध और अन्य नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी। कोर्ट ने उनसे 8 सितंबर तक खुद पेश होने का निर्देश दिया था, और गिरफ्तारी से पहले संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।
राजनीतिक और पुलिस स्तर की प्रतिक्रिया
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पहले ही पार्षद पद से अनवर कादरी को हटाने की मांग की थी। यह प्रस्ताव नगर निगम की समिति में पास हो चुका था।
पुलिस को पहले ही जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की गई थी—पहले ₹10,000, बाद में ₹40,000 तक बढ़ाकर। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि सूचना देने वालों को गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी।
मामले की सामाजिक और कानूनी गंभीरता
यह मामला केवल एक नेता की गिरफ्तारी का नहीं बल्कि राज्य में लव जिहाद जैसे संवेदनशील आरोपों में सत्ता और कानून प्रभाव की परीक्षा भी बन चुका है। हिंदू-मुस्लिम मामलों में ऐसे संगीन आरोप तुरंत सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ जन्म लेते हैं, और यह मामला कहीं भी “साज़िश” से बढ़कर कानूनी, प्रशासनिक और संवेदनशील सामाजिक मसला बन चुका है।

निष्कर्ष
अनवर क़ादरी प्रकरण सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है बल्कि यह समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़ा करता है। लव जिहाद और दुष्कर्म जैसे संगीन आरोपों ने इस केस को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। इंदौर जैसे प्रगतिशील और तेजी से बढ़ते शहर में ऐसी घटनाएं लोगों की भावनाओं को गहराई से झकझोर देती हैं। एक तरफ युवाओं को रिश्तों में विश्वास और सुरक्षा की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ धर्म और पहचान के नाम पर उपजे विवाद सामाजिक सौहार्द को कमजोर करते हैं। इस केस ने प्रशासन, पुलिस और समाज सभी को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किस तरह से ऐसे अपराधों पर सख्ती से लगाम लगाई जा सकती है। न्यायपालिका से लेकर आम जनता तक सभी की निगाहें इस मामले की अगली कार्रवाई पर टिकी होंगी। अगर आरोप साबित होते हैं तो यह एक उदाहरण बनेगा कि समाज में अपराध और धोखे को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

