shivraj singh chauhan

अमेरिका के साथ बढ़ते टैरिफ विवाद और पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण हालात के बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में ऐसे बयान दिए हैं जो भारत की मौजूदा आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति पर सरकार की साफ़ रणनीति को दिखाते हैं। उनका कहना है कि भारत किसानों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा, चाहे सामने अमेरिका हो या पाकिस्तान।


अमेरिका के टैरिफ फैसले पर सीधा जवाब

अमेरिका ने हाल ही में भारतीय कृषि उत्पादों, खासकर चावल, दाल, मसाले और कुछ अन्य निर्यात वस्तुओं पर 50% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह कदम वैश्विक व्यापार में दबाव बढ़ाने जैसा माना जा रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने साफ़ कहा—

“हम अमेरिका के दबाव में आने वाले नहीं हैं। किसानों के हित सर्वोपरि हैं, और हम उनके लिए नए बाज़ार तलाशेंगे।”

चौहान ने भरोसा जताया कि भारत का 144 करोड़ जनसंख्या वाला घरेलू बाजार इतना बड़ा है कि अगर निर्यात पर दबाव भी आए, तो भी किसानों की उपज देश के भीतर खपाई जा सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के पास कई देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते हैं, और अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने के बावजूद, एशिया, अफ्रीका और मिडल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों की बड़ी मांग बनी रहेगी।


अमेरिकी कृषि व्यवस्था पर तंज

अमेरिकी किसानों और भारतीय किसानों के बीच तुलना करते हुए चौहान ने कहा कि अमेरिका में एक किसान के पास औसतन 10–15 हज़ार हेक्टेयर जमीन होती है और वे जेनेटिकली मॉडिफाइड बीजों के जरिए कम लागत में अधिक उत्पादन कर पाते हैं। वहीं, भारत में एक किसान के पास औसतन 1–3 एकड़ जमीन होती है और उत्पादन लागत अधिक है। उन्होंने यह इशारा भी किया कि अमेरिकी टैरिफ नीतियां भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा से बाहर करने की कोशिश हैं, लेकिन भारत इससे पीछे नहीं हटेगा।


पाकिस्तान पर कड़ा रुख

अमेरिका पर बयान देने के तुरंत बाद, शिवराज सिंह चौहान ने पाकिस्तान को लेकर भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने सिंधु जल संधि का जिक्र करते हुए कहा कि 1960 में हुआ यह समझौता एक “ऐतिहासिक गलती” थी, जिसमें भारत ने अपनी नदियों के पानी का 80% हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया।
चौहान ने कहा—

“अब यह पानी पाकिस्तान नहीं, बल्कि हमारे किसानों के खेतों में जाएगा। हमारा पानी, हमारे किसान, हमारा फायदा।”

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी गतिविधियां और सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ भेजने की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता रहेगा, भारत उसके लिए अपने प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल नहीं करेगा।


Operation Sindoor और सुरक्षा का भरोसा

हाल ही में भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों पर बड़ी कार्रवाई की। इस पर बोलते हुए चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने उनका जवाब “खिलौनों की तरह” दे दिया।
उन्होंने किसानों और नागरिकों को भरोसा दिलाया कि देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न, फल, सब्जियां और अनाज का भंडार मौजूद है। किसी भी आपात स्थिति में भी देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।


किसानों के लिए स्पष्ट संदेश

अमेरिका और पाकिस्तान दोनों को लेकर चौहान का बयान एक ही लाइन में सिमटता है—“किसानों के हित से कोई समझौता नहीं।” उन्होंने किसानों से कहा कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। चाहे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक दबाव हो या सीमा पार से आने वाले खतरे, भारत अपनी कृषि उत्पादन क्षमता और बाजारों की मजबूती से दोनों चुनौतियों का सामना करेगा।


विश्लेषण: भारत की दोहरी रणनीति

अगर चौहान के इन बयानों को ध्यान से देखा जाए तो साफ़ है कि सरकार एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है—

  1. अमेरिका के टैरिफ वार का जवाब नए बाजारों और घरेलू खपत के जरिए देना।
  2. पाकिस्तान पर दबाव डालते हुए संसाधनों का इस्तेमाल केवल भारत के हित में करना।

अमेरिका के साथ यह टकराव लंबा खिंच सकता है, लेकिन भारत का घरेलू बाजार और वैकल्पिक निर्यात गंतव्य इस दबाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के संदर्भ में सरकार का रुख पूरी तरह सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर आधारित है।

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निष्कर्ष

शिवराज सिंह चौहान के हालिया बयानों से एक बात बिल्कुल साफ़ है—भारत न तो अमेरिकी आर्थिक दबाव के आगे झुकेगा और न ही पाकिस्तान को अपने संसाधनों का लाभ उठाने देगा। किसानों के हित, राष्ट्र की सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता—ये तीनों फिलहाल सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं। अमेरिका को संदेश है कि भारत अपने उत्पादों के लिए नए रास्ते ढूंढ सकता है, और पाकिस्तान को चेतावनी है कि आतंकवाद का रास्ता अपनाने पर उसे भारत के पानी की एक बूंद भी नहीं मिलेगी।

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