road construction

इंदौर: शहर की पहचान भले ही साफ-सफाई और विकास के लिए देशभर में होती हो, लेकिन पंढरीनाथ, चंद्रभागा और जवाहर मार्ग पर रहने वाले लोग फिलहाल खुद को परेशानियों के दलदल में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। यहाँ सिर्फ 300 मीटर लंबी सड़क पिछले पाँच महीने से अधूरी पड़ी है। प्रशासन ने काम तो शुरू किया, लेकिन जैसे ही सड़क खोदी गई, उसके बाद से काम की रफ्तार “कछुआ गति” से भी धीमी हो गई।

रोजमर्रा की मुसीबत

सुबह से लेकर रात तक इस मार्ग से सैकड़ों गाड़ियाँ गुजरती हैं। लेकिन सड़क अधूरी होने के कारण रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। ऑफिस जाने वाले लोग, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी और यहाँ तक कि एम्बुलेंस जैसी जरूरी सेवाओं को भी लंबे समय तक फँसना पड़ता है।
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि प्रशासन ने काम शुरू करने से पहले यह भरोसा दिया था कि सड़क जल्द ही तैयार हो जाएगी। मगर पाँच महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है।

जाम और धूल से बेहाल लोग

खुदाई के बाद सड़क पर मिट्टी और गिट्टी का ढेर पड़ा हुआ है। छोटे वाहन चालक तो जैसे-तैसे निकल जाते हैं, लेकिन बड़े वाहन फँस जाते हैं और जाम की लंबी कतारें लग जाती हैं। दूसरी ओर, धूल का गुबार लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। आसपास के दुकानदार और घरों में रहने वाले लोग कहते हैं कि धूल की वजह से बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

ठेकेदार और प्रशासन पर सवाल

स्थानीय लोगों का गुस्सा ठेकेदार और नगर निगम की धीमी कार्यशैली पर है। लोगों का कहना है कि जब ठेके दिए जाते हैं तो तय समयसीमा भी तय होती है। फिर आखिर क्यों पाँच महीने बाद भी काम अधूरा है? काम की स्पीड देखकर तो लगता है कि पूरा होने में और कई महीने लग सकते हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि ठेकेदार एक साथ कई जगह काम शुरू कर देता है, लेकिन किसी को समय पर पूरा नहीं करता। नतीजा ये होता है कि शहरवासी ही परेशान होते हैं।

वैकल्पिक मार्गों की कमी

चंद्रभागा, पंढरीनाथ और जवाहर मार्ग शहर के पुराने और व्यस्त इलाके हैं। यहाँ से होकर रोज़ाना हजारों वाहन गुजरते हैं। मगर निर्माण कार्य अधूरा होने की वजह से वैकल्पिक रास्ते भी ज्यादा मदद नहीं कर पा रहे। गली-कूचों से गाड़ियाँ मोड़ी जाती हैं, लेकिन वहाँ इतनी भीड़ समाने की जगह ही नहीं है। नतीजा यह कि पूरा ट्रैफिक एक चौराहे से दूसरे तक घंटों फँसा रहता है।

रहवासियों की नाराज़गी

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी केवल घोषणाएँ करने में माहिर हैं। सड़क पर काम शुरू करवाकर फोटो खिंचवा ली जाती है, लेकिन आगे की फॉलो-अप नहीं होती।
एक दुकानदार ने कहा – “सिर्फ 300 मीटर सड़क है, इसे बनाने में पाँच महीने से ज्यादा लगना समझ से परे है। हमें लगता है कि शायद किसी की निगरानी ही नहीं है।”
एक अन्य रहवासी का कहना था कि बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुँच पाते, ऑफिस जाने वालों की डांट सुननी पड़ती है और मरीजों को अस्पताल ले जाने में खतरा बना रहता है।

मानसून का बहाना या लापरवाही?

काम धीमा होने पर अक्सर बारिश का बहाना सामने आता है। लेकिन यहाँ सवाल यह है कि जब सड़क खोदी ही थी तो काम को तेजी से क्यों नहीं पूरा किया गया? बारिश का सीजन तो हर साल आता है, मगर इस बार हालात ये हैं कि आधा साल बीतने को आया और सड़क का नामोनिशान तक नहीं है।

प्रशासन की जिम्मेदारी

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की समस्याएँ नगर निगम और निर्माण एजेंसी की ढिलाई से पैदा होती हैं। यदि नियमित मॉनिटरिंग हो और समय-समय पर ठेकेदार से जवाब-तलब किया जाए, तो काम इतनी देर तक अधूरा नहीं रह सकता।
जरूरत है कि संबंधित विभाग तुरंत प्रभाव से काम पूरा कराए, ताकि आम लोगों की परेशानी खत्म हो सके।


निष्कर्ष

इंदौर की यह अधूरी सड़क इस बात की मिसाल है कि छोटी-सी लापरवाही भी शहर के हज़ारों लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। पंढरीनाथ, चंद्रभागा और जवाहर मार्ग पर पाँच महीने से जमी धूल और रोज़ाना लगने वाले जाम केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि लोगों के धैर्य और सेहत की भी परीक्षा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक जागता है और इस “कछुआ गति” से चल रहे निर्माण कार्य को पूरा कराकर शहरवासियों को राहत देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *