Quick Highlights
- छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से अब तक कई मासूमों की मौत।
- डॉक्टर प्रवीण सोनी को किया गया गिरफ्तार।
- श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी पर भी मामला दर्ज।
- सिरप में खतरनाक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की पुष्टि।
- प्रदेश सरकार ने Coldrif सिरप पर बैन लगाया, जांच तेज।
कफ सिरप से मासूमों की मौत – पूरी घटना
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से आई यह खबर पूरे देश को हिला देने वाली है। कफ सिरप से मौत : बच्चों को खांसी-जुकाम से राहत दिलाने के लिए दिए गए Coldrif कफ सिरप ने उनके जीवन की डोर ही काट दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में इस सिरप के सेवन से कम से कम 11 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। परिवार वाले इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन हालात ऐसे बने कि कई मासूमों की किडनी फेल हो गई और उनकी जान चली गई।
जांच में पाया गया कि सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नाम का जहरीला रसायन मौजूद था। यह वही तत्व है, जो पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बन चुका है। DEG को अगर शरीर में अधिक मात्रा में लिया जाए तो यह किडनी और लीवर दोनों को बुरी तरह प्रभावित करता है और अंततः मौत तक ले जा सकता है।
डॉक्टर की भूमिका और गिरफ्तारी
इस मामले में सिर्फ कंपनी ही नहीं, बल्कि डॉक्टर पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस ने छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने बिना जांच और सुरक्षा को ध्यान में रखे, बच्चों को यही जहरीला कफ सिरप लिख दिया। जिन बच्चों ने डॉक्टर के कहने पर यह दवा ली, उनकी हालत बिगड़ती चली गई।
गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर से पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्हें इस दवा के बारे में जानकारी थी या फिर यह लापरवाही का मामला है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि डॉक्टर और कंपनी के बीच कोई कारोबारी संबंध तो नहीं थे।
श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी पर शिकंजा
Coldrif कफ सिरप का उत्पादन श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी करती है। इस कंपनी पर अब एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच में पता चला कि कंपनी ने निर्माण प्रक्रिया में मानक नियमों का पालन नहीं किया। लेबोरेटरी टेस्ट में DEG की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर पर पाई गई।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी फार्मा कंपनी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई हो। भारत में दवा उद्योग पर कई बार सवाल उठे हैं, लेकिन इस घटना ने फिर से यह साबित कर दिया कि जब तक निगरानी कड़ी नहीं होगी, मासूमों की जान खतरे में बनी रहेगी।
सरकार का सख्त रुख
घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत Coldrif सिरप की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की गंभीरता देखते हुए जांच के आदेश दिए। इसके अलावा, मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है।
सरकार ने फार्मास्यूटिकल कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है और यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि बाजार में कोई भी जहरीली या घटिया दवा न पहुंचे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि DEG एक औद्योगिक रसायन है, जिसका इस्तेमाल ब्रेक फ्लूइड और पेंट बनाने में किया जाता है। यह किसी भी हालत में दवाइयों का हिस्सा नहीं होना चाहिए। लेकिन कई बार सस्ती लागत और निगरानी की कमी के चलते दवा कंपनियां इसकी मिलावट कर देती हैं।
डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को अब बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी दवा को बच्चों को देने से पहले उसकी पैकिंग, कंपनी का नाम और डॉक्टर की सलाह को ध्यान से देखना जरूरी है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह घटना कोई नई नहीं है। इससे पहले भी कई देशों में इसी तरह के मामलों में सैकड़ों बच्चों की जान जा चुकी है। खासकर अफ्रीका और एशिया के कुछ देशों में घटिया दवाइयों की वजह से मौतें हुई हैं। भारत में भी कई बार छोटे स्तर की फार्मा कंपनियों पर जहरीली दवा बनाने के आरोप लग चुके हैं।
यहां बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी कंपनियों को समय रहते पकड़ा क्यों नहीं जाता। अगर दवाओं की टेस्टिंग और निगरानी ठीक से हो, तो शायद ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

लोगों का गुस्सा और आक्रोश
छिंदवाड़ा के लोगों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों ने कभी सोचा भी नहीं था कि खांसी-जुकाम जैसी छोटी बीमारी का इलाज उनकी मौत बन जाएगा। आम जनता अब सरकार और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग कर रही है।
निष्कर्ष
कफ सिरप से हुई मासूमों की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा उद्योग की खामियों को उजागर कर दिया है। डॉक्टर की गिरफ्तारी और कंपनी के खिलाफ केस दर्ज होना एक कदम जरूर है, लेकिन यह नाकाफी है। जरूरी है कि दवा उद्योग पर कड़ी निगरानी रखी जाए और दोषियों को कठोर सजा दी जाए।
मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। यह घटना देश के लिए एक चेतावनी है कि अगर अभी नहीं चेते, तो आने वाले समय में ऐसी त्रासदियां और बढ़ सकती हैं।

