भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा जल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने हाल ही में यह बड़ा कदम उठाया है कि अब सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित कर दिया जाएगा। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा क्योंकि अब वह पानी, जो पहले उसकी ओर जाता था, उसे रोककर भारत के तीन प्रमुख राज्यों – दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान – को दिया जाएगा। यह फैसला न सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर अहम है, बल्कि जल संकट से जूझ रहे भारतीय राज्यों के लिए भी बड़ी राहत साबित हो सकता है।
सिंधु जल संधि का इतिहास
साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत
- पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास और सतलुज) का पानी भारत को मिला।
- पश्चिमी नदियाँ (झेलम, चिनाब और सिंधु) का पानी पाकिस्तान को दिया गया।
भारत को पश्चिमी नदियों से केवल सिंचाई, पनबिजली और घरेलू ज़रूरतों के लिए सीमित मात्रा में पानी इस्तेमाल करने का अधिकार मिला। इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सफल जल संधियों में गिना जाता है, लेकिन समय-समय पर इस पर विवाद भी होते रहे हैं।
केंद्र सरकार का नया फैसला
हाल ही में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की कि अब पाकिस्तान को जाने वाला सिंधु का पानी भारत रोककर अपने तीन राज्यों – दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान – को देगा।
- खट्टर ने कहा कि आने वाले एक से डेढ़ साल के भीतर इस पानी को इन राज्यों तक पहुँचाने की व्यवस्था की जाएगी।
- सरकार की योजना है कि इस पानी का इस्तेमाल ड्रिंकिंग वॉटर और सिंचाई दोनों कामों के लिए किया जाए।
- जल शक्ति मंत्रालय ने इस दिशा में विस्तृत प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है।
किन राज्यों को होगा फायदा?
1. दिल्ली
देश की राजधानी हर साल गर्मियों में गंभीर जल संकट का सामना करती है। यमुना पर निर्भर दिल्ली के लिए यह पानी एक बड़ा सहारा होगा। इससे पेयजल आपूर्ति में सुधार होगा और दिल्लीवासियों को राहत मिलेगी।
2. हरियाणा
हरियाणा खेती प्रधान राज्य है और यहाँ पानी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। अतिरिक्त पानी मिलने से किसानों को सिंचाई में आसानी होगी और फसल उत्पादन भी बढ़ सकता है।
3. राजस्थान
रेगिस्तानी इलाकों वाला राजस्थान लंबे समय से पानी की कमी झेल रहा है। सिंधु से आने वाला अतिरिक्त जल यहाँ की ग्रामीण आबादी और कृषि के लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है।
पाकिस्तान पर असर
भारत का यह कदम पाकिस्तान के लिए झटका साबित हो सकता है।
- पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा है और उसके कई इलाके सूखे जैसी स्थिति में हैं।
- सिंधु नदियों पर उसकी कृषि व्यवस्था टिकी हुई है।
- भारत द्वारा पानी रोकने के फैसले के बाद पाकिस्तान की जल सुरक्षा और भी खतरे में पड़ सकती है।
पाकिस्तान की ओर से इस फैसले का विरोध किए जाने की पूरी संभावना है और उसने संयुक्त राष्ट्र में भी आवाज उठानी शुरू कर दी है।
चुनौतियाँ और सवाल
यह फैसला भले ही ऐतिहासिक हो, लेकिन इसे लागू करने में कई चुनौतियाँ सामने आएंगी –
- इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी – नहरों और जलाशयों की व्यवस्था करनी होगी ताकि पानी सही तरीके से राज्यों तक पहुँच सके।
- तकनीकी और कानूनी पहलू – अंतरराष्ट्रीय कानून और विश्व बैंक की संधि में संशोधन की प्रक्रिया आसान नहीं है।
- राजनीतिक दबाव – पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकता है, जिससे भारत पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
Quick Highlights
- अब पाकिस्तान को जाने वाला पानी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को दिया जाएगा।
- योजना अगले 1-1.5 साल में लागू करने की तैयारी।
- भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐलान किया।
- दिल्ली में पेयजल संकट, हरियाणा-राजस्थान में कृषि और ग्रामीण जल आपूर्ति को मिलेगा फायदा।
- पाकिस्तान में पानी की कमी और बढ़ने की आशंका।
- चुनौती: नहर, जलाशय और कानूनी अड़चनें।
निष्कर्ष
भारत का यह फैसला केवल पानी की आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश भी है। लंबे समय से पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों को देखते हुए, भारत ने अब कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर ‘पानी की ताकत’ दिखा दी है।
दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों को इससे सीधा लाभ मिलेगा, वहीं पाकिस्तान के लिए यह एक गहरी चोट साबित हो सकती है। हालांकि, असली चुनौती इस योजना को जमीन पर उतारने की होगी। लेकिन यदि यह सफलतापूर्वक लागू हो गया तो आने वाले वर्षों में भारत के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और पाकिस्तान को पानी के लिए वाकई तरसना पड़ सकता है।

