Quick Highlights

  • राहुल गांधी 17 जनवरी को इंदौर का दौरा करेंगे
  • भागीरथपुरा में दूषित पानी से प्रभावित परिवारों से मिलेंगे
  • कांग्रेस प्रदेशभर में उपवास और विरोध प्रदर्शन करेगी
  • मनरेगा में बदलाव और दूषित जल को लेकर सरकार पर निशाना

360 विश्लेषण

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद सियासत लगातार गरमाती जा रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जनवरी को इंदौर पहुंच रहे हैं। वह यहां भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका दर्द सुनेंगे और मौके की वास्तविक स्थिति जानेंगे।

राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब इंदौर में दूषित पानी के कारण 23 लोगों की मौत हो चुकी है और कई परिवार अब भी बीमारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कांग्रेस इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बता रही है और भाजपा सरकार को लगातार घेर रही है।

सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि इसी दिन प्रदेश के सभी 71 संगठनात्मक जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उपवास और विरोध प्रदर्शन भी होगा। यह आंदोलन मनरेगा कानून में बदलाव, उसके नाम परिवर्तन और राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ के खिलाफ भी होगा। पार्टी का कहना है कि इन बदलावों से गरीबों के काम के कानूनी अधिकार पर असर पड़ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने 17 से 31 जनवरी तक एक विस्तृत आंदोलन की रूपरेखा तय की है, जिसमें दूषित जल से हुई मौतों, पानी की गुणवत्ता और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाएगा।

इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि वह आपदा में राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लाशों पर राजनीति कर रही है, जबकि सरकार समाधान पर काम कर रही है। इस बयान के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।


निष्कर्ष

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा अब स्थानीय से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन चुका है। राहुल गांधी का दौरा कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक दांव है, जबकि सरकार इसे राजनीति से जोड़कर खारिज कर रही है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होगा, और इसका असर प्रदेश की सियासत पर साफ दिखाई देगा।

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