ध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के महिदपुर कस्बे में शुक्रवार को गणेश सवारी के दौरान एक विवादित झांकी को लेकर माहौल अचानक बिगड़ गया। इस झांकी में “लव जिहाद” पर आधारित चित्रण किया गया था, जिसे देखने के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय आक्रोशित हो गया। देखते ही देखते स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि जुलूस के बीच पथराव शुरू हो गया और प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल और RAF (Rapid Action Force) तक तैनात करनी पड़ी।
घटना कैसे शुरू हुई?
महिदपुर कस्बे में हर साल की तरह इस बार भी गणेश उत्सव पर शोभायात्रा निकाली गई थी। इसमें कई आकर्षक झांकियां शामिल थीं, लेकिन इस बार एक झांकी “लव जिहाद” विषय पर आधारित थी। इसमें टोपी, दाढ़ी और बुर्का पहने पुतलों को दिखाया गया था। झांकी का संदेश था कि कैसे “लव जिहाद” समाज को प्रभावित कर रहा है।
हालांकि आयोजकों का दावा था कि यह केवल सामाजिक जागरूकता के लिए बनाई गई थी, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसे अपनी धार्मिक भावनाओं पर हमला माना। खासतौर पर जब झांकी मोती मस्जिद के पास से निकली तो स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई।
आपत्ति और पथराव
आपत्ति करने वालों ने शुरुआत में तहसील कार्यालय का घेराव कर आयोजकों और प्रशासन से झांकी में बदलाव करने की मांग की। लेकिन इसी बीच तनाव बढ़ा और कुछ युवाओं ने जुलूस पर पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और शोभायात्रा रुक गई।
गवाहों के अनुसार, पथराव झांकी के पास ही शुरू हुआ और धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल गया। कई श्रद्धालु डर के कारण इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान कुछ वाहनों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा।
पुलिस की तैनाती और कार्रवाई
स्थिति को बिगड़ते देख उज्जैन पुलिस सक्रिय हो गई। महिदपुर एसडीओपी और जिला पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर पहले तो दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब भीड़ काबू से बाहर होती दिखी, तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया।
SP प्रदीप शर्मा के निर्देश पर अतिरिक्त बल बुलाया गया और RAF को भी तैनात किया गया। पुलिस ने फ्लैग मार्च किया ताकि आम लोगों में भरोसा बहाल हो सके। वहीं CCTV कैमरों से पथराव करने वालों की पहचान की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी और CCTV फुटेज के आधार पर FIR दर्ज की जाएगी।
प्रशासन का रुख
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हाल में माहौल बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि विवादित झांकी में बदलाव करवाया गया है ताकि आगे कोई तनाव न फैले।
प्रशासन ने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों से बात कर शांति बनाए रखने की अपील भी की है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि धार्मिक आयोजनों में विवादास्पद विषयों को शामिल करना कितना सही है। “लव जिहाद” पहले से ही एक संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गर्म मुद्दा रहा है। ऐसे में इसे झांकी के रूप में प्रस्तुत करना स्वाभाविक रूप से विवाद को जन्म देता है।
स्थानीय राजनीतिक दलों और संगठनों ने भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। कुछ ने आयोजकों का समर्थन किया और कहा कि यह सामाजिक बुराई के खिलाफ संदेश था, जबकि दूसरी ओर कई नेताओं ने इसे समाज को बांटने वाली कार्रवाई करार दिया।
लोग क्या कह रहे हैं?
- श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक आयोजनों का मकसद शांति और भाईचारे का संदेश देना होना चाहिए, न कि तनाव फैलाना।
- मुस्लिम समुदाय का तर्क है कि ऐसी झांकियां सीधे तौर पर उनकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाती हैं और यह उनकी भावनाओं को आहत करता है।
- वहीं, आयोजकों का दावा है कि उनका मकसद केवल “लव जिहाद” पर जागरूकता फैलाना था, किसी की भावना आहत करना नहीं।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल महिदपुर में शांति है, लेकिन माहौल अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। पुलिस बल लगातार गश्त कर रहा है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसे विवाद रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
निष्कर्ष
उज्जैन के महिदपुर में गणेश उत्सव जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को “लव जिहाद” जैसी झांकी ने विवादों में डाल दिया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक आयोजनों में अगर संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया जाए, तो यह सामुदायिक तनाव को जन्म दे सकता है।
पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से स्थिति काबू में आ गई, लेकिन यह घटना आने वाले समय में राजनीति और समाज दोनों पर असर डाल सकती है।

