🔥 Quick Highlights
- बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात बेकाबू
- ढाका समेत कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़
- मीडिया दफ्तरों को बनाया गया निशाना, कई जगह कामकाज ठप
- सरकार विरोधी नारों के साथ anti-India भावनाएं भी उभरीं
- राजनीतिक अस्थिरता और आगामी चुनावों पर संकट गहराया
🧨 360 विश्लेषण
बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देशभर में हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। हादी को सरकार विरोधी छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा माना जाता था और वह लंबे समय से सत्ता के खिलाफ खुलकर बोलते रहे थे।
बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले ढाका में उन पर हमला हुआ था, जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। इलाज के लिए उन्हें विदेश ले जाया गया, लेकिन वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर सामने आई, बांग्लादेश के कई हिस्सों में गुस्सा फूट पड़ा।
ढाका, चटगांव और अन्य बड़े शहरों में छात्रों और समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए। सरकारी इमारतों के साथ-साथ मीडिया संस्थानों को भी निशाना बनाया गया, जिससे प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादी की मौत सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक दमन की कड़ी है। इसी नाराजगी के चलते विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र रूप लेते चले गए। कई इलाकों में आगजनी, वाहनों में तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की खबरें सामने आईं।
इस पूरे घटनाक्रम में एक संवेदनशील पहलू यह भी रहा कि कुछ जगहों पर भारत विरोधी नारे लगाए गए। इससे हालात सिर्फ आंतरिक संकट तक सीमित नहीं रहे, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी तनाव की स्थिति बनती दिखी।
बांग्लादेश में पहले से ही चुनावी माहौल को लेकर राजनीतिक खींचतान चल रही है। ऐसे समय में एक बड़े छात्र नेता की मौत और उसके बाद फैली हिंसा ने सरकार, लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
🧠 निष्कर्ष
शरीफ उस्मान हादी की मौत अब सिर्फ एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं रही, बल्कि यह बांग्लादेश में गहराते राजनीतिक संकट का प्रतीक बन चुकी है।
हिंसक प्रदर्शन, मीडिया पर हमले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंताओं ने साफ कर दिया है कि हालात अगर जल्द काबू में नहीं आए, तो आने वाले समय में देश को और बड़ी अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

