pm modi with vice president candidate

Quick Highlights

  • उपराष्ट्रपति चुनाव 2025
  • बीजेपी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया।
  • आरएसएस से गहरा नाता और तमिलनाडु की ओबीसी (कोंगू गौंडर) समुदाय से आते हैं।
  • दक्षिण भारत में राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति मानी जा रही है।
  • विपक्षी INDIA गठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ीं, खासकर DMK को लेकर।
  • उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है।

परिचय

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित कर विपक्ष की टेंशन बढ़ा दी है। पार्टी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और वरिष्ठ भाजपा नेता सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतारने का ऐलान किया है। यह फैसला न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे भाजपा की दक्षिण भारत aमें पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी साफ झलकती है।


सी.पी. राधाकृष्णन कौन हैं?

सी.पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु के एक अनुभवी भाजपा नेता हैं। उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से लंबे समय से रहा है। यही कारण है कि उनका नाम सामने आने के बाद आरएसएस के भीतर संतोष की लहर देखी जा रही है।

वे तमिलनाडु के कोंगू वेल्लाला गौंडर समुदाय से आते हैं, जो एक प्रभावशाली ओबीसी वर्ग माना जाता है। यह पहलू राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है क्योंकि भाजपा लगातार दक्षिण भारत में सामाजिक और जातीय समीकरण साधने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक करियर में राधाकृष्णन दो बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं और संगठनात्मक स्तर पर उन्होंने भाजपा को तमिलनाडु में खड़ा करने के लिए लंबा संघर्ष किया है।


बीजेपी का राजनीतिक दांव

बीजेपी का यह कदम कई मायनों में बड़ा दांव माना जा रहा है। एक तरफ इससे पार्टी ने ओबीसी समाज को साधने की कोशिश की है, तो दूसरी तरफ दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का संदेश भी दिया है।

इसके अलावा, राधाकृष्णन की RSS से पृष्ठभूमि होने के चलते यह साफ है कि भाजपा शीर्ष संवैधानिक पदों पर आरएसएस से जुड़े नेताओं को जगह देने की अपनी नीति को आगे बढ़ा रही है। पहले राष्ट्रपति और अब उपराष्ट्रपति के चुनाव में यह पैटर्न साफ नज़र आता है।


विपक्ष की बढ़ी मुश्किलें

उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती है – एकता बनाए रखना। भाजपा के पास संख्यात्मक रूप से बहुमत का फायदा तो है ही, साथ ही राधाकृष्णन की उम्मीदवारी ने विपक्षी INDIA गठबंधन में नई टेंशन पैदा कर दी है।

खासकर DMK (द्रविड़ मुनेत्र कषगम) के लिए यह मुश्किल स्थिति है। तमिलनाडु की राजनीति में DMK का सीधा मुकाबला भाजपा से है, लेकिन चूंकि राधाकृष्णन राज्य के जाने-माने चेहरे हैं, इसलिए DMK पर दबाव बढ़ गया है।

विपक्षी गठबंधन के भीतर कई पार्टियां पहले से ही आपसी तालमेल को लेकर परेशान हैं। अब उपराष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के इस कदम से क्रॉस वोटिंग की संभावना भी बढ़ गई है, क्योंकि इस चुनाव में पार्टी व्हिप लागू नहीं होता।


कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता मनिकम टैगोर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह एक और “RSS का व्यक्ति” है, जिसे संवैधानिक पद पर भेजा जा रहा है। उनका कहना है कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं को संघ के प्रभाव में लाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अभी तक अपने उम्मीदवार का नाम तय नहीं कर पाए हैं। उम्मीद है कि INDIA ब्लॉक अगले कुछ दिनों में रणनीतिक बैठक कर अपना रुख स्पष्ट करेगा।


दक्षिण भारत में संदेश

सी.पी. राधाकृष्णन की उम्मीदवारी का सबसे बड़ा संदेश दक्षिण भारत को दिया गया है। अब तक भाजपा को दक्षिणी राज्यों—खासकर तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में—अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने में ज्यादा सफलता नहीं मिली।

लेकिन उपराष्ट्रपति पद जैसे प्रतिष्ठित संवैधानिक स्थान पर तमिलनाडु से एक चेहरे को उतारकर भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि वह दक्षिण भारत को हल्के में नहीं ले रही। इससे भाजपा का संगठनात्मक और सामाजिक आधार मजबूत होने की संभावना है।


उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सांसदों द्वारा किया जाता है। मतदान गोपनीय बैलेट से होता है और इसमें क्रॉस वोटिंग की पूरी संभावना रहती है क्योंकि सांसदों पर व्हिप लागू नहीं होता।

इस बार का चुनाव 9 सितंबर 2025 को होना है। वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नया उपराष्ट्रपति पदभार संभालेंगे।


निष्कर्ष

बीजेपी ने सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। इससे न केवल पार्टी ने आरएसएस के साथ अपनी नजदीकियों को और मजबूत किया है, बल्कि सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा है।

दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन के सामने अब बड़ी चुनौती है—क्या वे एकजुट होकर मजबूत उम्मीदवार उतार पाएंगे या नहीं?
विशेषकर DMK जैसी पार्टियों के लिए यह और भी कठिन स्थिति है, क्योंकि राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं और उनका सामाजिक आधार मजबूत है।

अब सबकी नजरें 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव पर हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा का यह फैसला विपक्ष की रणनीति को पूरी तरह से चुनौती देने वाला है।

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