बिहार के भागलपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां Special Intensive Revision (SIR) के दौरान यह खुलासा हुआ कि दो पाकिस्तानी महिलाओं के नाम न केवल मतदाता सूची में दर्ज हैं बल्कि उनके पास भारतीय वोटर आईडी कार्ड भी जारी हो चुके हैं। (SIR voter list verification Bihar) इतना ही नहीं, जांच में एक पाकिस्तानी पुरुष के नाम पर आधार कार्ड बनने की भी जानकारी मिली। यह मामला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
पूरा मामला क्या है?
भागलपुर जिले में हाल ही में चल रही SIR प्रक्रिया का उद्देश्य था—मतदाता सूची को अपडेट करना, फर्जी नाम हटाना और नए मतदाताओं को जोड़ना। इसी प्रक्रिया के दौरान दो महिलाओं—फिरदौसिया खानम और इमराना खानम—के नाम पर वोटर आईडी कार्ड मिलने की पुष्टि हुई।
- फिरदौसिया खानम का नाम मतदाता सूची में दर्ज पाया गया। उनके पति मोहम्मद तफजील अहमद मूल रूप से रंगपुर (पूर्वी पाकिस्तान, अब बांग्लादेश) से थे। रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 1956 में तीन महीने के वीज़ा पर भारत आए थे।
- दूसरी महिला इमराना खानम (उर्फ इमराना खातून) पिता इबतुल हसन के नाम से दर्ज हैं। वह भी पाकिस्तान से वीज़ा पर भारत आई थीं और बाद में यहीं बस गईं।
जांच में जब दस्तावेज़ों की छानबीन हुई तो साफ हो गया कि दोनों महिलाएं भारत की स्थायी नागरिक नहीं हैं, बावजूद इसके उन्हें वोटर आईडी कार्ड जारी कर दिया गया।
तीसरा चौंकाने वाला खुलासा
सिर्फ यही नहीं, SIR जांच में यह भी पाया गया कि मोहम्मद असलम नाम के पाकिस्तानी नागरिक ने भी आधार कार्ड बनवा लिया है। वह वर्ष 2002 में दो साल के वीज़ा पर भारत आए थे। सवाल यह है कि विदेशी नागरिक रहते हुए उन्हें आधार जैसी पहचान कैसे जारी की गई, जबकि सरकार स्पष्ट रूप से कह चुकी है कि आधार केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाएगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
इस खुलासे के बाद भागलपुर जिला प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने पुष्टि की कि दोनों महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही मामले की विस्तृत रिपोर्ट गृह मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय को भेजी जा रही है।
पुलिस और खुफिया विभाग की टीमें भी इस पूरे प्रकरण की तहकीकात कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दस्तावेज़ों की जांच में इतनी बड़ी चूक किस स्तर पर हुई।
यह मामला गंभीर क्यों है?
- राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल – पड़ोसी देश के नागरिकों को भारत में वोटिंग का अधिकार मिलना सीधे-सीधे सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर खतरा है।
- चुनावी पारदर्शिता पर असर – यदि विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं तो यह चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।
- प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण – यह केस साबित करता है कि पहचान पत्र जारी करने वाली एजेंसियों और चुनाव आयोग की स्थानीय इकाई में गंभीर खामियां हैं।
- राजनीतिक विवाद – पहले से ही SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद चल रहा है। इस खुलासे के बाद विपक्ष इसे और बड़ा मुद्दा बना सकता है।
SIR प्रक्रिया पर सवाल
SIR यानी Special Intensive Revision चुनाव आयोग की वह कवायद है जिसके तहत हर जिले में मतदाता सूची की गहन जांच की जाती है। इसमें मृत लोगों के नाम हटाने, डुप्लीकेट प्रविष्टियां मिटाने और नए नाम जोड़ने का काम होता है।
लेकिन इस प्रक्रिया पर लगातार विवाद हो रहे हैं। कई जगहों से शिकायतें मिली हैं कि राजनीतिक दबाव में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं या जोड़े जा रहे हैं। अब भागलपुर का यह मामला सामने आने से इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या हो सकते हैं आगे के कदम?
- गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग इस मामले में संयुक्त जांच बैठा सकते हैं।
- जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह गड़बड़ी हुई है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।
- सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस मामले के पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है, जो फर्जी दस्तावेज़ बनवाकर विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान दिला रहा हो।
- यह भी तय है कि अब पूरे बिहार में मतदाता सूची और आधार पंजीकरण की पुनः समीक्षा की जाएगी।
Quick Highlights
- भागलपुर में SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ा खुलासा।
- दो पाकिस्तानी महिलाओं के नाम मतदाता सूची में पाए गए।
- दोनों के पास भारतीय वोटर आईडी कार्ड भी मौजूद।
- जांच में एक पाकिस्तानी पुरुष का आधार कार्ड भी सामने आया।
- जिला प्रशासन ने दोनों महिलाओं के नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
- मामला गृह मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा।

निष्कर्ष
भागलपुर का यह मामला सिर्फ स्थानीय प्रशासन की चूक नहीं है, बल्कि देश की चुनावी और पहचान प्रणाली पर सीधा सवाल है। यह दर्शाता है कि सिस्टम में कितनी खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर विदेशी नागरिक भी भारतीय पहचान पत्र हासिल कर सकते हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा बनेगा।
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि ऐसी घटनाओं की गहराई से जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले।

