📰 Quick Highlights
- इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चार इंजीनियरिंग छात्रों को फर्जी करेंसी नोट खरीदने/पैदा करने के आरोप में गिरफ्तार किया।
- उनके पास से ₹2 लाख रुपये के लगभग 400 नकली ₹500 नोट बरामद किए गए।
- आरोपियों ने कहा कि उन्होंने Instagram की एक रील देखकर जाली नोट का ऑर्डर दिया था।
- गिरफ़्तार नौजवानों में ऋषिकेश तोंडे, वंश कैथवास, रितेश नागर, अंकुश यादव शामिल हैं — सभी के पास इंजीनियरिंग डिप्लोमा और जॉब है।
🧠 360 विश्लेषण
इंदौर (Madhya Pradesh) में क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार की रात एक चौंकाने वाला मामला उजागर किया, जिसमें चार इंजीनियरिंग छात्रों को नकली नोटों की खरीद-फरोख्त में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर एक रील देखकर नकली नोट की खरीदी का निर्णय लिया था। उन्होंने सप्लायर से ₹5,000 असली देकर ₹20,000 नकली नोट की डील की। उस डील के आधार पर नोटों का “एक्सचेंज” तय किया गया, लेकिन कथित सप्लायर ने उन्हें सुपर्कोरिडोर इलाके में नोट रखने के लिए बुलाया और गायब हो गया। जांच के दौरान इस सप्लायर का कुछ पता नहीं चल सका है।
क्राइम ब्रांच ने जब सदर बाजार थाना क्षेत्र के पास गुटकेश्वर महादेव मंदिर के समीप आरोपियों की तलाशी ली, तो लगभग 400 नकली ₹500 रुपये के नोट (करीब ₹2 लाख) बरामद किए। यह एक बड़ा क्वांटिटी है जो आसानी से बाजार में नकद लेन-देन के ज़रिये फैलाया जा सकता था।
एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया ने बताया कि चारों आरोपियों ने इंजीनियरिंग डिप्लोमा पूरा करने के बाद प्राइवेट जॉब भी कर रहे थे। पूछताछ में उन्होंने कहा कि वे इंस्टाग्राम रील देखने के प्रभाव में नकली नोट खरीदने के निर्णय तक पहुंचे। यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट और लालच किस तरह से युवा वर्ग को अवैध गतिविधियों की ओर ले जा सकता है।
पुलिस अब इस सप्लायर की पहचान और नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है, ताकि यह पता लग सके कि कहीं नकली नोटों का बड़ा रैकेट तो नहीं काम कर रहा है। इस मामले से पहले भी इंदौर में नकली करेंसी और फ़र्जी नोट के अन्य मामलों का खुलासा हो चुका है, जिससे पता चलता है कि नकली नोट की व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं।
क्या यह सिर्फ इंस्टाग्राम के तनाव में लिए गए फैसले का परिणाम है, या कहीं और बड़े गिरोह का हिस्सा? यह सब पुलिस की आगे की जांच में सामने आएगा। फिलहाल चारों का पूछताछ जारी है और कोर्ट में आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
📌 निष्कर्ष
इंदौर में इंस्टाग्राम रील देखने के बाद नकली करेंसी खरीदने का फ़ैसला चार इंजीनियरिंग छात्रों को जेल तक ले आया। यह घटना सोशल मीडिया की प्रेरणा से कानूनी अपराध तक पहुँचने की जोखिमपूर्ण दिशा को दर्शाती है। पुलिस ने नकली नोट और आरोपियों को पकड़ लिया है, लेकिन सप्लायर और इसके पीछे नेटवर्क का पता चलना अभी बाकी है। ऐसे मामलों पर पुलिस की सतर्कता और सोशल मीडिया जागरूकता दोनों की ज़रूरत है।

