इंदौर: अवैध गैस कारोबार पर चला प्रशासन का डंडा

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में अवैध गैस भंडारण और रिफिलिंग का धंधा लंबे समय से पनप रहा था। घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों का गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह आम जनता की जान के लिए भी खतरा बन सकता है। हाल ही में खाद्य विभाग ने इस पर सख्त कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर छापामारी की और बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर जब्त किए।


3 दिन की मुहिम में 156 सिलेंडर जब्त

खाद्य विभाग की टीमों ने इंदौर शहर के विभिन्न इलाकों में लगातार तीन दिन तक अभियान चलाया। इस दौरान अलग-अलग होटलों, रेस्तरां और अवैध गोदामों से कुल 156 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए।

  • कार्रवाई में 16 होटल और रेस्तरां शामिल थे जहाँ घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था।
  • इसके अलावा, एक गोदाम और दो गैर-कानूनी रिफिलिंग सेंटरों से भी सिलेंडर बरामद हुए।
  • टीम ने मौके पर मौजूद उपकरण, पाइप और मोटर भी जब्त किए जिनका इस्तेमाल सिलेंडरों की रिफिलिंग में किया जाता था।

चंदन नगर से जब्त हुए 16 सिलेंडर

इसी मुहिम का हिस्सा बनते हुए चंदन नगर इलाके में खाद्य विभाग को सफलता मिली। यहां एक मकान के अंदर अवैध रिफिलिंग सेंटर चलाया जा रहा था। जब टीम ने छापा मारा तो 16 सिलेंडर (11 घरेलू और 5 वाणिज्यिक) पाए गए। वहीं एक रिफिलिंग मशीन भी मिली जिसका उपयोग गैस भरने के लिए किया जा रहा था। टीम ने तुरंत सभी सिलेंडर और मशीन जब्त कर ली।


रविंद्र नगर में रिफिलिंग यूनिट बस्ट

रविंद्र नगर क्षेत्र में भी विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी। यहां एक मकान से अवैध गैस रिफिलिंग का काम हो रहा था। छापे के दौरान टीम ने 14 सिलेंडर, गैस पाइप, इलेक्ट्रिक मोटर और तौलने का तराजू जब्त किया। पूरे इलाके से कुल 42 सिलेंडर जब्त हुए। अधिकारियों ने साफ कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल कानूनन अपराध हैं बल्कि किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।


अवैध धंधे की कीमत – धमाका और घायल

अवैध गैस कारोबार की खतरनाक सच्चाई तब और सामने आई जब अजाद नगर कोतवाली क्षेत्र में अवैध रिफिलिंग सेंटर पर जोरदार धमाका हो गया। गैस भरते समय सिलेंडर फट गया और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। मौके पर पहुंची पुलिस और खाद्य विभाग की टीम ने सिलेंडर जब्त किए और सेंटर के मालिक की तलाश शुरू की। इस घटना ने साफ कर दिया कि यह धंधा कितनी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे सकता है।


खाद्य विभाग का सख्त रुख

खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग और अवैध रिफिलिंग केंद्र पूरी तरह कानून के खिलाफ हैं। यह सिलेंडर सब्सिडी दर पर आम जनता को उनकी घरेलू जरूरतों के लिए दिए जाते हैं, लेकिन जब इन्हें गैर-कानूनी तरीके से रेस्तरां या होटलों में इस्तेमाल किया जाता है, तो सरकार को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ जनता की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा होता है।


जनता की प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई को लेकर आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि आए दिन शहर के अंदर अवैध रिफिलिंग यूनिट्स और गैस का धंधा फल-फूल रहा था। कई बार मोहल्लों में गैस की गंध आने लगती थी जिससे लोगों में डर का माहौल रहता था। विभाग की इस कार्रवाई से अब उम्मीद जगी है कि ऐसे खतरनाक कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी।


प्रशासन के सामने चुनौतियाँ

हालांकि कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर इतने लंबे समय से ये अवैध सेंटर चल कैसे रहे थे। छोटे-छोटे मोहल्लों में सिलेंडर भरे जा रहे थे और किसी को भनक तक नहीं लगी। जानकारों का कहना है कि यह धंधा अक्सर नेटवर्क के सहारे चलता है और कई बार इसमें स्थानीय स्तर पर मिलीभगत भी शामिल होती है। ऐसे में खाद्य विभाग और पुलिस दोनों को मिलकर लंबी रणनीति बनानी होगी।


निष्कर्ष

इंदौर में हुई ताजा कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासन अब अवैध गैस काaरोबार के खिलाफ सख्त है। 156 से ज्यादा सिलेंडर जब्त होना, रिफिलिंग मशीनें और उपकरण बरामद होना, यह सब इस बात का प्रमाण है कि शहर में यह धंधा कितना बड़ा रूप ले चुका था। अब जरूरत है कि विभाग लगातार निगरानी रखे और ऐसे कारोबार को जड़ से खत्म करे, ताकि भविष्य में किसी हादसे की संभावना ही न रहे।

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