🟢 Quick Highlights

  • इंदौर में आज सुबह से प्रशासन की टीम ने मंदिरों और चौराहों पर चलाया विशेष अभियान।
  • भिखारियों को देखकर टीम को आते ही कई भिखारी दौड़ पड़े।
  • महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई।
  • अभियान कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर “भिक्षामुक्त इंदौर” मिशन के तहत शुरू।
  • प्रमुख स्थानों जैसे अन्नपूर्णा मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर और स्कीम 140 क्षेत्र में हुई कार्रवाई।

📰 विस्तृत विवरण (Detailed Body)

इंदौर (indore) में आज सुबह का नज़ारा कुछ अलग था — मंदिरों और चौराहों पर प्रशासनिक टीमों का जमावड़ा दिखा। दरअसल, शहर को “भिक्षामुक्त”(baggers free) बनाने के लिए आज सुबह से प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया। यह अभियान शहर के मंदिरों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में चलाया गया, जहाँ भिखारियों की संख्या अधिक पाई जाती है।

इस कार्रवाई का नेतृत्व कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर किया गया, जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और नगर निगम ( municipal corporation) के अधिकारी शामिल थे। अभियान का मकसद केवल भिखारियों को पकड़ना नहीं बल्कि उन्हें पुनर्वास की ओर ले जाना है, ताकि शहर में भीख मांगने की प्रवृत्ति खत्म हो सके।

टीम ने सबसे पहले अन्नपूर्णा मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर, और स्कीम 140 क्षेत्र में कार्रवाई की। जैसे ही भिखारीयों ने टीम को आता देखा, कई लोग वहां से भागते नज़र आए। कुछ को टीम ने पकड़कर पुनर्वास केंद्र भेजा गया, जहाँ उनके स्वास्थ्य परीक्षण और पहचान की प्रक्रिया की गई।

अभियान में प्रशासन की टीमों को सुबह 8 बजे से लेकर देर शाम तक लगातार गश्त करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान यह भी तय किया गया कि किसी भी धार्मिक स्थल या सार्वजनिक स्थान पर अब भिखारियों को ठहरने नहीं दिया जाएगा।

शहर प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं बल्कि लगातार चलने वाला मिशन है। इंदौर पहले भी “स्वच्छ भारत अभियान” में देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका है, और अब लक्ष्य है “भिक्षामुक्त इंदौर” का दर्जा हासिल करना।

पिछले कुछ महीनों में प्रशासन ने लगभग 5000 से अधिक भिखारियों को पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से रोजगार और आश्रय दिलाने की पहल की थी। इससे यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में इंदौर देश का पहला ऐसा शहर बन सकता है जो पूरी तरह भिक्षावृत्ति मुक्त हो।


🟣 निष्कर्ष

इंदौर प्रशासन का यह कदम सामाजिक और मानवीय दृष्टि से बेहद सराहनीय है। “भिक्षामुक्त इंदौर” अभियान न सिर्फ शहर की स्वच्छता और व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि उन लोगों के जीवन में भी बदलाव लाएगा जो मजबूरी में सड़कों पर भीख मांगते हैं।
हालांकि, सफलता तभी मानी जाएगी जब यह अभियान केवल पकड़धकड़ तक सीमित न रहे, बल्कि भिखारियों को स्थायी रोजगार, शिक्षा और रहने की सुविधा भी मिले।

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