🟡 Quick Highlights
- इंदौर में एक मिस्त्री ने खुदकुशी की, परिजनों ने लगाया BLO पर दबाव बनाने का आरोप
- मृतक सुनील सोलंकी पर वोटर लिस्ट की जानकारी देने के लिए बार-बार फोन आता था
- परिवार का दावा—कॉल्स ने मानसिक तनाव बढ़ाया, इसी दबाव में उठाया खौफनाक कदम
- पुलिस ने मामला दर्ज कर पोस्टमार्टम कराया, जांच जारी
- वोटर-लिस्ट संशोधन (SIR) के दौरान बढ़ते दबाव पर फिर उठे सवाल
🟠 360 विश्लेषण
इंदौर में वोटर लिस्ट संशोधन ( SIR ) के काम के दौरान एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शहर के 36 वर्षीय मिस्त्री सुनील सोलंकी ने आत्महत्या कर ली, और परिवार सीधे तौर पर BLO को जिम्मेदार ठहरा रहा है। दावा है कि सुनील पर लगातार मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी देने का दबाव बनाया जा रहा था। बार-बार फोन, बार-बार पूछताछ—परिजनों के मुताबिक, उसने कई बार कहा था कि “दिमाग खराब हो रहा है, बहुत झंझट है।”
घटना उस समय सामने आई जब सुनील नशे की हालत में देर रात घर आया और अचानक खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। परिजन तुरंत उसे अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने बचा नहीं पाए। पुलिस ने केस दर्ज कर पोस्टमार्टम करवाया है, जबकि परिजनों के बयान लिए जा रहे हैं।
यह कोई अलग मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में मध्य प्रदेश ही नहीं, देश भर से BLO और फील्ड-वर्करों पर बढ़ते दबाव की शिकायतें आ रही हैं। खासकर SIR (Special Intensive Revision of Voter List) के दौरान लगातार घर-घर verifications, फोन कॉल्स, डेटा अपडेट्स और समय-सीमा के कारण वर्कर्स मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के तनाव का सामना कर रहे हैं। कई राज्यों में BLO की मौत और आत्महत्या जैसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें परिवारों ने काम के दबाव पर सीधे सवाल उठाए थे।
सुनील के मामले में वह आधिकारिक BLO नहीं था, लेकिन परिजनों के मुताबिक उसे फील्ड-टीम की तरह जानकारी देने के लिए बार-बार दबाव डाला जा रहा था। यह सवाल उठाता है कि क्या चुनावी कार्यों में शामिल हर व्यक्ति को सही प्रशिक्षण, समय और व्यवहार मिल रहा है? आखिर ऐसी नौबत क्यों आती है कि कोई सामान्य नागरिक भी खुद को इतना दबाव में महसूस करे?
प्रशासन के सामने अब दो बड़े सवाल खड़े हैं—
पहला, वोटर-लिस्ट संशोधन की प्रक्रिया में फील्ड स्तर पर काम का बोझ क्या इंसानी सीमाओं से बाहर निकल चुका है?
दूसरा, क्या किसी भी तरह की शिकायत या मानसिक तनाव की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए कोई हेल्पलाइन या सपोर्ट सिस्टम मौजूद है?
फिलहाल पुलिस की जांच का इंतजार है, लेकिन घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि चुनावी काम सिर्फ टेक्निकल प्रोसेस नहीं, बल्कि संवेदनशील मानव प्रणाली भी है, जिसे संभालने के लिए सही सोच, सही व्यवहार और सही सपोर्ट बेहद जरूरी है।
🟢 निष्कर्ष
इंदौर की यह घटना वोटर-लिस्ट संशोधन प्रक्रिया की ज़मीन हकीकत दिखाती है। आंकड़ों व फार्मों के बीच असली लोग काम करते हैं—जिन पर पड़ने वाला दबाव कई बार उनकी जिंदगी पर भारी पड़ जाता है। सुनील सोलंकी की मौत ने एक बार फिर यही सच सामने रखा है कि प्रशासन को काम का बोझ, समय-सीमा और फील्ड-वर्करों की मानसिक स्थिति को गंभीरता से लेना ही होगा।

