father and son

Quick Highlights

  • IndiGo की फ्लाइट कैंसिल होने से परिवार की यात्रा योजना पूरी तरह बिगड़ी
  • पिता ने बेटे की प्री-बोर्ड परीक्षा बचाने के लिए 800 किमी कार से सफर किया
  • बेटे की परीक्षा इंदौर के Daily College में थी
  • बीते दिनों में IndiGo की कई उड़ानें रद्द, यात्रियों में बढ़ी नाराजगी
  • यात्रा बाधित होने से बोर्ड परीक्षाओं में बैठने का खतरा था

खबर का विश्लेषण

इंदौर। देशभर में लगातार हो रही IndiGo की फ्लाइट कैंसिलेशन का असर एक के बाद एक यात्रियों की योजनाओं पर पड़ रहा है। ताज़ा मामला हरियाणा के एक परिवार से सामने आया है, जहां पिता को अपने बेटे की पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिल्ली से इंदौर तक लगभग 800 किलोमीटर की दूरी कार से तय करनी पड़ी। यह पूरा सफर सिर्फ इसलिए किया गया ताकि बेटा समय पर प्री-बोर्ड परीक्षा दे सके।

परिवार ने बताया कि उन्होंने पहले से इंदौर की फ्लाइट बुक की हुई थी। बेटा इंदौर के Daily College में पढ़ता है और प्री-बोर्ड परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण थी। परीक्षा में शामिल न होने की स्थिति में न सिर्फ उसके इंटरनल मार्क्स प्रभावित होते, बल्कि बोर्ड के लिए आवश्यक उपस्थिति भी खतरे में आ सकती थी। लेकिन यात्रा से कुछ घंटे पहले IndiGo द्वारा उड़ान रद्द करने की सूचना मिलते ही परिवार की चिंता बढ़ गई।

अचानक फ्लाइट रद्द होने से चुनाव बहुत सीमित थे। नए टिकट का विकल्प नहीं मिला, और उपलब्ध उड़ानें समय के लिहाज से बिल्कुल अनुकूल नहीं थीं। ऐसी परिस्थिति में पिता ने जोखिम उठाते हुए तुरंत कार से इंदौर रवाना होने का फैसला किया। लंबा सफर होने के बावजूद, उन्होंने बिना रुके यात्रा जारी रखी। रातभर ड्राइव करने के बाद वह सुबह इंदौर पहुँचे और समय पर बेटे को परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि एयरलाइंस की अनियमितताओं के चलते बढ़ती यात्रियों की मुश्किलों पर भी सवाल उठाती है। पिछले कुछ दिनों में IndiGo की कई उड़ानें देशभर में अचानक रद्द की गई हैं, जिससे हजारों यात्री प्रभावित हुए हैं। कई लोग मीटिंग, परीक्षा, मेडिकल अपॉइंटमेंट, पारिवारिक कार्यक्रम और नौकरी से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों से चूक रहे हैं।

हरियाणा के इस परिवार की कहानी एक पिता के समर्पण का उदाहरण भी पेश करती है। जब फ्लाइट कैंसिल हुई, तब उन्होंने सिर्फ अपने बेटे के करियर और पढ़ाई को प्राथमिकता दी और लंबा, थकाऊ सफर तय किया। उनका कहना है कि “परीक्षा जीवन में बार-बार नहीं आती, इसलिए जो जरूरी था, वह हमने किया।”


निष्कर्ष

IndiGo की उड़ानों के लगातार रद्द होने से एक बार फिर यह मुद्दा सामने आया है कि एयरलाइंस को यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर और ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हरियाणा के इस परिवार की कहानी दिखाती है कि एक परीक्षा बचाने के लिए लोग किस हद तक जाने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे मामलों में यात्रियों की परेशानियाँ और एयरलाइन की जवाबदेही—दोनों ही विषय अब गंभीर चर्चा की मांग करते हैं।

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