🔴 Quick Highlights
- केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने भारत-US व्यापार समझौते में किसान हित पूर्ण रूप से सुरक्षित बताए।
- विपक्ष के आरोपों पर चौहान ने कहा कि यह डील किसानों को नुकसान नहीं पहुँचाएगी।
- भारत ने संवेदनशील कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है।
- डील से कृषि निर्यात के अवसर बढ़ेंगे और घरेलू बाजार की सुरक्षा बनी रहेगी।
🧠 360 विश्लेषण
नई दिल्ली/भोपाल — केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को भारत-US ट्रेड डील पर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चौहान ने कहा कि इस व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है, और कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुँचाने वाली कोई भी चीज़ इसमें शामिल नहीं की गई है।
विपक्ष खासकर कांग्रेस का कहना था कि यह समझौता भारत के किसानों को “खुला निशाना” बना देगा और कृषि आय पर विपरीत प्रभाव डालेगा। लेकिन चौहान ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसे गलत और भ्रामक दावे बताया और कहा कि डील का रुख किसानों के पक्ष में ही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ किए गए अंतरिम व्यापार समझौते में उन सभी संवेदनशील कृषि उत्पादों — जैसे गेहूं, चावल, दूध-दही, मसाले और दालें — को समझौते से बाहर रखा गया है ताकि घरेलू खेती और किसानों की कमाई पर असर न पड़े।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि डील के तहत अमेरिका में भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात करों में कमी के कारण बढ़ सकता है, जिससे भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार में अवसर मिलेंगे। बासमती चावल, मसालों और अन्य कृषि वस्तुओं के निर्यात को लाभ मिलेगा, जबकि भारत ने अमेरिका से संवेदनशील कृषि वस्तुओं के आयात पर कोई रियायती सीमा नहीं दी है।
चुनावी राजनीतिक माहौल के बीच यह बयान आया है जहाँ विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है कि भारत-US ट्रेड डील से कृषि बाजार प्रभावित हो सकता है। चौहान ने इसे दूर किया गया भ्रम बताया और कहा कि यह डील देश और किसानों दोनों के हित में है।
⚖️ निष्कर्ष
भारत-US व्यापार समझौता किसानों के हितों को दरकिनार नहीं करता, बल्कि चौहान के अनुसार इसे सुरक्षित और संतुलित बनाया गया है। विपक्ष के आरोपों को केंद्रीय कृषि मंत्री ने “भूलभुलैया” करार दिया और किसानों को वैश्विक बाजारों में अवसर देने वाला बताया।
अब यह राजनीतिक चर्चाओं का मुद्दा तब्दील हो चुका है कि क्या वास्तव में किसानों के हित सुरक्षित हैं या फिर विस्तृत पारदर्शिता और डेटा देना आवश्यक है — खासकर संसद में बहस के लिए विपक्ष के दबाव के बीच।

