भारत और पाकिस्तान (India vs pakistan) के बीच होने वाले क्रिकेट मैच को लेकर राजनीति गरमा गई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने केंद्र सरकार पर सीधा सवाल उठाया है कि जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिक आतंकी हमले का शिकार हुए, तब ऐसे समय में पाकिस्तान से क्रिकेट खेलकर सरकार देश को क्या संदेश देना चाहती है? पार्टी प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि “जब व्यापार, पानी और अन्य सभी रिश्ते पाकिस्तान से तोड़ दिए गए हैं, तो फिर क्रिकेट मैच की इजाज़त क्यों? आखिर पहलगाम के पीड़ित परिवारों को क्या जवाब देंगे?”


पहलगाम हमला और उसके बाद का माहौल

कुछ सप्ताह पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। धार्मिक आधार पर हुए इस हमले में निर्दोष पर्यटक और स्थानीय लोग अपनी जान गंवा बैठे। घटना के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी। इसके साथ ही, कई मोर्चों पर पाकिस्तान के साथ संपर्क बंद कर दिए गए थे — चाहे वह व्यापारिक हो, जल संसाधनों से जुड़ा हो या कूटनीतिक।

ऐसे हालात में भारत-पाक क्रिकेट मैच का ऐलान होना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़ा करता है कि क्या क्रिकेट को वाकई ‘खेल’ मानकर अलग रखा जा सकता है या फिर यह भी उन रिश्तों का हिस्सा है जिन्हें फिलहाल ठंडे बस्ते में डालना चाहिए।


AIMIM का कड़ा रुख

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “जब सीमा पर जवान शहीद हो रहे हों, पहलगाम जैसे हमले हो रहे हों और पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को बढ़ावा मिल रहा हो, तब क्रिकेट खेलना पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।”

असदुद्दीन ओवैसी ने भी साफ शब्दों में कहा कि उनका “जमीर” इस मैच को देखने की इजाज़त नहीं देता। उन्होंने सवाल किया कि एक तरफ सरकार पाकिस्तान को लेकर सख्त कदम उठाती है, वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट मैच को मंजूरी क्यों देती है।


खेल बनाम राजनीति की बहस

यह बहस नई नहीं है। हर बार जब भारत-पाक क्रिकेट सीरीज या टूर्नामेंट में भिड़ंत होती है, तो यह सवाल उठता है कि क्या खेल को राजनीति और आतंकवाद से अलग रखा जाना चाहिए। क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि खेल को किसी भी हालात में जारी रहना चाहिए क्योंकि यह दोनों देशों के बीच संवाद का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।

वहीं आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने की नीति के बीच क्रिकेट मैच खेलना परस्पर विरोधाभासी कदम है। उनका तर्क है कि आतंक और खेल एक साथ नहीं चल सकते।


सरकार और BCCI की भूमिका

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं। BCCI ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। आमतौर पर क्रिकेट बोर्ड यह कहता है कि राजनीतिक और कूटनीतिक फैसले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और वे केवल खेल पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

हालांकि विपक्ष और AIMIM जैसे दलों के सवालों के बाद केंद्र पर दबाव बढ़ना तय है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि वह इस मैच को महज खेल मानती है या फिर इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और भावनाओं का भी पहलू जुड़ा हुआ है।


जनता की राय बंटी हुई

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस तेज है। एक वर्ग का कहना है कि भारत को हर मंच पर पाकिस्तान को हराना चाहिए, चाहे वह युद्ध हो, कूटनीति हो या फिर खेल का मैदान। उनका मानना है कि भारत-पाक मैच न सिर्फ रोमांचक होता है बल्कि देश की एकजुटता का प्रतीक भी है।

दूसरी तरफ, कई लोग AIMIM की दलील का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब देश आतंकी हमले के घाव झेल रहा हो, तब पाकिस्तान के साथ खेलना सही संदेश नहीं देगा। पहलगाम हमले के पीड़ित परिवारों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।

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निष्कर्ष

भारत-पाक क्रिकेट मैच हमेशा से ही संवेदनशील मुद्दा रहा है। आतंकवाद और सीमा पार तनाव की वजह से यह सवाल और भी जटिल हो जाता है कि क्या क्रिकेट को राजनीति से अलग रखा जा सकता है। AIMIM ने सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर वह पहलगाम पीड़ितों और देश की जनता को इस फैसले पर क्या तर्क देगी।

अब देखना यह होगा कि सरकार और BCCI इस मामले को कैसे संभालते हैं। क्या खेल को महज खेल की तरह देखा जाएगा या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और भावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी? यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

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