📌 Quick Highlights
- इंदौर–दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट अंतिम चरण में पहुँचा
- 204.76 किमी लंबी रेल लाइन में 19 बड़े पुल पूरे
- फरवरी 2026 में CRS निरीक्षण प्रस्तावित
- इंदौर से धार तक पहली बार सीधे रेल कनेक्टिविटी का रास्ता साफ
- स्टेशन भवनों, ट्रैक और ब्रिज का काम तेज़ी से जारी
- प्रोजेक्ट की कुल लागत 1,873 करोड़ रुपये
📌 360 विश्लेषण
इंदौर–दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट, जिसका इंतज़ार लंबे समय से किया जा रहा था, अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया है। लगभग 204.76 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की कुल लागत 1,873.10 करोड़ रुपये है, और रेलवे के अधिकारियों के अनुसार अब अधिकांश सिविल वर्क लगभग पूरा हो चुका है। यह रेल लाइन इंदौर को धार, झाबुआ होते हुए दाहोद से जोड़ेगी, जिससे न केवल मध्य प्रदेश बल्कि गुजरात और राजस्थान के बीच भी तेज़ और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।
इस परियोजना के तहत कुल 21 बड़े पुल प्रस्तावित थे, जिनमें से 19 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि दो पुलों का काम अंतिम चरण में है। इसके अलावा छोटे पुलों, कल्वर्ट और रेलवे ट्रैक बिछाने का काम भी तेज़ गति से चल रहा है। कई महत्वपूर्ण हिस्सों—जैसे इंदौर से तिही, तिही से पीथमपुर, पीथमपुर से सगौर, और सगौर से आगे धार की दिशा में पड़ने वाले सेक्शन—में ट्रैक बिछाने का काम लगभग पूरा माना जा रहा है। स्टेशन भवनों का निर्माण भी 80 से 90 प्रतिशत तक पूरा बताया जा रहा है।
रेलवे इंजीनियरिंग टीम के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के विकास के लिए बेहद अहम है। इंदौर–धार के बीच पहली बार रेल कनेक्टिविटी बनने से लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अभी तक धार के लोगों को रेल यात्रा के लिए इंदौर या रतलाम तक सड़क मार्ग से आना पड़ता था, लेकिन यह लाइन शुरू होने के बाद उनकी यात्रा का समय और खर्च काफी कम हो जाएगा।
इंदौर से दाहोद के बीच यह कॉरिडोर माल परिवहन के लिहाज से भी एक बड़े बदलाव का कारण बनेगा। खेती-किसानी वाले क्षेत्र होने के कारण यहां से अनाज, सब्जियाँ और अन्य कृषि उत्पाद अब सीधे रेल के माध्यम से बड़े शहरों और मंडियों तक पहुँच सकेंगे। इससे व्यापारियों और किसानों को नई संभावनाएँ मिलेंगी।
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि रेलवे फरवरी 2026 में CRS (Commissioner of Railway Safety) द्वारा निरीक्षण करवाने की तैयारी कर रहा है। CRS निरीक्षण किसी भी नई रेल लाइन पर यात्री ट्रेन शुरू करने से पहले अनिवार्य होता है। यदि यह निरीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो अनुमान है कि इंदौर से धार तक ट्रेन सेवा 2026 की शुरुआत में ही शुरू हो सकती है।
रेलवे की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तेजी से काम हो रहा है, उससे उम्मीद है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर ट्रायल रन, लोड टेस्टिंग और सुरक्षा परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे। रेल लाइन के कई सेक्शन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन के काम भी चल रहे हैं, जिससे भविष्य में इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
धार जिले के लोगों में भी काफी उत्साह है, क्योंकि जिला मुख्यालय होने के बावजूद यहाँ अब तक कोई रेलवे स्टेशन नहीं था। पहली बार धार को रेल मानचित्र पर शामिल किया जा रहा है, जो ऐतिहासिक उपलब्धि कही जा रही है।
इंदौर–धार–दाहोद रेल लाइन के पूरी तरह शुरू हो जाने के बाद यह रूट पश्चिमी रेलवे के नेटवर्क में मजबूती से जुड़ जाएगा। इससे यात्रियों को गुजरात, राजस्थान और दिल्ली की दिशा में अधिक विकल्प मिलेंगे। साथ ही व्यवसायिक और सांस्कृतिक सहयोग भी बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि मालवा–निमाड़ क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने वाला विकास मॉडल साबित होगा।
📌 निष्कर्ष
इंदौर–दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट अब आखिरी चरण में है और फरवरी 2026 में CRS निरीक्षण के बाद इंदौर–धार के बीच ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने की पूरी उम्मीद है। इससे धार को पहली बार रेल सुविधा मिलेगी, उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी और यात्रियों के लिए एक नया, तेज़ और सुरक्षित विकल्प जुड़ जाएगा। यह प्रोजेक्ट पूरे क्षेत्र के लिए विकास का नया अध्याय लिखने वाला है।

