Quick Highlights
- राहुल गांधी आज इंदौर पहुंचे, दूषित पानी से प्रभावित परिवारों से की मुलाकात
- बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों का जाना हाल, 3 की हालत गंभीर
- कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों के लिए 1-1 करोड़ मुआवजे की मांग रखी
- 17 से 31 जनवरी तक प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा
360 विश्लेषण
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को इंदौर पहुंचे। उनका यह दौरा पूरी तरह से भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से प्रभावित परिवारों और अस्पताल में भर्ती मरीजों के हालात जानने पर केंद्रित रहा। सुबह करीब 11 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने किसी भी औपचारिक कार्यक्रम में समय न गंवाते हुए सीधे बॉम्बे हॉस्पिटल का रुख किया।
बॉम्बे हॉस्पिटल में इस समय दूषित पानी से प्रभावित 8 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है। राहुल गांधी ने मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और परिजनों से बातचीत कर प्रशासनिक मदद को लेकर जानकारी ली। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह दौरा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से जुड़ा हुआ है।
अस्पताल के बाद राहुल गांधी करीब 11:45 बजे भागीरथपुरा क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने शोक संतप्त परिवारों से लंबी बातचीत की। इस दौरान स्थानीय रहवासियों ने बताया कि वे लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर थे, लेकिन शिकायतों के बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही ने इस त्रासदी को जन्म दिया।
नगर निगम पर गंभीर आरोप, रिपोर्ट सौंपी गई
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट राहुल गांधी को सौंपी। इस रिपोर्ट में इंदौर नगर निगम पर सीधे तौर पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दूषित जल की सप्लाई लंबे समय से जारी थी, जिसके कारण अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। कांग्रेस ने इस आधार पर मृतकों के परिवारों के लिए एक-एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग दोहराई है।
31 जनवरी तक आंदोलन का एलान
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर 17 से 31 जनवरी तक प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। यह आंदोलन सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में मनरेगा में बदलाव, कानूनी अधिकारों की बहाली और दूषित जल की घटनाओं के खिलाफ चलाया जाएगा। योजना के तहत शहरी और ग्रामीण कांग्रेस कमेटियों द्वारा जिला स्तर पर एक दिवसीय उपवास रखा जाएगा।
आंदोलन का दूसरा चरण 18 जनवरी से शुरू होगा, जिसमें दूषित जल स्रोतों की जांच, सीवेज लाइनों को लेकर जनजागरूकता अभियान और प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति शामिल है।
निष्कर्ष
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब केवल स्थानीय संकट नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। राहुल गांधी का दौरा कांग्रेस के लिए संवेदनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन और सरकार इस दबाव के बीच जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।

