ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के समापन से ठीक पहले एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया। जब अमित शाह रवाना होने के लिए वाहन में बैठ चुके थे, तभी उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा को अलग से पास बुलाया और कुछ देर बातचीत की।
यह संवाद भले ही समय में छोटा था, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बड़े माने जा रहे हैं।


क्या था पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अमित शाह जैसे ही प्रस्थान की तैयारी में थे, तभी अचानक गाड़ी का दरवाज़ा खुला और नरोत्तम मिश्रा को पास बुलाया गया। शाह और मिश्रा के बीच कुछ क्षणों तक बातचीत हुई। इस दौरान मिश्रा लगातार सहमति जताते हुए नजर आए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बातचीत किसी अहम विषय पर थी। मौजूद थे ये दिग्गज नेता इस दौरान वाहन में मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद थे। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ यह संवाद अपने-आप में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बातचीत के शब्द सार्वजनिक नहीं अमित शाह और नरोत्तम मिश्रा के बीच हुई बातचीत के शब्द सामने नहीं आए हैं, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह संदेश संगठन और सरकार से जुड़ी किसी महत्वपूर्ण रणनीति या आगामी जिम्मेदारी से संबंधित हो सकता है। भाजपा के भीतर इसे संकेतात्मक संवाद के तौर पर देखा जा रहा है।


राजनीतिक संकेत क्या कहते हैं
विश्लेषकों के अनुसार— यह संवाद पार्टी के अंदर भूमिकाओं और दायित्वों को लेकर हो सकता है।
आने वाले समय में संगठनात्मक या राजनीतिक फैसलों की भूमिका तय करने का संकेत भी माना जा रहा है।
कम समय में, कम शब्दों में दिया गया संदेश अक्सर बड़े निर्णयों की भूमिका बनता है।


क्यों खास माना जा रहा है यह मुलाकात
अमित शाह का यूं सार्वजनिक रूप से नरोत्तम मिश्रा को अलग बुलाकर बात करना सामान्य शिष्टाचार से आगे की घटना मानी जा रही है। यही वजह है कि इस मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में अटकलें तेज हैं और हर नजर इसके निहितार्थों पर टिकी हुई है।


निष्कर्ष:
ग्वालियर में हुआ यह छोटा-सा संवाद आने वाले दिनों में भाजपा की राजनीति में किसी बड़े कदम की आहट माना जा रहा है। फिलहाल, संदेश भले ही गोपनीय हो, लेकिन इसकी गूंज सियासी हलकों में साफ सुनाई दे रही है।

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