kanha river

देश की स्वच्छता राजधानी के नाम से पहचान बना चुके इंदौर शहर में अब शहरी सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी की जा रही है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर कान्ह- सरस्वती नदी रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के लिए 671 करोड़ रुपए की केंद्रीय स्वीकृति की मांग रखी। इस प्रोजेक्ट को शहर के भावी विकास की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

इंदौर की नदियों का कायाकल्प

कान्ह नदी लगभग 28 किलोमीटर लंबी है, जबकि सरस्वती नदी करीब 13 किलोमीटर की धारा बहाती है। वर्षों से इन नदियों का स्वरूप प्रदूषण, अतिक्रमण और अव्यवस्थित विकास की वजह से बिगड़ता चला गया। नदियों में नालों का पानी और ठोस कचरा गिरने से इनका अस्तित्व खतरे में पड़ने लगा था। लेकिन स्वच्छता में लगातार नंबर वन रह चुके इंदौर ने इस चुनौती को अवसर में बदलने की योजना बनाई। रिवर फ्रंट के जरिये न सिर्फ नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा, बल्कि आसपास का इलाका शहरवासियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र भी बनेगा।

प्रोजेक्ट का खाका

नगर निगम इंदौर की ओर से तैयार प्रस्ताव के मुताबिक इस योजना के तहत नदियों के दोनों किनारों का सौंदर्यीकरण, पथ निर्माण, लाइटिंग, हरित क्षेत्र विकसित करने और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। साथ ही, सीवरेज लाइन को नदियों से पूरी तरह अलग किया जाएगा ताकि गंदा पानी सीधे नदी में न गिरे। इस कार्य से इंदौर के पर्यावरण संतुलन और पर्यटन दोनों को फायदा होगा।

महापौर की पहल

महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि इंदौर सिर्फ स्वच्छता में ही नहीं, बल्कि शहरी विकास के हर क्षेत्र में उदाहरण पेश करना चाहता है। इसी सोच के साथ उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से इस परियोजना के लिए आर्थिक सहयोग की मांग रखी। भार्गव ने स्पष्ट किया कि नगर निगम के संसाधनों से इतने बड़े स्तर का कार्य करना संभव नहीं है, इसलिए केंद्र सरकार की स्वीकृति बेहद जरूरी है।

केंद्रीय स्तर पर चर्चा

बैठक में केंद्रीय मंत्री खट्टर ने इंदौर की उपलब्धियों की सराहना की और आश्वासन दिया कि प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंदौर का मॉडल देशभर में शहरी विकास और स्वच्छता के लिए प्रेरणास्रोत है, और ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

संभावित लाभ

यदि यह प्रोजेक्ट मंजूर हो जाता है तो इंदौर में पर्यटन की संभावनाएं कई गुना बढ़ेंगी। शहरवासियों को एक नया रिवर फ्रंट मिलेगा जहां वे मनोरंजन, सैर और सांस्कृतिक आयोजनों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही, नदियों का जलस्तर और गुणवत्ता सुधरेगी, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम होगा। रिवर फ्रंट बनने से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालांकि परियोजना के रास्ते में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या अतिक्रमण और नालों का गंदा पानी है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण और तकनीकी जटिलताओं को भी सुलझाना होगा। लेकिन नगर निगम का दावा है कि जैसे शहर ने कचरा प्रबंधन में मिसाल कायम की है, वैसे ही इस प्रोजेक्ट को भी सफलता की ओर ले जाएगा।

निष्कर्ष

कान्ह–सरस्वती नदी रिवर फ्रंट परियोजना केवल इंदौर की सूरत बदलने का साधन नहीं है, बल्कि यह शहर की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने वाला कदम है। इस प्रोजेक्ट से इंदौर न केवल पर्यावरण के क्षेत्र में उदाहरण पेश करेगा, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी मजबूत बनेगा। साफ-सुथरी नदियाँ और व्यवस्थित घाट शहरवासियों को बेहतर जीवनशैली देंगी, वहीं पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। यदि केंद्र सरकार की स्वीकृति समय पर मिल जाती है, तो यह प्रोजेक्ट आने वाली पीढ़ियों के लिए इंदौर का गर्व बन सकता है। इस पहल से यह संदेश भी जाएगा कि स्वच्छता में अव्वल रहने वाला शहर अब प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में भी अग्रणी है।

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