ozone therapy

इंदौर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए इंदौर से एक नई राहत भरी खबर आई है। शहर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज और अस्पताल में ओजोन थेरेपी की शुरुआत की गई है। कैंसर मरीजों को नई उम्मीद : खास बात यह है कि यहां मरीजों को यह उपचार पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के इस संयुक्त प्रयोग से कैंसर रोगियों को न केवल शारीरिक राहत मिलने की संभावना है बल्कि मानसिक हौसला भी मिल रहा है।


क्या है ओजोन थेरेपी?

ओजोन थेरेपी को चिकित्सा जगत में एक वैकल्पिक उपचार पद्धति माना जाता है। इसमें विशेष तकनीक से शुद्ध ऑक्सीजन और ओजोन गैस का मिश्रण शरीर में पहुंचाया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधि शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाती है, जिससे कोशिकाओं को बेहतर ऊर्जा मिलती है और रोग से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है। कैंसर जैसी बीमारियों में, जहां शरीर की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं, यह थेरेपी अतिरिक्त मददगार साबित हो सकती है।


इंदौर में क्यों शुरू हुई पहल?

अष्टांग कॉलेज के शल्य तंत्र विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि कई मरीज ऐसे हैं जिनके पास महंगे इलाज का खर्च उठाने की क्षमता नहीं होती। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसे उपचार बेहद महंगे हैं और इनके दुष्प्रभाव भी गंभीर होते हैं। ऐसे में आयुर्वेद आधारित ओजोन थेरेपी को एक विकल्प के रूप में सामने लाने का प्रयास किया गया है।

कॉलेज प्रशासन के अनुसार, “हम चाहते हैं कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भी कैंसर से लड़ने का एक और अवसर मिले। अगर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा सही हो तो रोगी का प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है और कई बार यह बीमारी की गति को धीमा कर देता है।”


मरीजों को क्या मिल रहा लाभ?

शुरुआती रिपोर्ट बताती हैं कि जिन मरीजों ने यह उपचार लिया है, उन्हें थकान कम होने, नींद बेहतर आने और भूख में सुधार जैसे सकारात्मक असर देखने को मिले हैं। अस्पताल के चिकित्सकों का दावा है कि एक हफ्ते की थेरेपी के बाद भी रोगियों के चेहरे पर चमक और ऊर्जा दिखाई देने लगती है।

हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि ओजोन थेरेपी कैंसर का स्थायी इलाज है। मगर इतना तय है कि यह मरीजों को जीवन जीने की क्वालिटी (Quality of Life) सुधारने में मदद कर रही है।


वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है?

दुनियाभर में ओजोन थेरेपी पर लगातार शोध हो रहे हैं। कुछ अध्ययन बताते हैं कि यह ट्यूमर के आसपास की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की पहुंच बढ़ाती है, जिससे कैंसर सेल्स का विकास धीमा हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप के कई मेडिकल संगठन इसे प्रायोगिक (Experimental) ही मानते हैं। अमेरिकी FDA (Food and Drug Administration) ने इसे कैंसर उपचार के रूप में मान्यता नहीं दी है।

यानी साफ है कि ओजोन थेरेपी को अभी पूरक उपचार ही माना जा सकता है। इसे अकेले कैंसर का समाधान कहना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं होगा।


मरीजों और परिवारों की प्रतिक्रिया

अस्पताल में इलाज ले रहे एक मरीज के परिजन ने बताया, “कीमोथेरेपी ने हमारे घर की आर्थिक स्थिति डगमगा दी थी। डॉक्टरों ने जब बताया कि यहां मुफ्त में ओजोन थेरेपी मिलेगी तो हमें उम्मीद की एक नई किरण दिखी।”

दूसरे मरीज का कहना है कि, “पहले शरीर बहुत थका हुआ रहता था। अब धीरे-धीरे ताकत लौटने लगी है। भले ही यह पूरी बीमारी को खत्म न करे, लेकिन जीवन आसान जरूर बना रहा है।”


मुफ्त इलाज की खासियत

इंदौर का यह सरकारी कॉलेज प्रदेश का पहला ऐसा आयुर्वेदिक संस्थान बन गया है जहां कैंसर रोगियों को मुफ्त में ओजोन थेरेपी दी जा रही है। इसका उद्देश्य है कि मरीजों को आर्थिक बोझ से राहत मिले और उन्हें स्वास्थ्य सुधार का मौका भी मिले।


सावधानी जरूरी

विशेषज्ञ मानते हैं कि मरीजों को इस थेरेपी को अपनाते समय सावधानी रखनी चाहिए। चूंकि यह अब भी शोध के दौर से गुजर रही है, इसलिए इसे केवल डॉक्टर की निगरानी में ही अपनाना चाहिए। स्वयं-उपचार या अप्रमाणित केंद्रों पर कराए गए प्रयोग गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।


निष्कर्ष

इंदौर के सरकारी अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में ओजोन थेरेपी की शुरुआत निश्चित रूप से कैंसर मरीजों के लिए राहत की खबर है। यह न केवल चिकित्सा की एक नई दिशा की ओर संकेत करती है, बल्कि गरीब मरीजों के लिए उम्मीद की किरण भी जगाती है। हालांकि, इसे पूर्ण इलाज के रूप में प्रचारित करना फिलहाल जल्दबाजी होगी। बेहतर यही होगा कि इसे पारंपरिक चिकित्सा के साथ एक सहायक उपचार के रूप में देखा जाए।

अगर आने वाले वर्षों में इस पर और गहन शोध हुए और सकारात्मक परिणाम सामने आए, तो संभव है कि ओजोन थेरेपी कैंसर उपचार के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाए। फिलहाल, इंदौर की यह पहल मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत और उम्मीद दोनों लेकर आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *