🔹 Quick Highlights:
- 85 वार्डों में सड़कों, ड्रेनेज और स्ट्रीट लाइट्स का सुधार
- वार्ड 82 से शुरू हुई डिजिटल एड्रेस प्रणाली – पूरे शहर में विस्तार की तैयारी
- सुदामा नगर की वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइन बदली गई
- नगर निगम ने 3 वर्षों में 1000+ से अधिक छोटे-बड़े विकास कार्य पूरे किए
- महापौर बोले – “विकास की रफ्तार रुकेगी नहीं”
देखें विडियो
🎙 खबर का 360 डिग्री एंगल :
तीन साल पहले जब पुष्यमित्र भार्गव ने इंदौर महापौर पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने कहा था – “यह शहर स्मार्ट ही नहीं, सबसे सरल और सुरक्षित बनेगा।” आज, 2025 में उनके कार्यकाल के 3 साल पूरे हो चुके हैं, और आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने सिर्फ घोषणाएं नहीं, ज़मीन पर काम भी करके दिखाया है।
सबसे बड़ा बदलाव देखा गया है वार्ड स्तर पर बुनियादी ढांचे में। सड़कों का चौड़ीकरण, ड्रेनेज सिस्टम का कायाकल्प, स्ट्रीट लाइट्स को एलईडी में बदला जाना, और बाग-बग़ीचों का रख-रखाव – ये सब सिर्फ दिखावे के लिए नहीं थे। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार 85 वार्डों में करीब 1800 से ज़्यादा सड़कों की मरम्मत या निर्माण किया गया।
🏗 सुदामा नगर – जहां ड्रेनेज लाइन ने सालो बाद करवट ली
वार्ड 82, यानी सुदामा नगर की वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइन हमेशा से बरसात में आफत बनती थी। गड्ढे, ओवरफ्लो और बदबू ने लोगों को जीना मुश्किल कर रखा था। लेकिन इस साल निगम ने लगभग ₹2.3 करोड़ की लागत से पूरी पाइपलाइन सिस्टम को बदला। नई लाइन अब जलभराव की समस्या से निजात दिला रही है।
💡 डिजिटल एड्रेस – अब GPS की तरह घर की पहचान
इंदौर ने डिजिटल इंडिया के सपने को और आगे बढ़ाया है। महापौर ने वार्ड 82 से एक अनोखी योजना की शुरुआत की – Digital Address Tagging System। हर मकान को एक यूनिक डिजिटल कोड दिया जा रहा है, जिसे मोबाइल ऐप के ज़रिए स्कैन किया जा सकता है।
📈 विकास सिर्फ दिखावा नहीं – डेटा भी बोल रहा है
पिछले 3 वर्षों में नगर निगम की ओर से इन कार्यों पर फोकस रहा:
- 2850+ LED स्ट्रीट लाइट्स इंस्टॉल
- 900 से अधिक ड्रेनेज में सुधार
- 42 बाग-बग़ीचों का जीर्णोद्धार
- वार्डों में 60+ डिजिटल सूचना डिस्प्ले लगाए गए
महापौर कार्यालय के अनुसार, यह सब कुछ पारदर्शी प्रक्रिया से हुआ। e-Tendering और geo-tagging जैसी तकनीकों का उपयोग कर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिश की गई।
🗣️ महापौर का दावा – “ये तो सिर्फ शुरुआत है”
पुष्यमित्र भार्गव का कहना है:
“अभी तो बहुत कुछ बाकी है। आने वाले महीनों में हम शहर की हर गली को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना पर काम कर रहे हैं। इंदौर सिर्फ साफ नहीं, स्मार्ट भी बने – यही लक्ष्य है।
🧹 स्वच्छता में नंबर 1 – इंदौर का जनआंदोलन
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में इंदौर ने स्वच्छता में आठवी बार नंबर 1 का ताज बरकरार रखा। शहर में 100% डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, गीले-सूखे कचरे का अलग संग्रहण और जीपीएस आधारित गाड़ियों की निगरानी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की गईं।
‘ज़ीरो डस्टबिन ज़ोन’ मॉडल को पूरे शहर में फैलाया गया, जिससे सार्वजनिक डस्टबिन हटाकर सफाई की आदत को घर-घर तक पहुंचाया गया। QR कोड से सफाई पर फीडबैक लेना, बायो-CNG प्लांट से कचरे को संसाधित करना और दीवारों पर थीम-आधारित पेंटिंग – ये सब इंदौर को सिर्फ साफ़ ही नहीं, सुंदर भी बना रहे हैं।
महापौर का सीधा फोकस “सफाई सिर्फ निगम की नहीं, शहर की ज़िम्मेदारी” पर रहा – और जनता ने इस सोच को पूरे दिल से अपनाया।
🧾 निष्कर्ष (Conclusion)
इंदौर विकास के उस पथ पर है जहां प्रशासन और नागरिकों का तालमेल दिख रहा है। पुष्यमित्र भार्गव के 3 सालों के कार्यकाल में ‘काम की राजनीति’ को थोड़ी गंभीरता से लिया गया। जहां सड़कों और ड्रेनेज के सामान्य काम भी अब तकनीक से हो रहे हैं, वहीं डिजिटल एड्रेस जैसी योजनाएं इंदौर को भविष्य के शहरों की कतार में खड़ा कर रही हैं।
अब बस ये देखना है कि अगले 2 साल में यह गति और पारदर्शिता बनी रहती है या नहीं।


[…] यह भी पढ़ें : https://360newstoday.in/3-years-of-indore-mayor/ […]