🚩 ऐतिहासिक पल! दिल्ली से वृंदावन तक ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ शुरू, धीरेंद्र शास्त्री बोले- यह यात्रा नहीं, विचारों की क्रांति
छतरपुर/नई दिल्ली: देश में एक वैचारिक क्रांति का बिगुल बज चुका है! बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र शास्त्री के नेतृत्व में 10-दिवसीय ‘सनातन हिंदू एकता पदयात्रा’ शुक्रवार (7 नवंबर) की सुबह इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) से श्रीधाम वृंदावन के लिए रवाना हो गई है। यह यात्रा केवल 170 किलोमीटर की दूरी तय नहीं करेगी, बल्कि तीन राज्यों— दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश— की 5 करोड़ से अधिक आबादी तक हिंदू एकता और राष्ट्रवाद का संदेश पहुंचाएगी।
🙏 धर्म ध्वज के साथ भव्य आगाज
पदयात्रा की शुरुआत छतरपुर स्थित कात्यायनी माता मंदिर से हुई। इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए देशभर से आए महामंडलेश्वरों, आचार्यों और साधु-संतों ने अपने आशीर्वचनों की वर्षा की। यात्रा आरंभ होने से पहले राष्ट्रगान गाया गया, हनुमान चालीसा का पाठ हुआ और सभी भक्तों को हिंदू एकता की शपथ दिलाई गई। संतों द्वारा सौंपे गए पवित्र धर्म ध्वज को आगे रखकर, ‘श्री राम नाम संकीर्तन’ की गूंज के बीच, लाखों श्रद्धालुओं का यह कारवां वृंदावन की ओर चल पड़ा।
🤝 विवाद नहीं, संवाद से आगे बढ़ेंगे: शास्त्री जी
पदयात्रा शुरू होने से ठीक पहले, दिल्ली में मीडिया से संवाद करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस यात्रा के मूल उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने इसे ‘यात्रा नहीं, वैचारिक क्रांति’ बताया। महाराज श्री ने साफ कहा कि वह विवाद नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने हर उस व्यक्ति से इस राष्ट्रीय महायज्ञ में अपनी आहुति देने का आह्वान किया, जो हिंदुत्ववादी विचारधारा का समर्थक है। उन्होंने देश-विदेश के हिंदुओं से 7 नवंबर से 16 नवंबर तक चलने वाली इस यात्रा में कम से कम एक दिन के लिए शामिल होने का आग्रह किया है।
“यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं है, यह सभी हिंदुओं की है। जो भी हिंदुत्ववादी विचारधारा का है, वह हमारे साथ चले।” – पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
🌟 संतों और राजनेताओं का मिला समर्थन
इस पदयात्रा को देश के अनेक प्रतिष्ठित संत-महात्माओं का समर्थन मिला है। इसमें दीदी मां ऋतंभरा, चिदानंद मुनि जी (ऋषिकेश), स्वामी ज्ञानानंद महाराज गीता मनीषी, रमणरेती वाले महाराज, प्रख्यात कथा वाचक सुधांशु जी महाराज, राजू दास महाराज (हनुमान गढ़ी), और अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पं. संजीव कृष्ण ठाकुर जैसी विभूति शामिल हैं।
राजनीतिक जगत से भी दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा सहित कई नेताओं की गरिमामय उपस्थिति रही। इसके अलावा, दिल्ली से 50 से अधिक संत-महात्मा यात्रा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
🌙 मुस्लिम समाज ने भी दिया समर्थन, 300 से अधिक लोग शामिल
पदयात्रा का एक अभूतपूर्व पहलू यह है कि इसे इस्लाम धर्म के लोगों का भी समर्थन मिला है। महाराज श्री ने बताया कि यह पहला अवसर है जब उनकी किसी यात्रा का समर्थन मुस्लिम समाज ने किया है। फैज खान के नेतृत्व में 300 से अधिक मुस्लिम समाज के लोग भी इस यात्रा में साथ चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि यह यात्रा लोगों को जोड़ने का काम कर रही है, इसलिए वे सनातन हिंदू एकता पदयात्रा का समर्थन करते हैं।
📜 यात्रा के प्रमुख संकल्प: राष्ट्रहित सर्वोपरि
पंडित शास्त्री ने पदयात्रियों से मर्यादा बनाए रखने और किसी भी जाति, पंथ, या संप्रदाय विशेष पर कोई टिप्पणी न करने का विशेष आग्रह किया है। यात्रा में अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा। इस यात्रा के माध्यम से बागेश्वर महाराज ने सात प्रमुख संकल्प लिए हैं, जो राष्ट्र और धर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं:
- यमुना माता का शुद्धिकरण हो।
- भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो।
- गौ माता राष्ट्र माता घोषित हो।
- श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर भव्य और दिव्य बने।
- ब्रज परिक्षेत्र को पूर्व का स्वरूप प्राप्त हो और क्षेत्र में मांस-मदिरा प्रतिबंधित हो।
- अवैध धर्मांतरण एवं लव जिहाद पर लगाम लगे।
- जात-पात, ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म होकर सामाजिक समरसता हो।
महिलाओं की सुरक्षा और निजता का विशेष ध्यान रखते हुए, उनके विश्राम स्थलों पर सीसीटीवी कैमरा से निगरानी की व्यवस्था की गई है।
कुल मिलाकर, दिल्ली से वृंदावन तक की यह पदयात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को जगाने का एक शक्तिशाली प्रयास है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘वैचारिक क्रांति’ देश के जनमानस पर क्या प्रभाव डालती है।

