Quick Highlights
- 1 जनवरी 2026 से महाकाल मंदिर में नई व्यवस्थाएं लागू होंगी
- पुजारी-सेवकों के लिए ड्रेस कोड और ID कार्ड अनिवार्य
- शिवलिंग पर भारी मालाएं सीधे चढ़ाने पर रोक
- दान, शीघ्र दर्शन और प्रसाद पूरी तरह डिजिटल होंगे
- भस्म आरती और दर्शन प्रणाली में भी बड़ा बदलाव
360 विश्लेषण
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने 2026 से कई अहम व्यवस्थागत बदलाव करने का निर्णय लिया है। इन बदलावों का मकसद केवल व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि भगवान महाकाल की मर्यादा, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को संतुलित रखना है।
सबसे पहला बड़ा बदलाव पंडे-पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों की पहचान व्यवस्था से जुड़ा है। 1 जनवरी 2026 से मंदिर में कार्यरत हर पुजारी, सेवक और कर्मचारी को निर्धारित ड्रेस कोड और पहचान पत्र (ID Card) पहनना अनिवार्य होगा। इससे यह स्पष्ट रहेगा कि कौन अधिकृत सेवक है और कौन नहीं। लंबे समय से श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही अव्यवस्था और अवैध वसूली की शिकायतों को रोकने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
दूसरा महत्वपूर्ण फैसला शिवलिंग की सुरक्षा को लेकर लिया गया है। अब श्रद्धालु भारी फूलों या धातु से बनी मालाएं, जिन्हें आम भाषा में अजगर माला कहा जाता है, सीधे शिवलिंग पर अर्पित नहीं कर सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार इन भारी मालाओं से शिवलिंग को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। आगे से ऐसी मालाएं मंदिर समिति के माध्यम से विधिवत अर्पित कराई जाएंगी।
मंदिर में होने वाले दान, शीघ्र दर्शन और प्रसाद व्यवस्था को भी पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। QR कोड आधारित भुगतान प्रणाली लागू होगी, जिससे धन सीधे मंदिर ट्रस्ट के खाते में जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
भस्म आरती को लेकर भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। खासतौर पर 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक, जब श्रद्धालुओं की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है, उस दौरान भस्म आरती और दर्शन प्रणाली में अस्थायी बदलाव रहेंगे। चलायमान दर्शन व्यवस्था लागू होगी ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़ा कदम उठाया गया है। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अब एक नई, प्रशिक्षित एजेंसी को सौंपी जाएगी। CCTV, कंट्रोल रूम, प्रवेश-निकास मार्ग और भीड़ नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
निष्कर्ष
महाकाल मंदिर में लागू होने वाले ये बदलाव यह साफ संकेत देते हैं कि अब श्रद्धा के साथ व्यवस्था और पारदर्शिता को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। 2026 से महाकाल के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को एक अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक अनुभव मिलेगा, जबकि भगवान शिवलिंग की मर्यादा और संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

