🌿 Quick Highlights:
- महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट के लिए 1.24 लाख पेड़ काटने की योजना
- इंदौर से मुंबई की दूरी घटेगी, कनेक्टिविटी होगी मजबूत
- पर्यावरणविदों ने जंगल कटाई पर जताई चिंता
- वन विभाग ने पौधारोपण और पर्यावरण संतुलन की योजना तैयार की
- परियोजना के 2027-28 तक पूरा होने की उम्मीद
विस्तृत जानकारी:
मध्यप्रदेश में विकास की तेज रफ्तार के बीच एक बार फिर पर्यावरण बनाम इन्फ्रास्ट्रक्चर की बहस छिड़ गई है। इंदौर और खंडवा के बीच चल रहे महू-खंडवा आमान परिवर्तन प्रोजेक्ट (Mhow-Khandwa Gauge Conversion Project) के तहत बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना के दौरान करीब 1.24 लाख पेड़ों की बलि दी जा सकती है ताकि रेल लाइन को चौड़ा किया जा सके।
इस प्रोजेक्ट के तहत ब्रिटिश काल की पुरानी छोटी गेज रेल लाइन को बड़ी गेज (Broad Gauge) में बदला जा रहा है। इससे इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी कम होगी और पश्चिमी मध्यप्रदेश का दक्षिण भारत से रेल संपर्क भी पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
वन विभाग की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया
इंदौर के डीएफओ (वन मंडलाधिकारी) प्रदीप मिश्रा के अनुसार, परियोजना का सबसे कठिन हिस्सा महू से सनावद के बीच का खंड है जो घने जंगलों से होकर गुजरता है। यहां लगभग 1.41 लाख पेड़ प्रभावित होंगे, जिनमें से 1.24 लाख पेड़ काटने की अनिवार्यता मानी जा रही है।
हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि पहाड़ी इलाकों में रेल टनल (सुरंग) बनने से कई पेड़ बचे रहेंगे। वन विभाग को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी (In-Principle Approval) मिल चुकी है, और औपचारिक स्वीकृति जल्द जारी होने की उम्मीद है।
वन विभाग ने पर्यावरणीय असर को कम करने के लिए विस्तृत “मिटिगेशन प्लान” तैयार किया है। इसके तहत प्रभावित जंगलों के बदले में दोगुने क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा। इंदौर में सीमित भूमि उपलब्ध होने के कारण, धार और झाबुआ जिलों में 916 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 9.16 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
प्रभावित वन क्षेत्र और पर्यावरणीय चिंताएं
महू-सनावद खंड के कारण इंदौर जिले का 404 हेक्टेयर और खरगोन जिले का 46 हेक्टेयर जंगल क्षेत्र प्रभावित होगा।
पर्यावरणविदों का कहना है कि इस स्तर की पेड़ कटाई से इंदौर की जलवायु पर सीधा असर पड़ सकता है।
पर्यावरणविद शंकरलाल गर्ग ने चेताया कि,
“चोरल और महू के जंगल इंदौर की हवा को ठंडक देते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई से शहर की बारिश और तापमान दोनों प्रभावित होंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि जंगलों का क्षेत्रफल घटने से वन्यजीव और मानव के बीच टकराव (Human-Wildlife Conflict) बढ़ सकता है।
परियोजना का उद्देश्य और संभावित लाभ
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट राज्य के आर्थिक ढांचे के लिए बेहद अहम है।
नई 156 किलोमीटर लंबी ब्रॉड गेज लाइन बिछाई जाएगी, जो पुरानी 118 किलोमीटर लंबी नैरो गेज लाइन की जगह लेगी।
यह प्रोजेक्ट 2027-28 तक पूरा होने की संभावना है। इसके बाद इंदौर से मुंबई की यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि माल परिवहन भी आसान हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष:
इंदौर-मुंबई रेल मार्ग परियोजना निश्चित रूप से विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसकी कीमत 1.24 लाख पेड़ों की बलि के रूप में बहुत भारी है। सवाल यही है कि क्या इस विकास की दौड़ में प्रकृति की सांसें थम जाएंगी, या फिर वन विभाग के पुनर्वनीकरण के प्रयास इस नुकसान की भरपाई कर पाएंगे?

