देश में टैक्स व्यवस्था को लेकर सरकार एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। एक तरफ जहाँ हानिकारक उत्पादों जैसे सिगरेट, गुटखा और पान मसाला पर 40% तक जीएसटी (GST) बढ़ाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर आम जनता की ज़रूरतों से जुड़े हेल्थ और इंश्योरेंस सेक्टर को राहत दी जाएगी। वित्त मंत्रालय और GST Council Meeting 2025 में इस पर गंभीर चर्चा हुई है। आने वाले हफ्तों में यह बदलाव लागू हो सकता है।
क्यों बढ़ाया जा रहा है तंबाकू उत्पादों पर टैक्स?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहाँ तंबाकू का सेवन सबसे ज़्यादा होता है। सिगरेट, गुटखा और पान मसाला से हर साल लाखों लोग कैंसर और गंभीर बीमारियों का शिकार बनते हैं। हेल्थ रिपोर्ट्स बताती हैं कि तंबाकू-जनित बीमारियों के कारण सरकार पर हर साल अरबों रुपये का बोझ पड़ता है।
यही कारण है कि सरकार लगातार तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ा रही है ताकि इनकी खपत को कम किया जा सके और लोग हेल्दी विकल्प अपनाएँ।
40% GST लगाने से उम्मीद है कि ये प्रोडक्ट और महंगे होंगे और युवा वर्ग खासकर इनसे दूरी बनाएगा। फिलहाल सिगरेट और पान मसाला पर अलग-अलग टैक्स स्लैब हैं, लेकिन अब एक समान ऊँचा टैक्स रेट तय किया जा सकता है।
हेल्थ और इंश्योरेंस पर क्यों घटेगा टैक्स?
जहाँ एक तरफ हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकार चाहती है कि आम लोग हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस जैसी सेवाओं से ज्यादा जुड़ें। कोरोना महामारी के बाद से देश में हेल्थ इंश्योरेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया था, लेकिन ऊँचे GST रेट (18%) के कारण कई लोग इसे खरीदने से बचते हैं।
अब सरकार इस टैक्स को घटाकर 12% या उससे भी कम करने पर विचार कर रही है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा क्योंकि हेल्थ पॉलिसी और प्रीमियम दोनों ही सस्ते हो जाएंगे।
सरकार की दोहरी रणनीति
यह कदम दरअसल सरकार की दोहरी रणनीति को दिखाता है।
- एक तरफ हानिकारक चीज़ों को महंगा कर लोगों की सेहत सुरक्षित करना।
- दूसरी तरफ जरूरी और फायदेमंद सेवाओं को सस्ता कर लोगों को उनसे जोड़ना।
इससे न सिर्फ पब्लिक हेल्थ पर सकारात्मक असर पड़ेगा बल्कि बीमा कंपनियों और हेल्थ सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा।
इंडस्ट्री और जनता की प्रतिक्रिया
तंबाकू उद्योग से जुड़े कारोबारी इस कदम का विरोध कर सकते हैं क्योंकि इससे उनकी बिक्री प्रभावित होगी। पहले भी कई बार जब टैक्स बढ़ा, तो इन कंपनियों ने चेतावनी दी थी कि इससे काला बाज़ार और तस्करी बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, इंश्योरेंस कंपनियाँ और मेडिकल सेक्टर इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका कहना है कि टैक्स कम होने से ज्यादा लोग बीमा खरीदेंगे और हेल्थ सेक्टर में निवेश बढ़ेगा।
आम जनता की नज़र से देखें तो लोग इस फैसले को संतुलित मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने लिखा कि “जो सेहत खराब करे वो महंगा होना चाहिए और जो सुरक्षा दे वो सस्ता।”
हेल्थ सेक्टर में बढ़ेगा भरोसा
भारत में अभी भी लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस की पैठ बहुत कम है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल 3-4% भारतीयों के पास ही हेल्थ इंश्योरेंस है। अगर टैक्स कम हो जाता है तो पॉलिसियों की कीमतें घटेंगी और मध्यम वर्ग भी इन्हें आसानी से खरीद सकेगा।
इससे लंबी अवधि में सरकार का हेल्थकेयर बोझ भी घटेगा क्योंकि ज़्यादा लोग प्राइवेट इंश्योरेंस कवर में आ जाएंगे।
भविष्य की राह
हालाँकि यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन असली चुनौती इसके क्रियान्वयन में होगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ने से इनकी अवैध बिक्री न बढ़े। साथ ही बीमा क्षेत्र में टैक्स कम करने के बाद कंपनियाँ अपने प्रोडक्ट्स को आम जनता तक सही तरीके से पहुँचाएँ।
निष्कर्ष
सरकार का यह ताज़ा निर्णय केवल टैक्स सुधार भर नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की सेहत और भविष्य की सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ कदम है। लंबे समय से यह मांग उठती रही थी कि हानिकारक वस्तुओं जैसे सिगरेट, गुटखा और पान मसाले पर सख्त टैक्स व्यवस्था हो, ताकि इनकी खपत को रोका जा सके। 40% GST लागू कर सरकार ने यह संकेत दिया है कि अब स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी और ऐसी चीज़ों को आसानी से उपलब्ध नहीं होने दिया जाएगा। यह कदम आने वाली पीढ़ियों को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए भी अहम साबित हो सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस जैसी सेवाओं पर टैक्स कम या पूरी तरह खत्म करना जनता को सीधी राहत देगा। अब आम लोग पहले की तुलना में आसानी से बीमा पॉलिसी ले पाएंगे, जिससे परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित होंगे। खासतौर पर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय तबके के लोग, जो अब तक महंगे प्रीमियम की वजह से बीमा से दूर रहते थे, वे भी इसमें शामिल हो सकेंगे।
कुल मिलाकर, सरकार की यह दोहरी रणनीति—हानिकारक वस्तुओं को महंगा करना और ज़रूरी सेवाओं को सस्ता बनाना—देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को मजबूत करेगी। यह फैसला आने वाले वर्षों में भारत को एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की ओर ले जाने वाला मील का पत्थर साबित हो सकता है।

