supreme court on bad roads

देश में हर रोज़ लाखों लोग नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं। टोल प्लाज़ा पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगती हैं और लोग उम्मीद करते हैं कि वे जिस सड़क का टोल भर रहे हैं, कम से कम उसकी हालत बेहतर होगी। लेकिन जब वही सड़क गड्ढों से भरी हो, जगह-जगह जाम लगे और घंटों सफर करने के बाद भी दूरी पूरी न हो पाए, तो स्वाभाविक है कि सवाल उठेंगे। इसी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट Supreme Court ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी की—“जब सड़क गाड़ी चलाने लायक नहीं, तो टोल वसूलना गलत है।”

यह फैसला सीधे तौर पर केरल हाई कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें त्रिशूर के पालयेक्कारा टोल प्लाज़ा से टोल वसूली चार हफ्तों के लिए निलंबित कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और टोल ऑपरेटर की अपील को खारिज कर दिया।


पृष्ठभूमि: पालयेक्कारा टोल विवाद

केरल के त्रिशूर जिले में एनएच-544 पर पालयेक्कारा टोल प्लाज़ा स्थित है। यह रास्ता कोच्चि से पलक्कड़ को जोड़ता है और दक्षिण भारत के सबसे व्यस्त हाईवेज़ में गिना जाता है। बीते महीनों से यहां हालात बिगड़ते जा रहे थे। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, अधूरे काम और लगातार ट्रैफिक जाम के चलते यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 65 किलोमीटर की दूरी तय करने में कभी-कभी 10-12 घंटे तक लग रहे थे। यात्रियों का कहना था कि वे रोज़ाना टोल के नाम पर 150 रुपये चुकाते हैं लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ जाम और गड्ढे ही मिलते हैं। स्थानीय लोगों और संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


हाई कोर्ट का रुख

6 अगस्त 2025 को केरल हाई कोर्ट ने जनता की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया। कोर्ट ने कहा कि जब तक सड़कें दुरुस्त नहीं हो जातीं और यात्रियों को सुविधाजनक सफर नहीं मिलता, तब तक टोल वसूली जायज़ नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने चार सप्ताह के लिए टोल वसूली को रोक दिया।

NHAI और टोल कंपनी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, यह कहते हुए कि टोल वसूली बंद करने से प्रोजेक्ट का वित्तीय ढांचा बिगड़ जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाई कोर्ट का फैसला सही ठहराया और एनएचएआई को कड़ी फटकार लगाई। चीफ़ जस्टिस बी.आर. गवई ने सुनवाई के दौरान साफ कहा:

  • “अगर एक घंटे की दूरी तय करने में 12 घंटे लग रहे हैं, तो कोई 150 रुपये क्यों देगा?”
  • “सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं और लोग जाम में फंसे रहते हैं। यह जनता के साथ अन्याय है।”
  • “सरकार और एजेंसियां यह न भूलें कि टोल टैक्स जनता की सुविधा के लिए लिया जाता है, न कि उन्हें परेशान करने के लिए।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता पहले ही टैक्स देकर सड़क बनाने में योगदान करती है, ऐसे में खराब सड़कों पर टोल लेना “डबल चार्जिंग” जैसा है।


जनता की तकलीफ़ बनाम प्रशासन की जिम्मेदारी

यह मामला सिर्फ केरल का नहीं है। देशभर में अक्सर देखा जाता है कि टोल प्लाज़ा पर मोटी रकम वसूली जाती है लेकिन सड़कें खराब रहती हैं। जगह-जगह जाम, अधूरे फ्लाईओवर और गड्ढों से भरे नेशनल हाईवे आम लोगों की परेशानी का कारण बनते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक तरह से प्रशासन को आईना दिखाया है। अब एजेंसियों को यह समझना होगा कि टोल सिर्फ वसूली का साधन नहीं है बल्कि यह जनता को बेहतर सुविधाएं देने का अनुबंध है।

supreme court

फैसले का असर

  1. NHAI पर दबाव – अब NHAI को सड़क सुधार कार्यों में तेजी लानी होगी।
  2. अन्य राज्यों में मिसाल – यह फैसला पूरे देश में टोल प्रबंधन पर असर डालेगा। जहां-जहां सड़कें खराब हैं, वहां जनता कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।
  3. जनता का विश्वास – आम लोग महसूस करेंगे कि उनकी आवाज़ अदालत तक पहुंचती है और उनके हक़ में फैसले हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय “पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन” को मजबूत करता है। यानी सरकार और उसकी एजेंसियां जनता के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी निभाएं। वहीं ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि खराब सड़क और लंबा जाम न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि प्रदूषण और दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ाते हैं।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक टोल प्लाज़ा तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश के लिए संदेश है कि जनता से वसूली तभी की जाए जब सुविधाएं दी जा रही हों। गड्ढों से भरी और घंटों का जाम झेलने वाली सड़कों पर टोल लेना अन्याय है।

आख़िरकार, टोल टैक्स का मकसद यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है। अगर यह मकसद ही पूरा नहीं हो रहा, तो वसूली का औचित्य भी ख़त्म हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी आने वाले दिनों में सड़क निर्माण एजेंसियों और टोल कंपनियों के लिए चेतावनी है कि जनता को हल्के में लेना अब आसान नहीं

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