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इंदौर के स्कीम नंबर 71, जहां रहवासियों और महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव के संयुक्त प्रयासों से एक बड़ी जनभावना की जीत सामने आई है।

इलाके में संचालित शराब दुकान के विरोध में रहवासी, मातृशक्ति और सामाजिक संगठन लगातार आवाज़ उठा रहे थे — और इस जनआंदोलन को मजबूती मिली जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद इसमें संज्ञान लिया।

अब, उस शराब दुकान को हटाया जा चुका है।
और इस सफलता पर रहवासियों ने महापौर जी के प्रति अपने गहरे भाव प्रकट किए हैं।

रहवासी संघ ने महापौर महोदय के प्रति धन्यवाद प्रकट किया

रहवासियों कहा कि महापौर जी का साथ मिलना हमारे लिए केवल एक प्रशासनिक सहयोग नहीं, बल्कि एक ऐसा सौभाग्य है जिसे शब्दों में नहीं, केवल अनुभव किया जा सकता है।”

शराब दुकान को हटवाने में महापौर जी की तत्परता, संवेदनशीलता और जनहित में लिए गए फैसले को रहवासियों ने सराहते हुए कहा—

“आप जैसे सक्रिय, साहसी और जनभावनाओं को समझने वाले नेतृत्व के कारण ही सामाजिक परिवर्तन की यह मशाल प्रज्वलित हुई है — और हम विश्वास करते हैं कि यह निरंतर जलती रहेगी।”

pushyamitra bhargav

पुष्यमित्र भार्गव के बारे में जानकारी

पुष्य्मित्र भार्गव का नाम आज इंदौर शहर की राजनीति में एक सशक्त, स्वच्छ और सकारात्मक पहचान के रूप में लिया जाता है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े पुष्य्मित्र ने 2022 में इंदौर नगर निगम के महापौर पद का चुनाव जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ये जीत सिर्फ एक राजनैतिक सफलता नहीं थी, बल्कि जनता के विश्वास और उम्मीदों की जीत भी थी। इंदौर जैसे स्मार्ट और स्वच्छता में नंबर वन शहर का नेतृत्व करना कोई आसान जिम्मेदारी नहीं होती, लेकिन भार्गव ने यह जिम्मा पूरी संजीदगी और ऊर्जा के साथ संभाला है।

पुष्य्मित्र मूल रूप से इंदौर के ही निवासी हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई यहीं से पूरी की है। वे पेशे से वकील हैं और कानून की पढ़ाई के दौरान ही सामाजिक गतिविधियों से जुड़ने लगे थे। उनकी रुचि शुरू से ही समाजसेवा और जनहित के कार्यों में रही है। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में शिक्षा, स्वच्छता, और गरीबों की मदद से जुड़े अनेक अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई। शायद यही वजह है कि जब भाजपा ने उन्हें महापौर पद के लिए चुना, तो शहरवासियों को एक उम्मीद दिखी कि इंदौर को कोई ऐसा व्यक्ति मिलेगा जो धरातल से जुड़ा है और शहर की नब्ज़ को समझता है।

चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बड़े ही सादगीपूर्ण और मुद्दा-आधारित अभियान चलाया। उन्होंने लोगों से वादे नहीं, भरोसा मांगा और यही अंदाज़ जनता को भा गया। उनकी साफ-सुथरी छवि, विनम्र व्यवहार और स्पष्ट सोच ने उन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनके महापौर बनने के बाद इंदौर में विकास कार्यों को नई रफ्तार मिली। उन्होंने स्मार्ट सड़कों, सफाई व्यवस्था को और मज़बूत करने, कचरा प्रबंधन, और नागरिक सेवाओं को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए।

पुष्य्मित्र भार्गव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे केवल अफसरों और फाइलों में नहीं उलझते, बल्कि खुद मैदान में उतरकर काम करते हैं। चाहे रात में सड़कों की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण हो या बारिश के समय जलभराव की स्थिति को देखना, वे हमेशा सक्रिय नजर आते हैं। यही वजह है कि आम लोग उन्हें एक राजनेता के बजाय एक ज़िम्मेदार पड़ोसी की तरह देखते हैं।

उन्होंने इंदौर को न सिर्फ भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनाए रखने के लिए काम किया, बल्कि यह कोशिश भी की कि शहर का हर नागरिक इस मुहिम का हिस्सा बने। उनका मानना है कि शहर सिर्फ सरकार नहीं चलाती, बल्कि नागरिकों की भागीदारी से चलता है। यही सोच उन्हें एक अलग और प्रभावशाली नेता बनाती है।

आज पुष्य्मित्र भार्गव इंदौर की नई पीढ़ी के लिए एक उदाहरण बनकर उभरे हैं—एक ऐसा नेता जो अपने शहर से जुड़ा है, जो काम करने में यकीन रखता है और जो राजनीति में बदलाव का प्रतीक बन सकता है।

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