📰 Quick Highlights
- ईरान में कई शहरों में रात्रि विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले रहे हैं, और सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएँ बाधित कर दी हैं।
- प्रदर्शनकारियों में आंखें “खामेनेई के शासन के खिलाफ” नारों तक पहुँच रही हैं।
- विरोध प्रदर्शन को धक्का उस अपराजित विरोध नेता रेजा पहलवी के आह्वान के बाद मिला।
🧠 360 विश्लेषण
ईरान में विरोध प्रदर्शन अब रात्रि-रात्रि बढ़ते जा रहे हैं, और इनका स्वर पहली बार सिर्फ आर्थिक मांगों से आगे निकलकर राजनीतिक असंतोष और शासन के खिलाफ प्रत्यक्ष नारों तक पहुँच गया है।
सबसे पहले विरोधों ने देश की आर्थिक मंदी, महँगी और रोजगार संकट को लेकर शुरूआत की थी, लेकिन जैसे-जैसे हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे, प्रदर्शनकारियों के नारों में “खामेनेई को हटाओ”, “राजतंत्र को वापस लाओ” जैसे प्रतिबिंब भी दिखने लगे।
सरकार की प्रतिक्रिया कड़ी रही — सबसे स्पष्ट इशारा यह है कि इंटरनेट और फ़ोन लाइनें काट दी गयीं, ताकि संदेशों का आदान-प्रदान और बाहर खबरें फैलना मुश्किल हो जाए। यह इंटरनेट ब्लैकआउट किसी आम तकनीकी समस्या की वजह से नहीं बल्कि प्रदर्शन के दबाव को रोकने के लिए राजनीतिक निर्णय के तौर पर जांचा जा रहा है, और पिछले इतिहास में भी इरानी शासन ने इसी तरह की पाबंदियाँ लगाई हैं जब सत्ता के खिलाफ बड़े पैमाने पर असंतोष फैला था।
रेजा पहलवी, जो देश के पूर्व शाही परिवार का निर्वासित विरासताधिकारी है, उसने जनता से निरन्तर प्रदर्शन में बने रहने और दबाव बढ़ाने का आह्वान किया है। इसके चलते कई शहरों में लोग एक साथ सड़कों पर मौजूद हैं और शाम के दौरान भीड़ बढ़ रही है।
इस रैली को अलग-थलग आर्थिक प्रदर्शन से आगे बढ़कर राजनीतिक असंतोष और शासन-विरोधी भावनाओं में बदल देते हुए देखा जा रहा है, और सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही दमन नीतियों ने कुछ जगहों पर हिंसा भी भड़कायी है।
दूसरी ओर, सरकार ने दावा किया है कि हिंसात्मक तत्वों को नियंत्रित करने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन विरोध के निरन्तर बढ़ते पैमाने और व्यापकता से यह स्पष्ट होता है कि जनता की नाराज़गी सिर्फ आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन की अवधि और दिशा पर भी सवाल खड़े कर रही है।
इसलिए यह विरोध केवल कुछ शहरों तक सीमित नहीं रहा — देश के लगभग हर कोने से लोग जुड़ रहे हैं, और प्रशासन की डिजिटल पाबन्दियाँ इसके प्रभाव को रोक पाने में असमर्थ सी दिख रही हैं।
📌 निष्कर्ष
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का स्वर अब आर्थिक असंतोष से आगे बढ़कर शासन-विरोधी राजनीति में बदल चुका है। सरकार के इंटरनेट और फोन सेवाओं को बाधित करने जैसे कड़े कदम जनता को दबाने की कोशिश हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर विरोध अब भी जारी है और यह स्पष्ट संकेत है कि जनता लोकतांत्रिक व मुक्त आवाज़ की मांग में दृढ़ है।

