Quick Highlights

  • भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर शिवराज सिंह चौहान का नाम चर्चा में।
  • ग्वालियर में मीडिया से बातचीत के दौरान सवालों पर किया किनारा।
  • महाभारत का उदाहरण देते हुए बोले– लक्ष्य सिर्फ कृषि उत्पादन और किसानों का कल्याण।
  • RSS प्रमुख से मुलाकात के बाद अटकलों को मिला था बल।
  • चौहान ने कहा– “मैंने कभी सोचा नहीं, न किसी ने कहा; किसानों की सेवा ही पूजा है।”

ग्वालियर से उठी नई चर्चा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा। मौजूदा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल अब सीमित समय के लिए बचा है और ऐसे में नए चेहरे की तलाश तेज हो गई है। इस बीच ग्वालियर से अचानक राजनीतिक हलचल बढ़ गई जब केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से यह सवाल पूछ लिया गया कि क्या वे भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं?

चौहान ने इस सवाल पर हाथ जोड़ लिए और बड़ी सहजता से जवाब देते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना चाहते। उनका ध्यान सिर्फ एक ही विषय पर केंद्रित है – कृषि उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आमदनी सुधारना।


“मेरी हर सांस में खेती बसती है”

ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा–
“मैं आज कृषि मंत्री हूँ। मेरी एक-एक कोशिका, मेरी हर सांस खेती से जुड़ी है। मैं दिन-रात किसानों के बारे में सोचता हूँ। यह अटकलें लगाना छोड़ दीजिए कि मैं भाजपा अध्यक्ष बनने जा रहा हूँ। मेरा पूरा ध्यान केवल किसानों की सेवा और कृषि सुधार पर है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, वह बहुत बड़ी है और वह पूरी निष्ठा के साथ इसे निभाना चाहते हैं।


महाभारत का संदर्भ – “चिड़िया की आंख”

अपनी बात को समझाने के लिए चौहान ने महाभारत का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जैसे महाभारत में गुरु द्रोण ने अर्जुन से पूछा था कि वह क्या देख रहा है, तो अर्जुन ने कहा था – “मुझे सिर्फ चिड़िया की आंख दिख रही है।”

चौहान ने इसे जोड़ते हुए कहा –
“आज मेरी भी स्थिति वैसी ही है। मुझे केवल एक ही लक्ष्य दिख रहा है – कृषि उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना। इसके अलावा मेरी नज़र कहीं और नहीं है।”


RSS प्रमुख से मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें

दरअसल, बीते दिनों शिवराज सिंह चौहान की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात हुई थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि उन्हें भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

चूंकि शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और संगठनात्मक पकड़ भी रखते हैं, इसलिए पार्टी के भीतर उन्हें एक बड़े नेता के तौर पर देखा जाता है। लेकिन चौहान ने इन तमाम अटकलों को फिलहाल विराम देते हुए स्पष्ट कर दिया कि उनकी प्राथमिकता सिर्फ कृषि है।


किसानों के हित पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि देशभर के किसानों को खाद, बीज और आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वे हर राज्य के किसानों से संवाद कर रहे हैं और मंत्रालय की नीतियों को इस तरह ढालने की कोशिश में हैं जिससे उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो।

उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर ही किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा हो सकता है।


राजनीतिक संदेश भी साफ

हालांकि, चौहान ने सीधे तौर पर अध्यक्ष पद की दौड़ से इनकार किया, लेकिन जानकार मानते हैं कि उनका यह रुख राजनीतिक संदेश भी है। वह यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी महत्वाकांक्षा व्यक्तिगत पदों पर नहीं, बल्कि सेवा भाव और काम पर आधारित है। यही संदेश भाजपा संगठन को भी जाता है कि वह अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं से “सेवा और समर्पण” की उम्मीद करता है।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए कहा है कि भाजपा में आंतरिक खींचतान जारी है और शिवराज सिंह चौहान का नाम उछालकर केवल माहौल बनाया जा रहा है। हालांकि, भाजपा नेताओं का कहना है कि अध्यक्ष कौन होगा यह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का विषय है, इस पर फिलहाल चर्चा करना समय से पहले है।

shivraj singh chouhan

निष्कर्ष

शिवराज सिंह चौहान का भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर उठी अटकलों पर हाथ जोड़ना और महाभारत का उदाहरण देना इस बात का संकेत है कि वे फिलहाल किसी भी तरह की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहते। उनका पूरा ध्यान कृषि और किसानों की समस्याओं के समाधान पर है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह बयान दोहरी रणनीति का हिस्सा हो सकता है – एक ओर किसानों के हितैषी नेता की छवि को और मजबूत करना, वहीं दूसरी ओर संगठन को यह संकेत देना कि वे पूरी तरह पार्टी की इच्छानुसार आगे बढ़ेंगे।

भले ही अभी उन्होंने अटकलों से किनारा कर लिया हो, लेकिन आने वाले महीनों में भाजपा अध्यक्ष पद की रेस में उनका नाम फिर से गूंजे, इसमें कोई शक नहीं। राजनीति में अक्सर जो सबसे ज़्यादा इनकार करता है, वही अंत में सबसे बड़ा दावेदार साबित होता है।

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