Quick Highlights
- बुजुर्गों के भरण-पोषण संबंधी मामलों के लिए विशेष सुनवाई का निर्णय
- इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने दिए निर्देश
- अनुविभागीय अधिकारी लगाएंगे शिविर
- वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित राहत और न्याय दिलाने पर जोर
इंदौर में नई पहल: बुजुर्गों को मिलेगा सीधा न्याय
इंदौर प्रशासन ने एक अहम कदम उठाते हुए बुजुर्गों से जुड़े भरण-पोषण मामलों में विशेष सुनवाई की व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। अक्सर देखा गया है कि वृद्धजन अपने ही परिवार के भीतर उपेक्षा और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई मामलों में बच्चों द्वारा माता-पिता को उचित देखभाल या आर्थिक सहयोग नहीं दिया जाता, जिसकी वजह से वे मजबूर होकर प्रशासन और न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि अब ऐसे मामलों को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा।
Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act का महत्व
2007 में लागू हुए Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act के तहत यह प्रावधान किया गया है कि बच्चों और परिजनों की जिम्मेदारी है कि वे अपने बुजुर्गों का भरण-पोषण करें। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो माता-पिता को अधिकार है कि वे प्रशासन के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।
हालाँकि, अब तक इन मामलों को सामान्य जनसुनवाई में शामिल किया जाता था, जिसके कारण निर्णय आने में देरी होती थी। लेकिन इंदौर प्रशासन ने इस प्रक्रिया को आसान और तेज़ बनाने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है।
कलेक्टर कार्यालय में होगी विशेष सुनवाई
कलेक्टर कार्यालय ने यह व्यवस्था सुनिश्चित की है कि बुजुर्गों के मामले सामान्य शिकायतों से अलग रखे जाएँगे। इसके लिए विशेष शिविर और सुनवाई सत्र आयोजित किए जाएँगे। कलेक्टर शिवम वर्मा का मानना है कि इन संवेदनशील मुद्दों पर तुरंत और मानवीय दृष्टिकोण से निर्णय लिया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा है कि अनुविभागीय अधिकारी (SDM) अब अपने-अपने क्षेत्रों में शिविर लगाएंगे। इन शिविरों में वरिष्ठ नागरिक सीधे अपनी शिकायत रख पाएँगे और तुरंत सुनवाई भी होगी।
प्रशासन का लक्ष्य: बुजुर्गों को न्याय और सम्मान
प्रशासन का कहना है कि इस कदम से बुजुर्गों की समस्याओं का समाधान आसान होगा। कई बार वृद्धजन अपनी बात अदालत तक नहीं पहुँचा पाते, लेकिन जिला स्तर पर ही उनकी सुनवाई हो जाए तो उन्हें बड़ी राहत मिल सकती है।
यह कदम न केवल बुजुर्गों के लिए न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि समाज को भी यह संदेश देगा कि प्रशासन वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर है।
क्यों ज़रूरी थी यह पहल?
भारत जैसे देश में जहाँ परिवार परंपरागत रूप से बुजुर्गों की देखभाल करते रहे हैं, वहाँ हाल के वर्षों में बदलाव आया है। आधुनिक जीवनशैली, रोजगार के दबाव और सामाजिक संरचना में बदलाव के कारण कई बार बुजुर्गों की उपेक्षा होने लगी है।
इंदौर में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ माता-पिता को आर्थिक सहायता नहीं दी गई या उन्हें अकेला छोड़ दिया गया। इन हालात में प्रशासन की यह पहल न केवल व्यावहारिक है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी बेहद सराहनीय है।
समाज में संदेश
कलेक्टर की यह पहल केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है। यह सभी को यह याद दिलाती है कि बुजुर्गों का सम्मान और भरण-पोषण केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है।
इंदौर जैसे शहर में यह कदम उदाहरण बनेगा और अन्य जिलों को भी प्रेरित करेगा कि वे अपने स्तर पर ऐसे उपाय करें।
निष्कर्ष
इंदौर प्रशासन का यह कदम न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है बल्कि सामाजिक सरोकारों को मजबूती देने वाली पहल है। कलेक्टर कार्यालय में विशेष सुनवाई से बुजुर्गों को न केवल त्वरित न्याय मिलेगा बल्कि उन्हें यह भरोसा भी रहेगा कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
भविष्य में यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह पूरे प्रदेश और देश के लिए मिसाल बन सकता है। बुजुर्गों का सम्मान और उनकी देखभाल समाज की असली पहचान है, और इंदौर ने इस दिशा में एक अहम शुरुआत की है।

