🟠 Quick Highlights

  • सरस्वती शिशु मंदिर पंचमूर्ति नगर में हुआ भव्य वार्षिकोत्सव
  • नन्हे बच्चों ने भक्ति गीतों और नृत्य से दर्शकों का मन जीता
  • मुख्य अतिथि कीर्तिश धामारीकर शास्त्री और शिक्षाविद माया फणसे रहे उपस्थित
  • पूर्व छात्रों ने सुंदरकांड गायन से समां बांधा
  • विद्यालय की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रकाश

📌 विस्तृत खबर

इंदौर। सरस्वती शिशु मंदिर, पंचमूर्ति नगर में आयोजित वार्षिकोत्सव इस वर्ष बेहद आकर्षक और यादगार रहा। कार्यक्रम में भारतीय गौरव और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। मंच पर जैसे ही नन्हे विद्यार्थियों ने भक्ति गीतों और बाल-सुलभ नृत्य प्रस्तुत किए, वैसे ही उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सहकार भारती इंदौर महानगर के महामंत्री कीर्तिश धामारीकर शास्त्री और विद्यालय की प्रधानाचार्य मंजू प्रजापति ने दीप प्रज्वलित कर किया।

मुख्य अतिथि कीर्तिश धामारीकर शास्त्री ने बच्चों की धार्मिक एवं शैक्षणिक गुणवत्ता की प्रशंसा करते हुए कहा कि—
“आधुनिक विज्ञान की शिक्षा के साथ वैदिक साहित्य का अध्ययन आज की आवश्यकता है।”
उन्होंने विद्यालय के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए बच्चों के समग्र विकास की दिशा में इसे उत्कृष्ट पहल बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं शिक्षाविद माया फणसे ने कहा कि माता-पिता बच्चों के संस्कारों की पहली पाठशाला हैं। प्रेरक कहानियाँ और उचित मार्गदर्शन बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानाचार्य मंजू प्रजापति ने विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अकादमिक गतिविधियों और नैतिक शिक्षा पर आधारित कार्यक्रमों की जानकारी दी।

पूर्व छात्रों ने किया शानदार सुंदरकांड गायन

कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रही विद्यालय के पूर्व छात्रों—
देवेंद्र राठौर, रमन राठौर, नवीन साखरे और मनीष जगताप—
द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सुंदरकांड गायन। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित सभी अभिभावकों और अतिथियों के मन में अमिट छाप छोड़ी और माहौल भक्तिमय बना दिया।

संचालन अंजली भद्रावले ने किया, स्वागत लक्षिता सैनी ने किया और आभार आचार्य पिंकी वर्मा ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम के फोटोग्राफ और वीडियो विद्यालय द्वारा संलग्न किए गए हैं।


🟢 निष्कर्ष

सरस्वती शिशु मंदिर का वार्षिकोत्सव सांस्कृतिक, शिक्षात्मक और आध्यात्मिक मूल्यों का उत्कृष्ट संगम रहा। नन्हें बच्चों की प्रतिभा, पूर्व छात्रों की प्रस्तुतियाँ और अतिथियों के प्रेरक संदेशों ने इस कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।

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