इंदौर शहर ने बीते दो दिनों में ऐसी बारिश देखी जिसने आम जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। 3 सितंबर की रात से शुरू हुआ झमाझम दौर 4 सितंबर की सुबह तक चलता रहा। रातभर लगातार हुई मूसलधार बारिश ने शहर के कई हिस्सों में पानी भर दिया। प्रशासन को मजबूर होकर स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी।(Indore Heavy Rain) तालाब और नदियाँ लबालब हो गईं, वहीं मौसम विभाग ने आने वाले 72 घंटों के लिए फिर से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
रातभर की बारिश ने शहर की रफ्तार थामी
3 सितंबर की रात करीब 11 बजे से जो बारिश शुरू हुई, वह देर रात तक तेज़ होती गई। सुबह तक हालात यह रहे कि कई कॉलोनियों और निचले इलाकों में पानी भर गया। मौसम विभाग के अनुसार, केवल 12 घंटों में करीब 3.5 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सितंबर महीने के लिए औसत से कहीं ज्यादा है।
बारिश का असर इतना गहरा रहा कि कई मुख्य सड़कों पर पानी का बहाव दिखाई दिया। राजवाड़ा, बाणगंगा, पलासिया और विजय नगर जैसे क्षेत्रों में यातायात ठप हो गया। कई लोग सुबह दफ्तर निकलने ही पाए, तो कई जगह से स्कूल बसें वापस लौटा दी गईं।
तालाब और नदियाँ लबालब, खतरे का अंदेशा
इंदौर के प्रमुख तालाबों में लगातार पानी बढ़ रहा है। बिलावली तालाब का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कान्ह और सरस्वती नदी में भी तेज़ बहाव देखने को मिला। ग्रामीण इलाकों में छोटे बांध और नाले उफान पर हैं।
नगर निगम और प्रशासन की टीमें चौकसी में लगी हैं। राहत एवं बचाव दलों को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
स्कूलों में छुट्टी, लोगों को घर पर रहने की सलाह
भारी बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 4 सितंबर को स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया। कई निजी स्कूलों ने भी अभिभावकों को मैसेज भेजकर बच्चों को घर पर ही रहने की अपील की।
प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से कहा गया है कि अनावश्यक बाहर न निकलें।
अगले तीन दिन का पूर्वानुमान
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्पष्ट किया है कि इंदौर और आसपास के जिलों में 5 और 6 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रहेगा।
- 5 सितंबर: दिन में बादल छाए रहेंगे और दोपहर से शाम तक तेज़ बौछारें पड़ने की संभावना है।
- 6 सितंबर: गरज के साथ बारिश हो सकती है, जिससे निचले क्षेत्रों में फिर से पानी भरने की आशंका है।
- 7 सितंबर: बारिश की तीव्रता थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी।
IMD ने इस अवधि में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि प्रशासन और नागरिकों दोनों को सतर्क रहना चाहिए।
बारिश से मिली राहत भी, लेकिन चुनौतियाँ ज़्यादा
भारी बारिश ने एक तरफ़ तो शहरवासियों को उमस और गर्मी से राहत दी है। दिन का तापमान सामान्य से 4–5 डिग्री तक नीचे चला गया। हवा में ठंडक घुलने लगी है।
लेकिन दूसरी ओर, लगातार हो रही बारिश से शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खुल गई। जगह-जगह जलभराव से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मच्छरों की संख्या अचानक बढ़ने लगी है और डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है।
प्रशासन की तैयारी और चुनौतियाँ
नगर निगम ने दावा किया है कि उसकी सभी टीमें जलभराव वाले इलाकों में तैनात हैं। पंपिंग मशीनों से पानी निकाला जा रहा है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि कई जगह मदद देर से पहुंच रही है।
कलेक्टर कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि आपदा प्रबंधन दल और फायर ब्रिगेड पूरी सतर्कता से काम कर रहे हैं। ज़रूरत पड़ने पर राहत शिविर भी बनाए जा सकते हैं।

आम जनता की परेशानी
शहर की सड़कों पर गड्ढों में पानी भरने से हादसों का खतरा बढ़ गया है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। वहीं, सब्ज़ी मंडियों और स्थानीय बाज़ारों में कारोबार ठप पड़ गया।
कई कॉलोनियों में बिजली कटौती भी करनी पड़ी ताकि किसी दुर्घटना से बचा जा सके। लोग सोशल मीडिया पर लगातार तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं जिसमें जलमग्न सड़कें साफ दिखाई दे रही हैं।
निष्कर्ष
इंदौर की यह लगातार बारिश जहां मानसून की ताकत को दिखाती है, वहीं शहर की व्यवस्थाओं की सीमाएँ भी उजागर करती है। तालाबों का लबालब होना और नदियों का बहाव प्राकृतिक सौंदर्य तो बढ़ा रहा है, लेकिन इसके साथ ही जलभराव और बीमारियों की आशंका नागरिकों के लिए नई चुनौती है।
अगले तीन दिनों तक प्रशासन और जनता दोनों को सतर्क रहने की ज़रूरत है। बारिश ने भले ही मौसम को सुहाना बना दिया हो, मगर सुरक्षा और स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। अब देखना होगा कि इंदौर इस प्राकृतिक चुनौती से किस तरह निपटता है।

