indore SIR

🔎 सारांश (Highlights)

  • 28,67,294 मतदाताओं के फार्म भरे गए, लेकिन 1,94,208 मतदाताओं का 2003 की मतदाता सूची में कोई मैपिंग रिकॉर्ड नहीं मिला।
  • अब उन मतदाताओं को Assistant Returning Officer (एआरओ) द्वारा नोटिस भेजा जाएगा — और तय 12 प्रकार के दस्तावेजों में से कम-से-कम एक जमा करना होगा।
  • अगर दस्तावेज सही पाए गए, तभी उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।

📰 विस्तृत खबर

इंदौर — जिले में चल रहे मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के पुराने डेटा गायब पाए गए हैं। कुल 28,67,294 फ़ार्म भरे गए, लेकिन उनमें से 1,94,208 मतदाताओं का 2003 की मतदाता सूची से कोई मिलान नहीं हुआ। यह जानकारी आज सामने आई।

निर्वाचन कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि उन मतदाताओं ने संभवतः 2003 में पहचान-संबंधी आवश्यक जानकारी दिए बिना ही आवेदन किया था, जिसकी वजह से उनका रिकॉर्ड 2003 की मूल सूची में नहीं जुड़ा था। इस कारण अब उनके नामों की पुष्टि नहीं हो पाई।

अब व्यवस्था यह है कि इन 1.94 लाख मतदाताओं को एआरओ नोटिस भेजेंगे। नोटिस मिलने पर उन्हें तय 12 प्रकार के दस्तावेज़ों में से किसी एक को जमा करना होगा — पहचान पत्र, निवास प्रमाण आदि। जमा किए जाने के बाद एआरओ उनका वेरिफ़िकेशन करेगा, और उसके बाद फैसला होगा कि उन्हें मतदाता सूची में रखा जाए या नहीं।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, उन मतदाताओं के अलावा जिनका सत्यापन हो चुका है — उनकी संख्या 23,05,881 है। लेकिन लगभग 5,61,447 मतदाताओं का सत्यापन अभी नहीं हुआ, जिनमें बहु-कारण शामिल हैं: 2,70,264 मतदाता घर पर नहीं मिले, 2,04,250 स्थायी रूप से कहीं और गए, 41,595 मतदाता मृत पाए गए और 26,000 से अधिक लोगों ने फ़ार्म भरा लेकिन उसे जमा नहीं किया।

अगले चरण में 11 दिसंबर तक पुनः सत्यापन, उसके बाद 16 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी। यदि कोई मतदाता इसमें आपत्ति करता है, तो 15 जनवरी तक दावे या आपत्तियाँ दर्ज कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।

इन कदमों का मकसद 22 साल बाद हो रहे SIR में मतदाता सूची को साफ़ — सटीक और अपडेटेड बनाना है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि 2003 की मूल सूची ही इस पुनरीक्षण का आधार मानी गई है। जिन लोगों का 2003 में नाम नहीं था या पहचान अधूरी थी — उन्हें नए दस्तावेजों के आधार पर शामिल किया जाएगा।

यदि दस्तावेज जमा नहीं हुए या वेरिफ़िकेशन नहीं हुआ — तो ऐसे मतदाताओं का नाम कट सकता है। इस प्रक्रिया से चुनावी सूची में त्रुटियों और दोहराव (डुप्लीकेट) नामों को हटाने में मदद मिलेगी। साथ ही, 18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवाओं को भी सही ढंग से सूचीबद्ध किया जाएगा।


✅ निष्कर्ष

इस पुनरीक्षण (SIR) का मकसद मतदाता सूची को पूरी तरह वैध और अपडेटेड बनाना है — जिससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे। अगर आप या आपके परिचितों में से कोई 2003 की सूची में नाम नहीं मिल रहा — और आपने 2003-05 के आसपास अपना वोटर फॉर्म भरा था — तो देर न करें। एआरओ नोटिस आने पर समय से दस्तावेज़ जमा करें, ताकि आपका नाम सूची से न कटे।

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