इंदौर | 19 जुलाई 2025
“हमारा है यही संदेश, नशा-मुक्त हो मध्य प्रदेश” — इसी बुलंद नारे के साथ मध्य प्रदेश पुलिस ने प्रदेशव्यापी नशा विरोधी अभियान की शुरुआत की है। 15 जुलाई से 30 जुलाई 2025 तक चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के चंगुल से बाहर निकालना और समाज को सुरक्षित एवं स्वस्थ बनाना है।
इसी क्रम में शनिवार को इंदौर के फूटी कोठी चौराहे पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक, युवा वर्ग मोजूद रहा । कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों ने नशे के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह यह समाज, परिवार और विशेष रूप से युवाओं को अंदर से खोखला कर देता है।
🎭 नाटक के ज़रिए पहुंचाया गया संदेश
इस अवसर पर एक लघु नाट्य प्रस्तुति भी की गई, जिसमें चार युवकों को अलग-अलग नशीले पदार्थों का रूप देकर मंच पर उतारा गया। किसी ने शराब का भेष लिया, तो किसी ने ड्रग्स , सिगरेट और तम्बाकू का। ये सभी नशे प्रतीकात्मक रूप से एक सीधे-सादे युवक को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।
लेकिन मंच पर पुलिस की भूमिका में आए एक कलाकार द्वारा जागरूकता का संदेश देने पर युवक इनसे मुक्त होता है और अंत में सभी नशीले भेषधारी नाटक के माध्यम से हार मानते हैं। इस प्रभावशाली प्रस्तुति ने न सिर्फ युवाओं को झकझोरा, बल्कि दर्शकों से तालियों की गड़गड़ाहट भी बटोरी।
📞 जरूरतमंदों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
मध्य प्रदेश पुलिस ने इस अभियान के दौरान नशा मुक्ति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर भी साझा किए हैं, जिन पर कोई भी व्यक्ति सहायता ले सकता है:
मानसिक हेल्पलाइन: 1933
नेशनल नशा-मुक्ति हेल्पलाइन: 14416
मप्र पुलिस नारकोटिक्स विभाग: 07049100785
ये नंबर नशे की लत से पीड़ित लोगों के लिए जीवन की नई शुरुआत का माध्यम बन सकते हैं।
🛡 पुलिस का संदेश — युवाओं को बचाना है, सज़ा नहीं देना है
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह अभियान दंडात्मक नहीं, सहायक और सुधारात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है। उनका उद्देश्य है — “नशा करने वाले को अपराधी नहीं, एक बीमार व्यक्ति की तरह देखा जाए, और उसे समाज की मुख्यधारा में लाया जाए।”

📍 प्रदेशभर में चल रहा है विशेष अभियान
इंदौर के अलावा यह अभियान भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, मंदसौर जैसे शहरों में भी ज़ोर-शोर से चलाया जा रहा है। हर जिले में नुक्कड़ नाटक, जागरूकता रैलियाँ, स्कूल-कॉलेज में कार्यशालाएँ और पब्लिक प्लेस पर पोस्टर-बैनर के ज़रिए संदेश दिया जा रहा है।
✍ नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो
मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान ने स्पष्ट कर दिया है कि समाज को नशा-मुक्त बनाने के लिए केवल कानून की नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
हर माता-पिता, हर शिक्षक, हर युवा को इस मुहिम से जुड़ना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियाँ एक सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ सकें।
नशे से हमें क्यों दूर रहना चाहिए?
नशा एक ऐसी बुराई है जो इंसान को धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देती है। यह सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि मन, सोच, परिवार और समाज – हर चीज़ को नुकसान पहुंचाता है। शराब, सिगरेट, तंबाकू, गांजा, ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की लत एक बार लग जाए तो उससे निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम नशे से दूर रहें और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें।
सबसे पहले बात करें स्वास्थ्य की। नशे के कारण शरीर में कई गंभीर बीमारियाँ जन्म लेती हैं – जैसे लीवर खराब होना, फेफड़ों का काम करना बंद कर देना, दिल की बीमारियाँ, कैंसर, मानसिक असंतुलन और यहां तक कि मौत तक हो सकती है। जो लोग लंबे समय तक नशा करते हैं, वे धीरे-धीरे अपने शरीर पर से नियंत्रण खो देते हैं और जीवन जीने की क्षमता घटने लगती है।
नशे का दूसरा सबसे बड़ा असर हमारे परिवार और रिश्तों पर पड़ता है। नशे की लत वाले व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा और हिंसक हो सकता है। वह अपनों की भावनाओं को समझने की क्षमता खो बैठता है। घर में लड़ाई-झगड़े बढ़ जाते हैं, आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है, और कई बार तो परिवार टूटने की नौबत भी आ जाती है। माता-पिता के नशे की आदत बच्चों के भविष्य को भी बर्बाद कर देती है।
समाज की दृष्टि से देखें तो नशा अपराधों को बढ़ावा देता है। नशे में इंसान सही-गलत का फर्क नहीं कर पाता और कई बार चोरी, मारपीट, दुर्घटनाएं और यहां तक कि हत्या जैसे अपराध कर बैठता है। युवा वर्ग, जो देश का भविष्य है, यदि नशे की गिरफ्त में आ जाए तो समाज और राष्ट्र का विकास रुक जाता है।
हमें समझना होगा कि नशा कोई शौक नहीं, बल्कि एक धीमा ज़हर है। इससे तात्कालिक राहत तो मिल सकती है, लेकिन भविष्य अंधकारमय हो जाता है। बेहतर है कि हम खुद भी नशे से दूर रहें और अपने दोस्तों, परिवार, और बच्चों को भी इसके खतरों से अवगत कराएँ।
निष्कर्ष:
नशे से दूरी ही सच्ची आज़ादी है – आज़ादी बीमारी से, गरीबी से, झगड़े से, और आत्मग्लानि से। चलिए, एक ऐसा समाज बनाएं जहाँ नशे की जगह सेहत, संस्कार और सकारात्मकता हो। याद रखिए – “नशा छोड़ो, ज़िंदगी से रिश्ता जोड़ो।”

