Quick Highlights
- उज्जैन पुलिस ने नकली नोट छापने वाली फैक्ट्री पकड़ी।
- दो आरोपी गिरफ्तार, 17.50 लाख रुपये के नकली नोट जब्त।
- सिक्योरिटी धागे और ग्रीन इंक जैसे नकली सुरक्षा फीचर्स भी मिले।
- इंदौर की एक कॉलोनी के फ्लैट में चल रहा था फेक नोट निर्माण।
- आरोपी 10 लाख नकली नोट के बदले 1 लाख असली नोट लेते थे।
- नीमच में भी नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश, एक गिरफ्तार।
विस्तृत खबर
उज्जैन। मध्य प्रदेश की उज्जैन पुलिस ने नकली नोटों का बड़ा नेटवर्क पकड़ते हुए एक ऐसी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है जहाँ लाखों रुपये के फेक नोट तैयार किए जा रहे थे। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 17 लाख 50 हजार रुपये के नकली नोट जब्त किए गए हैं। इन नोटों में सिक्योरिटी थ्रेड, माइक्रो प्रिंट और ग्रीन इंक सिक्योरिटी पैटर्न जैसे नकली फीचर्स भी शामिल थे, जिससे वे दूर से असली की तरह दिखाई देते थे।
सूचना पर पुलिस की घेराबंदी
घटना उज्जैन जिले के थाना चिमनगंज मंडी क्षेत्र की है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक 500 रुपये के नकली नोटों की बड़ी खेप लेकर शहर में डिलीवरी के लिए आने वाले हैं। इस सूचना के आधार पर तुरंत एक विशेष टीम गठित की गई और पांड्याखेड़ी ब्रिज क्षेत्र में चेकिंग शुरू की गई।
चेकिंग के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध युवक दिखे। पुलिस को देखकर दोनों भागने लगे, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया। तलाशी लेने पर दोनों के बैग से 17.50 लाख रुपये के 500-500 के नकली नोट बरामद हुए।
इतना नकली पैसा कहाँ से आ रहा था?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु गोसर और टीपेश चौहान के रूप में हुई है। काउंटिंग में हिमांशु के पास से 22 गड्डियां मिलीं, जिसमें कुल 11 लाख रुपये थे। वहीं टीपेश के पास से 13 गड्डियां मिलीं, जिनकी कुल राशि 6 लाख 50 हजार रुपये निकली।
पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि वे इंदौर में अरविंदो अस्पताल के सामने श्री गंगा बिहार कॉलोनी के एक फ्लैट में अपने साथी राजेश के साथ मिलकर नकली नोटों की छपाई करते थे। यह पूरा सेटअप कई महीनों से चल रहा था।
आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि वे 10 लाख रुपये के नकली नोटों के बदले 1 लाख रुपये असली नोट लेने का सौदा करते थे। यानी नकली करंसी को बेहद कम दाम में मार्केट में उतारा जा रहा था।
फैक्ट्री से क्या-क्या मिला?
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम इंदौर पहुंची और छापेमारी की। वहां से बरामद हुए—
- नोट प्रिंटिंग मशीन
- हाई सिक्योरिटी पेपर
- विशेष प्रिंटिंग केमिकल
- सिक्योरिटी धागा
- कटिंग मशीन
- आधी और पूरी छपी हुई नकली नोट शीटें
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नकली नोटों में इतने बारीक फीचर डाले जा रहे थे कि आम आदमी को उनकी पहचान करना मुश्किल था, हालांकि रिज़र्व बैंक की उन्नत सुरक्षा तकनीक की पूरी नकल करना संभव नहीं था।
गौरतलब है कि आरोपी हिमांशु पहले भी इंदौर में नकली नोटों से जुड़े एक मामले में जेल जा चुका है। उसके खिलाफ उज्जैन और इंदौर दोनों जगह आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद हैं।
नेटवर्क की जांच तेज
पुलिस का मानना है कि यह पूरा गैंग एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जो प्रदेश के कई जिलों में नकली करंसी फैलाने का काम कर रहा है। इस कारण पुलिस अब डिजिटल उपकरणों, मोबाइल चैट, बैंक डिटेल और पूरे गैंग के संभावित लिंक की जांच कर रही है।
दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना चिमनगंज मंडी में गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और उन्हें रिमांड पर लेकर आगे पूछताछ की जा रही है।
नीमच में भी गिरोह का भंडाफोड़
इसी बीच, नीमच पुलिस ने भी नकली करंसी चलाने वाले एक गिरोह को पकड़ा है। यहां सरजना गांव से ईश्वर खारोल नाम के आरोपी को 50 हजार रुपये के नकली नोटों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। वह कलर प्रिंटर से तैयार नकली 500 रुपये के नोट पेट्रोल पंपों और छोटे दुकानदारों पर चलाने की कोशिश कर रहा था।
हालांकि गिरोह का मास्टरमाइंड सुनील बैरागी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। उसकी तलाश में विशेष टीमें तैनात हैं। नीमच पुलिस का कहना है कि वे इस पूरे नेटवर्क के पीछे किसका हाथ है, यह पता लगाने के लिए जांच को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
निष्कर्ष
उज्जैन और नीमच की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में नकली करंसी का नेटवर्क सक्रिय है और बड़े स्तर पर फेक नोट तैयार कर बाजार में फैलाए जा रहे हैं। पुलिस की समय रहते हुई कार्रवाई से लाखों रुपये के नकली नोट चलने से पहले ही पकड़े गए, लेकिन इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड और नेटवर्क को पकड़ना अब सबसे बड़ी चुनौती है।

