Quick Highlights
- खातीपुरा क्षेत्र में गजक व कुल्फी बनाने वाली फैक्ट्री पर खाद्य विभाग का छापा
- फैक्ट्री में गंदगी और अस्वच्छ माहौल पाया गया
- संचालक के पास लाइसेंस नहीं मिला, पूरी फैक्ट्री तुरंत सील
- गजक, मूंगफली, तिल और अन्य सामग्रियों के नमूने जांच के लिए भेजे गए
- इसी दौरान अन्य दुकानों से भी खाद्य सामग्री के नमूने लिए गए
360 विश्लेषण
इंदौर शहर में सर्दियों के साथ गजक और तिल उत्पादों की डिमांड बढ़ जाती है, लेकिन इसी सीजन में मिलावट और अस्वच्छ उत्पादन पर प्रशासन की नजर भी ज्यादा टिकी रहती है। इसी क्रम में खातीपुरा इलाके में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक गजक और कुल्फी बनाने वाली फैक्ट्री पर कार्रवाई की, जो पहली नजर में ही नियमों से उलट चल रही थी। टीम ने परिसर में कदम रखते ही पाया कि उत्पादन स्थल पर साफ-सफाई का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा गया था। खुले में पड़े गुड़, तिल और मूंगफली के ढेर न सिर्फ धूल से भरे थे बल्कि उनके पास मच्छर और कीड़े-मकोड़े भी मंडरा रहे थे, जो सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर डाल सकते थे।
फैक्ट्री संचालक सुमित शिवहरे से जब लाइसेंस और जरूरी दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई वैध कागज प्रस्तुत नहीं कर सके। खाद्य व्यवसाय में लाइसेंस सबसे बुनियादी आवश्यकता होती है, और इसके बिना उत्पादन पूरी तरह अवैध माना जाता है। लिहाजा टीम ने मौके पर ही पूरी यूनिट को सील कर दिया। विभाग ने गजक, गुड़, तिल, मूंगफली और तैयार कुल्फी के नमूने लिए, जिन्हें आगे लैब टेस्ट के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी कि कहीं मिलावट या खतरनाक तत्वों का उपयोग तो नहीं किया गया था।
इसी अभियान के दौरान टीम ने क्षेत्र की अन्य दुकानों और भंडारण स्थलों पर भी निरीक्षण किया। जहां राजगीरा लड्डू, तिल लड्डू, पनीर, चावल और मैदा के नमूने भी जांच के लिए उठाए गए। त्योहार और सर्दियों के मौसम में मिठाइयों की खपत तेजी से बढ़ती है और इसी अवसर का फायदा उठाकर कई असंगठित प्रतिष्ठान घटिया और अस्वच्छ उत्पाद बाजार में उतार देते हैं। यही वजह है कि विभाग इस अवधि में विशेष सतर्कता बरतता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने साफ कहा कि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इंदौर, जो स्वच्छता का ब्रांड बन चुका है, वहां खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर शहरवासी भी ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में गंदगी में बनने वाली गजक या बिना लाइसेंस के चल रही इकाइयों पर कार्रवाई शहर की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष
खातीपुरा की गजक फैक्ट्री पर की गई यह कार्रवाई साफ संदेश है कि खाद्य उत्पादन में लापरवाही और बिना लाइसेंस कारोबार नहीं चलेगा। विभाग की सतर्कता और उपभोक्ता जागरूकता—दोनों मिलकर ही शहर में सुरक्षित खाद्य संस्कृति बना सकते हैं।

