Dhirendra Shastri

Quick Highlights

  • बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वऱ धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान
  • कहा – “हम रसखान को मानते हैं, अब्दुल कलाम को सलाम करते हैं”
  • लेकिन लव जिहाद को लेकर जताई चिंता
  • युवतियों से सतर्क रहने की अपील
  • समाज में बहुरूपियों पर कड़ी टिप्पणी

धीरेंद्र शास्त्री का बयान बना चर्चा का विषय

बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वऱ पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Shastri) अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। इस बार उन्होंने लव जिहाद (Love Jihad) को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज ऐसा है जहाँ रसखान के दोहे गाए जाते हैं, जहाँ हम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति को सलाम करते हैं। लेकिन इसी देश में कुछ ऐसे बहुरूपिये भी घूम रहे हैं जो बेटियों को जाल में फँसाकर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं।


“हम सम्मान करते हैं, लेकिन सावधान भी रहना होगा”

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचन के दौरान स्पष्ट कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से सभी को जोड़ने वाली रही है। हिंदू समाज ने सूफी संत रसखान की कविताओं को अपनाया है और अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्वों को आदर्श माना है। लेकिन, उनका कहना है कि “सम्मान का मतलब यह नहीं है कि हम आँख मूँदकर हर किसी पर भरोसा कर लें।”

उन्होंने युवतियों से अपील करते हुए कहा कि वे लव जिहाद जैसे खतरों से बचें। उनके अनुसार, आज देशभर में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहाँ नकली पहचान और छलावे के जरिए लड़कियों को फँसाया जा रहा है।


लव जिहाद पर चिंता

धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि “कई बेटियाँ भावनाओं में बहकर ऐसे रिश्तों में फँस जाती हैं, जिनका अंत अक्सर दुखद होता है।” उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन और झूठी पहचान के सहारे बेटियों का इस्तेमाल करना केवल एक लड़की की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की समस्या है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों हमारी बेटियाँ ही इन जालों में फँसती हैं? समाज को इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा और हर परिवार को अपनी बेटियों को शिक्षित और जागरूक करना होगा।


समाज को सतर्क रहने की जरूरत

बागेश्वर धाम सरकार ने यह भी कहा कि “आज जरूरत है कि बेटियाँ और उनके परिवार दोनों सावधान रहें। विश्वास करना गलत नहीं है, लेकिन आँख मूँदकर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है।” उन्होंने परिवारों से भी अपील की कि वे अपनी बेटियों को खुलकर बात करने का माहौल दें, ताकि वे गलत दिशा में न जाएँ।

उनका मानना है कि लव जिहाद कोई अफवाह नहीं, बल्कि वास्तविकता है, और इसे रोकने के लिए समाज को मिलकर काम करना होगा।


धर्म और संस्कृति की रक्षा पर जोर

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी सनातन संस्कृति से है। जब तक हमारी बेटियाँ सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक समाज मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे धर्म, संस्कृति और परंपरा को बचाने में अपनी भूमिका निभाएँ।

उन्होंने यह भी कहा कि समाज को किसी धर्म विशेष से नफरत करने की जरूरत नहीं है। “हम रसखान का आदर करते हैं, अब्दुल कलाम को आदर्श मानते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी आँखें बंद करके खतरों को नजरअंदाज करें।”


राजनीतिक बहस भी तेज

धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। एक पक्ष इसे समाज को जागरूक करने वाला संदेश मान रहा है, तो दूसरा पक्ष कह रहा है कि ऐसे बयानों से समाज में दूरी बढ़ सकती है। हालाँकि, शास्त्री ने साफ किया कि उनका मकसद किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि युवतियों को सतर्क करना है।

निष्कर्ष

धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि लव जिहाद का मुद्दा समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। वे कहते हैं कि हमें अपनी संस्कृति का सम्मान करना है, लेकिन साथ ही बेटियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क भी रहना होगा।

जहाँ एक तरफ उन्होंने रसखान और अब्दुल कलाम जैसी महान हस्तियों का सम्मान किया, वहीं दूसरी ओर उन बहुरूपियों की निंदा भी की जो छलावे के जरिए बेटियों की जिंदगी बर्बाद करते हैं।

आख़िरकार, संदेश यही है – सम्मान सबका हो, लेकिन सावधानी भी उतनी ही जरूरी है।

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