Quick Highlights
- Indore Weather Update
- सितंबर के पहले चार दिनों में ही 7 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज
- औसतन पूरे महीने का कोटा 6 इंच, चार दिन में ही हासिल
- मानसून सीज़न का कोटा पूरा होने के लिए अब सिर्फ 6 इंच बारिश बाकी
- जलजमाव और बाढ़ जैसे हालात, कई इलाकों में रेस्क्यू अभियान
- मौसम विभाग ने अगले 5–7 दिन भारी बारिश की चेतावनी जारी की
लगातार बारिश से शहर पानी-पानी
इंदौर ने इस बार मानसून सीज़न में उम्मीद से ज्यादा तेजी दिखाई है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही आसमान से बरसात ने ऐसी झड़ी लगाई कि महज़ चार दिनों में ही महीने का औसत कोटा पूरा हो गया। रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर में औसतन 6 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार चार दिन में ही 7 इंच से ज्यादा दर्ज हो गई। यानी अभी पूरा महीना बाकी है और शहर ने पहले ही तय आंकड़ा पार कर लिया।
लगातार बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलजमाव देखने को मिला। निचले इलाकों में पानी भर गया, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर एमजी रोड, राजबाड़ा और बाणगंगा क्षेत्र जैसे इलाकों में बारिश का पानी घुस गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
सीज़नल औसत से बस 6 इंच दूर
इंदौर में मानसून की कुल बारिश का औसत कोटा लगभग 38 इंच माना जाता है। इस साल अब तक करीब 32 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। इसका मतलब है कि औसत को पूरा करने के लिए अब सिर्फ 6 इंच बारिश की जरूरत है। मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में बाकी के 25 दिनों में यह आंकड़ा पार हो जाएगा और सीज़नल बारिश औसत से ज्यादा हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय लो-प्रेशर सिस्टम के कारण अभी और तेज बारिश के आसार हैं। यही वजह है कि मौसम विभाग ने अगले 5–7 दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
बांध और तालाब भरकर उफान पर
लगातार हुई बारिश का असर शहर के जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। यशवंत सागर डेम में पानी का स्तर बढ़ने पर उसके 6 गेट खोलने पड़े। इसी तरह बिलावली तालाब और छोटे-बड़े अन्य जलाशयों में पानी छलक पड़ा। यह शहरवासियों के लिए तो राहत की खबर है कि गर्मी में पानी की किल्लत कम होगी, लेकिन फिलहाल यह स्थिति कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर रही है।
नगर निगम और प्रशासन को कई जगहों पर नाव और मोटरबोट की मदद से लोगों को सुरक्षित निकालना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत उन बस्तियों में आई जो नदी-नालों के किनारे बसी हैं।
यातायात और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर
बारिश के कारण शहर में ट्रैफिक व्यवस्था चरमराई हुई है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी भरने से जाम की स्थिति बन गई। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं बस और ऑटो सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
नागरिकों का कहना है कि बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालांकि, किसान और ग्रामीण इलाकों के लोग इसे अच्छी बारिश मानकर खुश हैं, क्योंकि इससे खरीफ फसलों को फायदा होगा और सिंचाई की समस्या कम होगी।
प्रशासन की चुनौतियाँ
भारी बारिश के चलते प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। जलभराव हटाने, नालों की सफाई और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे कामों में निगमकर्मी जुटे हुए हैं। जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
बार-बार हो रहे जलजमाव को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी भी जताई है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद ड्रेनेज सिस्टम अब भी बारिश झेलने लायक नहीं बना।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय बना हुआ है और इसकी वजह से इंदौर सहित पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सितंबर में औसत से ज्यादा बारिश हुई तो यह मानसून इंदौर के लिए ‘रिकॉर्ड ब्रेकर’ साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर ने इस बार सितंबर की शुरुआत में ही बारिश का इतिहास रच दिया है। चार दिनों में ही महीने का औसत कोटा पूरा होना अपने आप में बड़ी बात है। इससे न केवल किसानों को फायदा होगा बल्कि शहर के जलस्रोत भी लबालब भर चुके हैं। हालांकि, राहत के साथ-साथ दिक्कतें भी बढ़ी हैं। जलजमाव, ट्रैफिक जाम और बाढ़ जैसी स्थिति ने प्रशासन के सामने चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।
आने वाले दिनों में अगर बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो इंदौर का मानसून औसतन से ज्यादा दर्ज होगा। यह शहर की पानी की समस्या के लिए सकारात्मक खबर है, लेकिन इसके साथ ही प्रशासन को भी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा ताकि हर साल बारिश नागरिकों के लिए मुसीबत न बन जाए।
फिलहाल इंदौरवासी बरसात के इस दौर को बारिश की ‘मेहरबानी’ मानकर स्वागत कर रहे हैं, लेकिन दुआ यही है कि यह मेहरबानी कहीं आफ़त में न बदल जाए।
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