भोपाल इन दिनों एक ऐसे केस की गूंज से भरा हुआ है, Bhopal Drug Case जिसने न सिर्फ़ पुलिस-प्रशासन को चौकन्ना कर दिया, बल्कि राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक सबका ध्यान खींच लिया है। मामला है मछली परिवार का, जो बीते कई सालों से भोपाल और आसपास के इलाकों में अपने रसूख, ड्रग्स नेटवर्क और अपराधों के लिए बदनाम रहा है। इस परिवार की पकड़ इतनी मज़बूत थी कि बड़े-बड़े अफसर और नेता भी इनके आगे बेबस नज़र आते थे। मगर इस बार हालात बदले हैं, और मछली परिवार का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह बिखरता दिखाई दे रहा है।
करोड़ों की हवेली पर बुलडोज़र
गुरुवार को प्रशासन ने मछली परिवार की आलीशान तीन मंज़िला कोठी पर बुलडोज़र चला दिया। यह कोठी लगभग 15,000 स्क्वायर फीट पर बनी थी और कीमत ₹25–₹30 करोड़ आंकी जा रही थी। जांच में सामने आया कि यह पूरी ज़मीन सरकारी थी, जिस पर अवैध कब्ज़ा कर आलीशान महल खड़ा कर दिया गया था।
कोठी को तोड़े जाने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी भी तरह का विरोध न हो सके। इलाके में भारी भीड़ जुट गई और लोग कहते दिखे — “इतने सालों से यह लोग खुलेआम गैरकानूनी काम कर रहे थे, अब जाकर सरकार ने सही कदम उठाया।”
सिर्फ एक इमारत नहीं, पूरा साम्राज्य गिरा
यह कार्रवाई सिर्फ एक मकान तक सीमित नहीं थी। प्रशासन पहले ही 30 जुलाई को मछली परिवार की अन्य संपत्तियों पर भी बुलडोज़र चला चुका है। इसमें फार्महाउस, फैक्ट्री, मदरसा, गोदाम और कई प्लॉट शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक़ अब तक लगभग ₹100 करोड़ से ज़्यादा की अवैध संपत्ति ध्वस्त की जा चुकी है।
यानी मामला सिर्फ़ एक आलीशान कोठी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरा एक आपराधिक साम्राज्य ध्वस्त हो रहा है।
अपराधों का अड्डा बना मछली परिवार
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया कि यासीन और शाहवर मछली न केवल ड्रग्स तस्करी में लिप्त थे, बल्कि लव जिहाद, अवैध हथियारों का सौदा और ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों में भी शामिल थे। उनके कब्ज़े से ड्रग्स, पिस्टल और कई आपत्तिजनक वीडियो बरामद किए गए।
कहा जाता है कि इस परिवार ने भोपाल में एक ऐसा नेटवर्क बना रखा था जिसमें कॉलेज के छात्र, स्थानीय अपराधी और यहां तक कि कुछ सरकारी मुलाज़िम भी शामिल थे। ड्रग्स की सप्लाई और ब्लैकमेलिंग का धंधा इतना बड़ा हो गया था कि शहर का हर दूसरा बड़ा इलाका इनकी पकड़ में था।
रसूख और राजनीतिक कनेक्शन
लोगों का मानना है कि इतने लंबे समय तक मछली परिवार को कोई हाथ क्यों नहीं लगा पाया, इसका जवाब उनके राजनीतिक और प्रशासनिक रिश्तों में छुपा है। कई नेताओं और अफसरों पर आरोप है कि वे परिवार के संपर्क में थे और बदले में उन्हें आर्थिक व राजनीतिक लाभ पहुंचाया जाता था।
यही वजह थी कि चाहे कितनी भी शिकायतें मिलतीं, मगर कार्रवाई आधे-अधूरे स्तर पर ही रुक जाती थी। लेकिन इस बार हालात अलग हैं।
सरकार का ज़ीरो टॉलरेंस मॉडल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि मध्यप्रदेश में लव जिहाद, ड्रग्स माफिया और अवैध हथियारों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उनके शब्दों में — “चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अब कानून से बच नहीं पाएगा।”
यह बयान सिर्फ़ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है कि प्रदेश में अपराध के खिलाफ़ समझौते की गुंजाइश नहीं है।
जनता की प्रतिक्रिया
कार्रवाई के दौरान आसपास खड़े लोग यह कहते दिखाई दिए कि “अब जाकर न्याय हो रहा है।” कई लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि यह कदम देर से सही, मगर सही समय पर उठाया गया।
हालांकि, कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दिया। उनका कहना है कि सरकार सिर्फ़ चुनिंदा लोगों पर ही सख़्ती दिखा रही है, जबकि कई और रसूखदार अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।
राजनीतिक असर
यह पूरा घटनाक्रम मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। एक तरफ़ सरकार इसे अपनी “कठोर नीति” का उदाहरण बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी स्टंट बताने से पीछे नहीं हट रहा। मगर इतना तय है कि जनता के बीच इस कार्रवाई ने एक सकारात्मक संदेश ज़रूर छोड़ा है।

निष्कर्ष
भोपाल का यह ड्रग केस और मछली परिवार पर हुई कार्रवाई केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि अपराध और भ्रष्टाचार का साम्राज्य कितना गहरा हो चुका था। बुलडोज़र से ढही इमारतें केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं थीं, बल्कि दशकों से जमा हुआ अवैध साम्राज्य था।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस केस को किस अंजाम तक ले जाता है और क्या अन्य अपराधी परिवारों पर भी इसी तरह की सख़्ती दिखाई जाएगी। लेकिन इतना तय है कि भोपाल ड्रग केस आने वाले समय में अपराध और राजनीति पर लंबी बहस का मुद्दा बनने वाला है।

