🚧 Quick Highlights:

  • इंदौर मेट्रो ( Indore metro ) का अंडरग्राउंड रूट अब बढ़कर 12 किलोमीटर किया गया।
  • पहले यह रूट करीब 8.7 किलोमीटर का था।
  • लागत में लगभग ₹1,000 करोड़ की बढ़ोतरी होगी।
  • नया डिजाइन तैयार, सरकार ने दी मंजूरी।
  • खजराना से लेकर बड़ा गणपति तक पूरा हिस्सा रहेगा भूमिगत।
  • प्रोजेक्ट में देरी की संभावना, फिर भी लक्ष्य 2026 तक पूरा करने का।

🏗️ पूरी खबर विस्तार से:

नगरसेवा बस से शुरू हुई इंदौर के पब्लिक टांसपोर्ट की विकास यात्रा को इंदौर मेट्रो के रूप में एक नया आयाम मिला है

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव किया गया है। अब शहर का लगभग 12 किलोमीटर लंबा हिस्सा अंडरग्राउंड (भूमिगत) बनाया जाएगा। पहले योजना में यह दूरी सिर्फ 8.7 किलोमीटर तय की गई थी, लेकिन रूट में तकनीकी और शहरी विकास के कारण संशोधन किया गया है।

इंदौर मेट्रो का यह नया अंडरग्राउंड रूट खजराना से लेकर बड़ा गणपति तक फैलेगा। इस बदलाव के चलते परियोजना की लागत में करीब ₹1,000 करोड़ की बढ़ोतरी हो जाएगी। पहले कुल लागत लगभग ₹7,500 करोड़ थी, जो अब बढ़कर ₹8,500 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी।


🔍 क्यों लिया गया अंडरग्राउंड का फैसला?

अधिकारियों के अनुसार, इंदौर जैसे घनी आबादी वाले शहर में मेट्रो लाइन को जमीन के ऊपर ले जाना कई जगहों पर मुश्किल था।

  • खजराना चौराहा, पलासिया, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, और बड़ा गणपति जैसे पॉइंट्स पर पहले से भारी ट्रैफिक है।
  • इन इलाकों में फ्लाईओवर, बिजली लाइनें और पुराने भवनों के कारण एलीवेटेड (ऊपरी) रूट बनाना मुश्किल हो रहा था।
  • इसलिए, इस हिस्से को अंडरग्राउंड करने का निर्णय लिया गया ताकि निर्माण के दौरान शहर के यातायात पर कम असर पड़े।

💰 लागत क्यों बढ़ी?

भूमिगत मेट्रो निर्माण में लागत स्वाभाविक रूप से अधिक होती है।

  • टनल बोरिंग मशीन (TBM), सेफ्टी सिस्टम, वेंटिलेशन, और वॉटरप्रूफ स्ट्रक्चर के कारण खर्च कई गुना बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा, नई भूमि सर्वे और डिजाइन संशोधन में भी करोड़ों रुपये का खर्च आना तय है।
    मंत्रालय ने अतिरिक्त राशि के लिए बजट स्वीकृति का प्रस्ताव भेजा है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि, “लागत बढ़ना चिंता का विषय नहीं है, लेकिन काम की गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”

🚉 अब तक की प्रगति

  • सुपर कॉरिडोर और एलीवेटेड हिस्सों का काम लगभग 80% पूरा हो चुका है।
  • ट्रायल रन मई 2024 में किया गया था और सब कुछ तकनीकी रूप से सफल रहा।
  • अब नया अंडरग्राउंड खंड मंजूर होने के बाद डिजाइन और सर्वे का नया चरण शुरू होगा।
  • इस बदलाव के कारण पूरे प्रोजेक्ट की समयसीमा कुछ महीने आगे बढ़ सकती है, लेकिन लक्ष्य अब भी 2026 तक पूरा करने का रखा गया है।

🌆 शहर पर प्रभाव

इस बदलाव से इंदौर की मेट्रो यात्रा और भी सुविधाजनक होगी।

  • अंडरग्राउंड रूट के कारण शहर का दृश्य बदले बिना यात्रियों को तेज और सुरक्षित यात्रा मिलेगी।
  • ट्रैफिक जाम, शोर और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
  • हालांकि निर्माण के दौरान कुछ महीनों तक मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा।

🗣️ विशेषज्ञों की राय

शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर जैसे शहर में अंडरग्राउंड रूट भविष्य के लिए सबसे उपयुक्त है।
“यह एक दीर्घकालिक निवेश है। भले ही लागत अधिक लगे, लेकिन इससे शहर की रफ्तार और यातायात नियंत्रण दोनों में सुधार होगा,” विशेषज्ञों ने कहा।


⚠️ निष्कर्ष:

इंदौर मेट्रो अब और भी आधुनिक रूप ले रही है। 12 किलोमीटर का अंडरग्राउंड रूट शहर के ट्रैफिक को नई दिशा देगा। हालांकि ₹1,000 करोड़ की लागत वृद्धि आम नागरिकों को सुनकर भारी लग सकती है, पर लंबे समय में यह फैसला शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को अगले स्तर पर ले जाएगा।
सरल शब्दों में — मेट्रो नीचे जाएगी, पर इंदौर का नाम ऊपर जाएगा! 🚇💪

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