नई दिल्ली — भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी खुदरा महंगाई को मापने का तरीका अब बदल दिया गया है। अब पुरानी सीरीज के बजाय 2024-आधारित नई सीरीज लागू की गई है, जिससे महंगाई के आंकड़े अधिक सटीक और आधुनिक खर्च पैटर्न को दर्शाएंगे।
देश भर में 1,465 ग्रामीण और 1,395 शहरी बाजारों से मूल्य डेटा एकत्र किया जाएगा, और 12 बड़े शहरी क्षेत्रों में ई-कॉमर्स मंचों से साप्ताहिक आधार पर ऑनलाइन कीमतें भी ली जाएँगी। इससे डिजिटल-आधारित खर्च के प्रभाव को भी महंगाई माप में शामिल किया जा सकेगा।
नई सीरीज में कुल 358 भारित वस्तुएं और सेवाएं शामिल हैं — जो पहले केवल 299 थीं। इनमें 308 वस्तुएं और 50 सेवाओं की कीमतों की गणना होगी, जिससे महंगाई का माप और अधिक व्यापक होगा।
इस नई संरचना का उद्देश्य घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के परिणामों के अनुरूप महंगाई आंकड़ों को अपडेट करना है, ताकि यह वर्तमान व्यय व्यवहार को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करे।
साथ ही अब र rural housing rent (ग्रामीण मकान किराया) को भी CPI में पहली बार शामिल किया गया है, जो पहले शामिल नहीं था। यह बदलाव ग्रामीण खर्च की वास्तविक तस्वीर को और अधिक स्पष्ट करेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस संशोधित सीरीज से महंगाई के आंकड़ों में थोड़े बदलाव देखे जा सकते हैं, क्योंकि अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं के भार को अपडेट किया गया है।

