इंदौर आज राजनीतिक विरोध का गवाह बना। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी के महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ( BJP) महिला मोर्चा और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। लेकिन इस बार विरोध का दायरा सिर्फ पटवारी तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शन में उस हालिया घटना का मुद्दा भी उठाया गया, जिसमें बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द बोले गए थे। इस पूरे घटनाक्रम ने माहौल को और भी गर्मा दिया।
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जीतू पटवारी के बयान पर बवाल
कुछ दिन पहले जीतू पटवारी ने एक बयान देते हुए कहा था कि “मध्यप्रदेश की महिलाएं शराब सेवन में सबसे आगे हैं।” यह टिप्पणी तुरंत ही राजनीतिक हथियार बन गई और भाजपा ने इसे माताओं-बहनों का अपमान करार दिया। आंकड़ों की मानें तो राज्य में शराब सेवन करने वाली महिलाओं की दर बेहद कम है, जबकि पटवारी का बयान इससे बिलकुल उलट था। यही कारण है कि महिला मोर्चा ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना दिया और पटवारी से सार्वजनिक माफी की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लेकर इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करती है और समाज इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
बिहार की घटना ने भड़काया गुस्सा
इसी प्रदर्शन में दूसरा बड़ा मुद्दा भी जुड़ गया। हाल ही में बिहार में एक राजनीतिक सभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की गई थी। इस घटना ने भाजपा कार्यकर्ताओं और आम जनता की भावनाओं को गहराई से आहत किया। इंदौर के प्रदर्शन में इसे भी खुलकर उठाया गया। पोस्टर, नारे और भाषण—हर जगह यह साफ था कि लोग सिर्फ पटवारी के बयान पर ही नहीं, बल्कि पीएम की मां पर की गई अभद्र टिप्पणी के खिलाफ भी गुस्से में थे।
महिला मोर्चा की नेताओं ने कहा कि “मां” केवल प्रधानमंत्री की नहीं होती, बल्कि हर किसी के लिए सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक है। इस तरह के शब्द न सिर्फ मोदी परिवार का अपमान हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर भी चोट करते हैं।
भाजपा का पलटवार और सियासी गरमी
इंदौर का यह प्रदर्शन साफ तौर पर कांग्रेस पर दोतरफा हमला था। एक ओर पटवारी का बयान, दूसरी ओर बिहार की घटना—दोनों को जोड़कर भाजपा ने कांग्रेस पर “महिलाओं और मातृत्व का अपमान” करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष मुद्दों की कमी से जूझ रहा है और इसीलिए समाज को तोड़ने वाले बयान दिए जा रहे हैं।
इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो यह विरोध प्रदेशभर में और तेज़ होगा। इंदौर की सड़कों पर “मां का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे गूंजते रहे।
निष्कर्ष
इंदौर का यह प्रदर्शन बताता है कि राजनीति में शब्दों की ताकत कितनी बड़ी होती है। जीतू पटवारी का बयान आंकड़ों से मेल न खाने के बावजूद भावनाओं को चोट पहुँचा गया। वहीं बिहार की घटना ने घाव को और गहरा कर दिया, क्योंकि इसमें सीधे प्रधानमंत्री की मां का नाम शामिल था। नतीजा यह हुआ कि इंदौर में दो अलग-अलग मुद्दों ने मिलकर एक विशाल आंदोलन का रूप ले लिया।
यह साफ है कि चाहे मामला महिला सम्मान का हो या मां के प्रति अपमान का—जनता ऐसे मुद्दों पर चुप नहीं बैठने वाली। राजनीति में शब्दों की सीमा लांघी जाएगी, तो सड़कों पर गुस्सा फूटेगा ही।

