🔹 Quick Highlights
- भारत के केंद्रीय बजट 2026-27 में विदेश सहायता (Foreign Aid) में महत्वपूर्ण बदलाव
- बांग्लादेश को मिलने वाली वित्तीय सहायता में भारी कटौती
- भूटान को सबसे ज्यादा सहायता, नेपाल, श्रीलंका समेत अन्य को बढ़ी राशि
- चाबहार पोर्ट परियोजना के लिए कोई फंड नहीं
- विदेश सहायता का कुल आवंटन लगभग ₹5,686 करोड़ रखा गया है
🔹 360 विश्लेषण
केंद्रीय बजट 2026-27 में विदेश सहायता की दिशा में बड़े बदलाव देखे गए हैं, जो भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों की जियो-पॉलिटिकल तस्वीर को साफ दिखाते हैं।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि भारत ने बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक सहायता लगभग आधी कर दी है — पहले के बजट में इसमें ₹120 करोड़ का प्रावधान था, जिसे इस बार ₹60 करोड़ तक घटा दिया गया है। यह कटौती कुछ विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है, खासकर बांग्लादेश में राजनीतिक परिस्थितियों और द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर।
दूसरी तरफ, भूटान को सबसे बड़ी सहायता दी जाएगी, जिसका आवंटन लगभग ₹2,288 करोड़ रखा गया है — यह इस बात का संकेत है कि भारत अपनी “Neighbourhood First” नीति के तहत भूटान के साथ मजबूत और रणनीतिक साझेदारी बनाए रखना चाहता है। नेपाल और श्रीलंका को भी पिछले बजट की तुलना में अधिक सहायता देने की योजना है।
इसके अलावा, ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए इस बार कोई राशि आवंटित नहीं की गई, जबकि पिछले बजट में इसके लिए कुछ राशि मौजूद थी। चाबहार एक ऐसा रणनीतिक प्रोजेक्ट है जो भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच में मदद देता है, लेकिन बदलते वैश्विक परिस्थिति और प्रतिबंधों के कारण इस बार फंडिंग शून्य कर दी गई है।
कुल मिलाकर, बजट में विदेश सहायता की कुल राशि को लगभग ₹5,686 करोड़ तक रखा गया है, जो पिछले अनुमान के मुकाबले थोड़ा बढ़ा है, लेकिन इसमें स्ट्रैटेजिक प्राथमिकताओं के अनुसार मजबूती और कटौती दोनों दिखाई दे रहे हैं।
🔹 निष्कर्ष
इस बजट से साफ संकेत मिलता है कि भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक प्राथमिकताओं और बदलते द्विपक्षीय संबंधों के हिसाब से आर्थिक सहायता को री-कैलिब्रेट कर रहा है। भूटान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों को प्राथमिकता देना भारत की “Neighbourhood First” नीति को क्रियान्वित करता है, जबकि बांग्लादेश के लिए सहायता में कटौती वर्तमान राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ का प्रतिबिंब है। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए फंड न होना भी वैश्विक रणनीति और प्रतिबंधों के प्रभाव को दिखाता है।

