मुख्य बिंदु (Quick Highlights)
- आरटीओ में स्टिंग के दौरान पत्रकार और कैमरामैन से मारपीट
- कैमरा तोड़ा, मोबाइल, चेन और घड़ी तक छीन ली
- करीब 20 लोगों ने मिलकर किया हमला
- पत्रकारों ने इंदौर प्रेस क्लब की अगुवाई में किया विरोध प्रदर्शन
- प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर से मुलाकात कर कड़ी कार्रवाई की मांग की
घटना का पूरा विवरण
इंदौर के आरटीओ कार्यालय में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान सक्रिय दलालों ने पत्रकार हेमंत शर्मा और कैमरामैन राजा खान पर अचानक हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि लगभग 20 लोगों के समूह ने पत्रकारों को घेरकर जमकर मारपीट की, कैमरा तोड़ दिया और रिकॉर्डिंग उपकरण नष्ट कर दिए।
हमला केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं रहा। दलालों ने पत्रकार हेमंत शर्मा का मोबाइल फोन, चेन और स्मार्ट वॉच तक छीन ली। दोनों पत्रकारों को गंभीर चोटें आईं, जिनमें हेमंत की हालत ज्यादा चिंताजनक बताई गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पूरी घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि सरकारी परिसरों में दलाल किस तरह फल-फूल रहे हैं और उनके हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि वे खुली गुंडागर्दी करने से भी नहीं डरते।
पत्रकारों का विरोध, प्रेस क्लब का नेतृत्व
घटना के विरोध में शुक्रवार को इंदौर प्रेस क्लब के नेतृत्व में शहर के पत्रकार बड़ी संख्या में एकत्र हुए। सभी ने एक स्वर में इस जघन्य हमले की निंदा की और कहा कि अगर आरटीओ जैसे सरकारी कार्यालय में पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेंगे।
प्रेस क्लब के प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर से मुलाकात कर विस्तृत जानकारी दी और मांग रखी कि:
- आरोपितों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए
- आरटीओ परिसर में दलालों की गतिविधियों पर स्थायी रोक लगे
- पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए
- घायल पत्रकार को सरकारी सहायता और मुआवजा दिया जाए
पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि आश्वासन से काम नहीं चलेगा, अब कार्रवाई ज़रूरी है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। कई आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, लेकिन पत्रकार समुदाय चाहता है कि सभी दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और आरटीओ परिसर से दलालगिरी पूरी तरह खत्म की जाए।
देखें विडियो
निष्कर्ष
पत्रकारों पर हमला सिर्फ व्यक्तियों पर हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। यह घटना बताती है कि सरकारी कार्यालयों के भीतर पनप रहे अनैतिक तंत्र को जड़ से उखाड़ने की आवश्यकता है। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस मामले में अब पूरे शहर की निगाहें होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

