इंदौर। देश की व्यापारिक राजधानी कहलाने वाले इंदौर का सराफा बाज़ार वैसे तो अपने अनोखे अंदाज़ और चमचमाते सोने-चांदी के गहनों के लिए मशहूर है, लेकिन अब यहां के कारोबारी एक नए आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। उनका कहना है कि सराफा चौपाटी (फूड ज़ोन) की वजह से उनका पारंपरिक कारोबार प्रभावित हो रहा है और ग्राहक भी असुविधा झेल रहे हैं। इसी कारण सराफा व्यापारी अब एकजुट होकर “सराफा चौपाटी हटाओ” अभियान चला रहे हैं।
चौपाटी से बढ़ रही परेशानी
सराफा चौपाटी असल में वह जगह है, जहां शाम होते ही सैकड़ों फूड स्टॉल लग जाते हैं। इंदौर की पहचान बने स्ट्रीट फूड का मज़ा यहां हजारों लोग रातभर लेने आते हैं। पाव-भाजी, भुट्टे का कीस, जलेबी-रबड़ी से लेकर इंडो-चाइनीज़ डिश तक यहां उपलब्ध हैं। लेकिन, इन्हीं भीड़-भाड़ वाले ठेलों की वजह से सोना-चांदी के कारोबारी परेशान हो चुके हैं।
व्यापारियों का कहना है कि –
- चौपाटी की वजह से बाज़ार में पार्किंग की समस्या विकराल हो गई है।
- गहनों की दुकानों के सामने भीड़ और शोर-शराबा ग्राहकों को दूर कर देता है।
- कई बार सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं, क्योंकि लाखों रुपये के जेवर लेकर आने-जाने वाले ग्राहक इस भीड़ में असहज महसूस करते हैं।
आंदोलन की तैयारी
व्यापारी संघ ने ग्राहकों और दुकानदारों की सुविधा के लिए फॉर्म भरवाना शुरू कर दिया है। इन फॉर्म में लोगों से उनकी राय ली जा रही है कि क्या चौपाटी को हटाया जाए और सराफा को फिर से केवल ज्वेलरी मार्केट के रूप में स्थापित किया जाए।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जब-जब हमने प्रशासन से बात की, हमें केवल आश्वासन मिला। अब अगर हमारी मांगें नहीं सुनी गईं तो हम खुले आंदोलन की ओर बढ़ेंगे।
रात 10 बजे तक खुलेंगी दुकानें
व्यापारियों ने तय किया है कि 1 सितंबर से उनकी दुकानें रात 10 बजे तक खुली रहेंगी। सामान्य दिनों में दुकानों के बंद होने का समय 8 बजे तक माना जाता रहा है, लेकिन अब व्यापारी यह कदम इसलिए उठा रहे हैं ताकि ग्राहक आराम से खरीदारी कर सकें।
एक बड़े सराफा व्यापारी ने बातचीत में कहा –
“जब ग्राहक ही आराम से बाज़ार में नहीं आ पाएंगे तो कारोबार कैसे बढ़ेगा? हमें मजबूरी में देर रात तक दुकानें खोलने का फैसला करना पड़ा है। हम चाहते हैं कि ग्राहक को सुरक्षित और आरामदायक माहौल मिले।”

सराफा चौपाटी के समर्थक भी मौजूद
हालांकि, हर कोई चौपाटी हटाने के पक्ष में नहीं है। इंदौर के कई स्थानीय लोग और खाने-पीने के शौकीन इसे शहर की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि सराफा चौपाटी से इंदौर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है और यहां आने वाले सैलानी सबसे पहले यहीं का ज़िक्र करते हैं।
चौपाटी चलाने वाले फूड वेंडर्स का कहना है कि उनका रोज़गार इससे जुड़ा है। यदि चौपाटी हटा दी गई, तो सैकड़ों परिवार बेरोज़गार हो जाएंगे।
सराफा की पहचान और भविष्य
सराफा बाज़ार का इतिहास 100 साल से भी पुराना है। दिन में यहां सोने-चांदी के गहनों की खरीद-फरोख्त होती है और रात में यह बाज़ार खाने-पीने के शौकीनों से भर जाता है। यही अनोखा मेल इंदौर को अलग पहचान देता है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन दोनों पक्षों की मांगों में संतुलन बैठा पाएगा? क्या सराफा व्यापारी अपने आंदोलन में सफल होंगे या चौपाटी यथावत बनी रहेगी?
निष्कर्ष
इंदौर का सराफा बाज़ार सिर्फ गहनों की मंडी नहीं बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर भी है। यहां का स्ट्रीट फूड दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन व्यापारियों की परेशानी भी वाजिब है। ग्राहकों की सुरक्षा, आरामदायक खरीदारी और साफ-सफाई का माहौल प्राथमिकता होनी चाहिए।
व्यापारी आंदोलन और चौपाटी समर्थकों के बीच यह tug-of-war आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब सबकी नज़र प्रशासन पर टिकी है कि वह किसका पक्ष लेता है और सराफा की इस “चमक” को किस रूप में बचाए रखता है।

