Quick Highlights

  • वैश्विक अप्रत्याशितता के बीच भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीति की निरंतरता का माहौल है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को निवेश और विकास के लिए भरोसेमंद केन्द्र के रूप में पेश किया।
  • उनका कहना है कि भारत तेजी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है।

360 विश्लेषण

दुनिया आज कई तरह की भारी अनिश्चितताओं से जूझ रही है — भू-राजनीति, बैलेंस ऑफ पावर, आर्थिक मंदी के जोखिम और ग्लोबल मार्केट के फड़फड़ाते ग्राफ इसे एक चुनौतीपूर्ण समय बनाते हैं। लेकिन इसी पृष्ठभूमि में भारत एक अलग कहानी लिख रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा कि दुनिया जहां “विश्वव्यापी अनिश्चितता” का सामना कर रही है, वहीं भारत एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुका है जहां उसे ‘अभूतपूर्व निश्चितता’ हासिल है।

इस निश्चितता की बुनियाद मोदी के मुताबिक़ राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत निरंतरता और मजबूत आर्थिक प्रक्षेपण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और वह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मोदी ने यह बात निवेशकों के लिए भी अपील के रूप में कही — उन्होंने कहा कि भारत में स्थिर और पूर्वानुमानित वातावरण ने देश को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है। इससे पता चलता है कि शासन-प्रशासन का फोकस सिर्फ नीति बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उसे निरंतर लागू करने तक भी है।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से देश की विशाल मध्य-वर्ग की बढ़ती क्रय शक्ति, डिजिटल भुगतान जैसे UPI का वैश्विक स्तर पर मान्यता, और स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी भूमिका का जिक्र किया — जिससे यह स्पष्ट होता है कि “सुनिश्चितता” सिर्फ शब्द नहीं, आंकड़ों और अवसरों से भी जुड़ी है।

यह दावा तभी मजबूत लगता है जब IMF और रेटिंग एजेंसियों जैसे S&P तथा Fitch ने भारत की आर्थिक स्थिरता और निवेशक विश्वास को भी विदेशों में मान्यता दी है, जिससे भारत दूर-दूर तक भरोसे के पर्याय के रूप में उभर रहा है।


निष्कर्ष

आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के बीच जूझ रही है, भारत स्थिरता, नीति निरंतरता और आर्थिक संभावना के संकेतों के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के बयान के मुताबिक़ यह “अभूतपूर्व निश्चितता” सिर्फ भाषण नहीं है, बल्कि विकास के ठोस आंकड़ों, निवेश आकर्षण और राष्ट्रीय आत्म-विश्वास का प्रतिबिंब भी है।

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