🔴 Quick Highlights
- भाजपा आजीवन सहयोग निधि अभियान में नकद चंदा पूरी तरह बंद
- दिल्ली मुख्यालय से सभी राज्यों को सख्त निर्देश
- अब 1 रुपये की राशि भी केवल चेक या डिजिटल माध्यम से ली जाएगी
- चंदा कलेक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाले कूपन की छपाई पर रोक
- इंदौर में इस बार 11 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य
🧠 360 विश्लेषण
भारतीय जनता पार्टी ने अपने आजीवन सहयोग निधि अभियान को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। पार्टी के भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली मुख्यालय से सभी राज्यों को निर्देश जारी किए गए हैं कि अब अभियान के तहत कोई भी राशि नकद नहीं ली जाएगी, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो।
अब तक पार्टी में यह व्यवस्था थी कि 20 हजार रुपये से अधिक की राशि चेक से ली जाती थी, जबकि इससे कम रकम के लिए कूपन सिस्टम लागू था। प्रदेश संगठन कूपन छपवाकर कार्यकर्ताओं को देता था, जिसके जरिए व्यापारियों, उद्योगपतियों और आम लोगों से सहयोग राशि जुटाई जाती थी।
लेकिन अब इस व्यवस्था पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया गया है। दिल्ली मुख्यालय के निर्देशानुसार, अब हर राशि चेक या डिजिटल पेमेंट के जरिए ही पार्टी के खाते में जमा होगी। इसके साथ ही कूपन की छपाई पर भी तत्काल रोक लगा दी गई है।
इंदौर में इस बार पार्टी संगठन ने 11 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में अचानक आए इस आदेश ने प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं को नई कार्ययोजना बनाने पर मजबूर कर दिया है। संगठन सूत्रों के मुताबिक, यह आदेश सभी राज्यों में समान रूप से लागू होगा। फिलहाल लिखित निर्देश का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद यह तय होगा कि आगे चंदा किस प्रक्रिया से लिया जाएगा।
⚠️ “चेक सिस्टम” से बढ़ेंगी दिक्कतें
हालांकि पार्टी के अंदर ही इस फैसले को लेकर व्यावहारिक परेशानियों की भी बात कही जा रही है। आजीवन सहयोग निधि अभियान से जुड़े भाजपा नेताओं का मानना है कि चेक लेने से वर्कलोड काफी बढ़ जाएगा।
हर चेक का रिकॉर्ड रखना, बैंक में जमा करना, क्लीयरेंस देखना और अगर चेक बाउंस हो जाए तो संबंधित व्यक्ति से दोबारा संपर्क करना — यह सब अतिरिक्त जिम्मेदारी बन जाएगा। पिछले वर्षों में कई बार चेक बाउंस होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कार्यकर्ताओं को बार-बार संबंधित लोगों के चक्कर काटने पड़े थे।
कूपन व्यवस्था में 20 हजार रुपये तक की राशि पर यह झंझट नहीं रहती थी और कागजी काम भी कम होता था। ऐसे में अब नया सिस्टम संगठन के लिए पारदर्शी जरूर होगा, लेकिन मैदानी स्तर पर चुनौतीपूर्ण भी माना जा रहा है।
⚖️ निष्कर्ष
भाजपा का यह फैसला साफ संकेत देता है कि पार्टी अब फंड कलेक्शन में अधिकतम पारदर्शिता चाहती है। नकद चंदे और कूपन सिस्टम को बंद करना राजनीतिक दलों के फंडिंग मॉडल में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हालांकि पारदर्शिता के साथ-साथ यह भी सच है कि इस फैसले से संगठनात्मक स्तर पर काम का दबाव बढ़ेगा। अब देखना यह होगा कि प्रदेश संगठन इस नए सिस्टम को जमीन पर कितनी आसानी से लागू कर पाता है और 11 करोड़ का लक्ष्य कैसे पूरा होता है।

