इंदौर। शहर की धड़कन मानी जाने वाली सराफा चौपाटी को लेकर रविवार रात नगर निगम और व्यापारी एसोसिएशन के बीच अहम बैठक हुई। इस बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगम अधिकारियों और व्यापारियों ने मिलकर आगे की कार्ययोजना तैयार की। लंबे समय से चौपाटी की व्यवस्था और उसके संचालन पर उठ रहे सवालों के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

समिति का गठन

बैठक का सबसे बड़ा निर्णय रहा—9 सदस्यीय समिति का गठन। इस समिति में तीन प्रतिनिधि सराफा चौपाटी के परंपरागत व्यापारियों से होंगे, तीन सदस्य सराफा व्यापारी संघ से और तीन अधिकारी नगर निगम की ओर से शामिल होंगे। समिति का मकसद यही है कि चौपाटी की पारंपरिक पहचान बरकरार रहे, साथ ही व्यापारियों की व्यावसायिक गतिविधियाँ भी बिना किसी विवाद के सुचारु रूप से चल सकें।

व्यापारी नेताओं का कहना है कि लंबे समय से चौपाटी के स्वरूप को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। कई बार यह सवाल उठे कि क्या चौपाटी को हटाया जाएगा या किसी नए स्वरूप में लाया जाएगा। ऐसे में समिति का गठन एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

श्राद्ध पक्ष के बाद लगेंगी दुकानें

बैठक में यह भी सहमति बनी कि श्राद्ध पक्ष (पितृपक्ष) के दौरान नई दुकानों की शुरुआत नहीं की जाएगी। धार्मिक मान्यता के चलते इस समय कोई नया कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण सभी पारंपरिक दुकानें श्राद्ध पक्ष के बाद ही लगेंगी। यह निर्णय न केवल व्यापारियों की भावनाओं का सम्मान करता है बल्कि धार्मिक परंपरा को भी ध्यान में रखता है।

चौपाटी यथास्थान रहेगी

बैठक में व्यापारी एसोसिएशन की ओर से स्पष्ट मांग उठाई गई कि सराफा चौपाटी को कहीं और न शिफ्ट किया जाए। इस पर महापौर ने आश्वस्त किया कि चौपाटी यथास्थान ही रहेगी। इंदौर की पहचान और धरोहर के रूप में इसे उसी जगह सुरक्षित रखा जाएगा। नगर निगम ने यह भी कहा कि चौपाटी के सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था को लेकर आगे और काम किए जाएंगे।

व्यापारी संघ का पक्ष

बैठक में सराफा व्यापारी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि चौपाटी केवल एक व्यावसायिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह इंदौर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान भी है। रात में लगने वाली यहां की दुकानों से हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी जुड़ी है। यदि इसे हटाया जाता या व्यवस्थित तरीके से नहीं चलाया जाता तो इसका असर सीधे व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ता।

संघ के प्रतिनिधियों ने समिति में व्यापारी पक्ष की मजबूत भागीदारी की मांग की थी, जिसे मान लिया गया। अब व्यापारी प्रतिनिधि सीधे समिति में बैठकर चौपाटी के संचालन और व्यवस्था पर अपनी राय दे सकेंगे।

नगर निगम की पहल

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बैठक के दौरान कहा कि निगम का मकसद किसी भी व्यापारी को नुकसान पहुँचाना नहीं है। निगम की प्राथमिकता यह है कि शहर की परंपराओं का सम्मान हो, साथ ही नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ मिलें। उन्होंने आश्वस्त किया कि समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू किया जाएगा और सभी पक्षों को संतुष्ट करने की कोशिश होगी।

सुरक्षा और यातायात पर भी चर्चा

बैठक में चौपाटी से जुड़े सुरक्षा और यातायात मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सराफा बाजार और चौपाटी क्षेत्र रात के समय बेहद भीड़भाड़ वाला इलाका रहता है। यहां सुरक्षा, पार्किंग और सफाई की समस्याएँ बार-बार सामने आती रही हैं। समिति इन सभी मुद्दों पर भी समाधान खोजेगी।

महापौर ने साफ कहा कि चौपाटी को शहर की धरोहर के रूप में संरक्षित रखा जाएगा, लेकिन इसमें आने वाली समस्याओं का स्थायी हल भी ढूँढना होगा।

सांस्कृतिक पहचान और भावनाओं का सम्मान

सराफा चौपाटी केवल खाने-पीने या व्यापार का स्थल नहीं, बल्कि इंदौर की एक जीवंत सांस्कृतिक पहचान है। यहां देश-विदेश से आने वाले सैलानी रात के समय भीड़ का हिस्सा बनते हैं और चौपाटी के स्वादिष्ट व्यंजन इंदौर की शान माने जाते हैं। यही वजह है कि नगर निगम और व्यापारी दोनों ही इसके महत्व को समझते हुए किसी भी निर्णय में जल्दबाजी नहीं करना चाहते।

निष्कर्ष

बैठक से निकला निष्कर्ष यही है कि सराफा चौपाटी को न हटाया जाएगा और न ही उसकी परंपरा से छेड़छाड़ होगी। 9 सदस्यीय समिति अब चौपाटी के भविष्य का रोडमैप तय करेगी। श्राद्ध पक्ष के बाद पारंपरिक दुकानें यथास्थान लगेंगी और इंदौरवासियों को चौपाटी उसी अंदाज में देखने को मिलेगी, जैसी वर्षों से उनकी पहचान बनी हुई है।

इस फैसले से न केवल व्यापारियों ने राहत की सांस ली है, बल्कि आम नागरिकों और चौपाटी से जुड़े कर्मचारियों के चेहरों पर भी संतोष दिख रहा है। नगर निगम और व्यापारियों के बीच हुई यह सहमति आने वाले समय में इंदौर की इस सांस्कृतिक धरोहर को और भी सशक्त बनाने में मददगार साबित हो सकती है।

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